सीएम हेमंत सोरेन ने पीएम मोदी से मांगा अलग धर्म कोड, अब सरना और आदिवासी धर्मकोड के लिए छिड़ी जंग

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Ranchi: आदिवासियों को अलग धर्म कोड कब मिलेगा? भारत की जणगनना में आदिवासियों के लिए अलग धर्मकोड का कॉलम क्‍या होगा. यह बड़ा सवाल है. झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने आदिवासी/सरना धर्म कोड का प्रस्‍ताव विधानसभा में पारित कर केंद्र के पास भेज दिया है. मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन पीएम मोदी से वर्चुअल मीटिंग के दौरान आदिवासियों के लिए अलग धर्म कॉलम की बात भी कही है. लेकिन वह अलग धर्म कोड का कॉलम क्‍या होगा. इस बात पर आदिवासियों के दो अलग-अलग गुट झारखंड में आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं.

राष्‍ट्रीय आदिवासी इंजीनियस धर्म समन्‍वय समिति के बैनर तले कई आदिवासी संगठन आदिवासी धर्म कोड के लिए आंदोलन किया जा रहा है. इनके द्वारा राजभवन के समक्ष धरना भी दिया गया. इसकी अगुवाई पूर्व मंत्री देवकुमार धान, गीताश्री उरांव और प्रेम शाही मुंडा जैसे राजनीतिक छवि वाले आदिवासी नेता कर रहे हैं. सभी सरना धर्म कोड को गलत बताते हुए आदिवासी धर्म कोड की मांग कर रहे हैं. वहीं धर्मकोड में हो रहे विवाद को राजनीतिक साजिश भी बताया जा रहा है.

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वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय आदिवासी समाज सरना धर्म रक्षा अभियान के बैनर तले 32 संगठन सरना धर्म कोड की मांग कर रहे हैं. इनके द्वारा देश के अलग-अलग राज्‍यों में कैंपेन चलाया जा रहा है. इस दौरान सरना धर्म गुरु बंधन तिग्‍गा गंभीर रूप से बीमार भी पड़ गए हैं. उन्‍हें पहले सिलीगुड़ी के एक अस्‍पताल में भर्ती कराया गया. उसके बाद उन्‍हें वेल्‍लोर शिफ्ट किया गया है. इस बीच सरना धर्म कोड की मांग को लेकर पूर्व निर्धारित 21 मार्च को महारैली का ऐलान किया गया है. धर्म गुरु के बीमार पड़ने के बाद डॉ करमा उरांव, रवि तिग्‍गा, नारायण उरांव और वीरेन्द्र भगत समेत कई आदिवासी समाज से जुड़े नेता महारैली की तैयारी की अगुवाई कर रहे है.

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आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड का प्रस्ताेव झारखंड विधानसभा से पारित तो कर दिया है. सीएम हेमंत सोरेन भी अब केंद्र से खुलकर इसकी मांग की जा रही है. लेकिन वह धर्म कोड आदिवासी होगा या सरना इसकी लड़ाई भी अलग-अलग संगठनों द्वारा जारी है. ऐसे में आदिवासियों की हक और पहचान के लिए वह धर्म कोड क्या होगा, यह बड़ा सवाल है?

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