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2019 लोकसभा चुनाव में देश के 8 बड़े मुद्दे तय करेंगे मतदाताओं का मिजाज

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New Delhi: लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) का आगाज हो चुका है. चुनाव का प्रचार-प्रसार और आरोप-प्रत्‍यारोप भी तेज हो गये हैं. बावजूद इसके चुनाव का पाला मतदाताओं के हाथ में ही है. इसलिए हर दल अपने क्षेत्र के मतदाताओं को रिझाने में लगा हुआ है.

ऐसे में यह बात अहमियत रखती है कि 2019 चुनाव में देश के कौन-कौन से बड़े मुद्दे प्रभावित करेंगे. इन्‍हीं मुद्दों के आधार पर मतदाता अपने उम्‍मीदवार को तौलेंगे. वहीं पुलवामा हमले के बाद एयर स्‍ट्राइक लोकसभा चुनाव को कितना प्रभावित करेगा यह भी देखने वाली बात होगी.

आइए जानते हैं देश के ऐसे ही 8 बड़े मुद्दे जो 2019 लोक सभा चुनाव के दौरान ज्‍यादातर मतदाता सोच रहे हैं.

राष्ट्रीय सुरक्षा

लोकसभा चुनाव से पहले पुलवामा हमला और उसके ऑपरेशन बालाकोट, फिर विंग कमांडर अभिनंदन का पाकिस्तान के फाइटर प्लान एफ-16 को मार गिराने की घटना की वजह से राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है. हालांकि विपक्ष मोदी सरकार पर सेना का इस्तेमाल राजनीति में करने का आरोप लगा रहा है तो मोदी सरकार का कहना है कि उसने सेना को फ्री हैंड दे दिया है. वहीं बीते 5 सालों में सुरक्षाबलों पर हुए हमले की खबरें आती रही हैं.

किसान

मोदी सरकार के कार्यकाल में किसानों से जुड़े संगठनों ने कई बार आंदोलन किए हैं. किसानों की मुख्य मांगे उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना रहा है. इसके साथ ही उनकी मांग इन्फ्रास्ट्रक्चर और मदद के लिए सिस्टम को लेकर भी रही है. वहीं किसानों की मांग कर्ज माफ करने की भी रही है. पीएम मोदी ने साल 2022-23 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया है वहीं कांग्रेस ने कर्ज माफी का. मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस की सरकारों ने कर्ज माफी का ऐलान कर दिया. दूसरी मोदी सरकार ने भी हर साल किसानों को 6 हजार रुपये मदद देने का ऐलान कर दिया. कुल मिलाकर चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष दोनों ही किसानों को महत्व को कम से कम चुनाव से पहले जरूर समझ रही हैं.

बेरोजगारी

विपक्ष, खासकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बार-बार पीएम मोदी सरकार से उस वादे के बारे में पूछ रहे हैं जिसमें उन्होंने 2 करोड़ रोजगार देने का वादा किया था. एक रिपोर्ट की माने तो भारत में बेरोजगारी की दर बीते चार दशकों में उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. साल 2018 में ही एक करोड़ नौकरियां कम हो गई हैं. बेरोजगारी इस चुनाव में एक अहम मुद्दा बनती जा रही है. इसी बीच मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए 10 फीसदी आरक्षण देने का भी प्रावधान कर दिया है.

गरीबी

गांवों में गरीबी कई चुनावों में अहम मुद्दा बन चुकी है. मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इसका नतीजा बीजेपी भुगत चुकी है. आंकड़ों के मुताबिक गांवों में वोट बीजेपी के पास से छिटक गया है. हालांकि लोकसभा चुनाव में भी यह ट्रेंड रहेगा इस पर कुछ साफ नहीं कहा जा सकता है.

व्यापार

जीएसटी और नोटबंदी का मुद्दा भी लोकसभा चुनाव में छाए रहने की उम्मीद है. हालांकि मोदी सरकार का दावा है कि दोनों ही फैसले देश की अर्थव्यवस्था के लिए ठीक रहे हैं. सवाल इस बात है कि लघु और मझोले उद्योग से जुड़े लोग और मध्यम वर्ग इन फैसलों से कितना खुश है.

भ्रष्टाचार

इस चुनाव में बीजेपी जहां यूपीए सरकार के समय हुए भ्रष्टाचार की लिस्ट याद दिलाएगी तो वहीं विपक्ष के पास राफेल का मुद्दा है.

राम मंदिर

80 फीसदी हिंदू आबादी वाले देश में राम मंदिर हर चुनाव से पहले मुद्दा बन जाता है. मामला सुप्रीम कोर्ट में है और मोदी सरकार इसी बात का सहारा लेकर सीधे तौर पर इसमें हाथ डालने से बचती रही है. हालांकि कभी राम मंदिर बीजेपी का मुख्य मुद्दा हुआ करता था और

राष्ट्रवाद+उदारवाद

राष्ट्रवाद का मुद्दा भी इस बार वोटरों का प्रभावित कर सकता है. बीते कुछ महीनों में ऐसी घटनाएं हुईं जो पहचान, बोलने की आजादी जैसे अधिकारों के मुद्दे के लिए खतरा बनती नजर आई हैं. कुछ लोगों का कहना है कि समाज में असहिष्णुता भी बढ़ी है.

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