अब ‘लोकल’ पर भी भौंकल पड़े हैं ‘देसी विरोधी’ लोग

by
Imran Ali

‘लोकल’ पर भोकल (वोकल). साहेब का ई वाला आइडिया भले ही दो दिन पहले टीवी पर अवतरित हुआ, मगर एक आभासी प्लेटफॉर्म पर यह बहुत पहले से ऑलरेडी फंक्शनल है. अब बूम कर चुका है, वेब सीरीज. हां, वेब सीरीज है वह प्लेटफॉर्म. इस वेब सीरीज की आड़ में ‘लोकल पॉर्न इंडस्ट्री’ और ‘लोकल पॉर्न स्टार्स’ अपनी अर्थव्यवस्था सुदृढ़ कर रहे हैं. शायद देश की भी। 2x की रेंज तक पहुंची यह शुद्ध लोकल पॉर्न इंडस्ट्री ‘लोकल’ वाले कॉन्सेप्ट का पूरा ख्याल रख रही है. दिन दूनी, रात चौगुनी ‘विकास’ भी कर रही है. ALT, MX Player, उल्लू, जी5, एंटरटेनमेंट आदि ‘MSME’ की तरह बेरोजगार और उपेक्षित ‘लोकल’ ‘कलाकारों’ को ‘2x पॉर्न मजदूरों’ (पॉर्न कलाकारों) के रूप में रोजगार दे रहे हैं. एकदम ‘लोकल’ फ्लेवर और कलेबर में. संघर्षरत ‘स्क्रिप्ट’ राइटर्स तो गजबे ढाह रहे हैं.

भारत में दशकों से लुक-छुपकर राज करनेवाले विदेशी पॉर्न को एक तरह से रिप्लेस ही कर दिया है इस ‘लोकल’ पॉर्न वेब सीरीज ने. सच में, बहुत्ते दम है ई ‘लोकल’ वाला कॉन्सेप्ट में. ‘मस्तराम’, जिसका ‘अश्लील’ साहित्य कभी रेलवे स्टेशनों, बस डिपो जैसे इलाकों में टपरी या ठेलों पर मैगजीन, अखबारों, किताबों के बीच छुप-छुपाकर अवैध रूप से बेचा जाता था (शायद आज भी बिकता है), वह ‘मस्तराम’ आज मैक्स प्लेयर और अन्य मोबाइल एप के जरिये स्मार्ट फोन पर खुलेआम नाबालिगों और युवाओं को सिड्यूस करता फिर रहा है, जो ‘अवैध’ की परिधि से बाहर निकलकर ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ की परिभाषा में सेंध लगा चुका है.

जियो, एयरटेल आदि का 4जी नेटवर्क अलग से सनसनाये हुए ई ‘लोकल’ पॉर्न इंडस्ट्री को. लॉकडाउन में तो और भी फनफनाये हुए है. भारत की नयी पीढ़ी को ‘औरत सेक्स की वस्तु है’ वाली मानसिकता का ‘लोकल’ संस्करण परोसा जा रहा है. So what? ‘संकट’ को ‘अवसर’ बनाने का भी तो टास्क मिला है न. भले ही यह ‘औरत की गरिमा’ के लिए खड़ा ‘संकट’ ही क्यों न हो. इसे ‘अवसर’ के रूप में ही देखना है, बस. सिर्फ ‘अवसर’ को ही देखना है. चिड़िया की उस आंख की तरह. चिड़िया (औरत) के अस्तित्व के दूसरे हिस्सों (गरिमा, इज्जत-विज्जत) की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं भटकाना है. एकदम आंख (चरम सुख) पर ही ध्यान लगाये रखना है.

इस ‘लोकल’ पॉर्न वेब सीरीज पर ‘कविता भाभी’ तो कुछ ज्यादा ही भोंकल… मेरा मतलब है… वोकल हैं. डेडिकेशन तो ऐसा है इनका इस ‘लोकल’ पॉर्न वेब सीरीज के प्रति कि इस ‘काम’ को करने को वह ‘पूजा करने’ की संज्ञा दे रही हैं. कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा भी उन्हें अपना ‘काम’ करने से नहीं रोक सकता है. ‘localkhabar.com’ में पब्लिश हुई खबर में तो उनके हवाले से यही बताया गया है (यह रहा लिंक- https://localkhabar.com/covid-19-kiss-and-intimate-scenes-face-mask/24166/ ). लीजिये, इस न्यूज वेब पोर्टल के नाम में भी ‘लोकल’ का कॉन्सेप्ट विराजमान है. इसका संचालन भी ‘लोकल’ स्तर पर ही हो रहा है, यानी रांची से ही. बहरहाल, इस खबर में कहा गया है कि ‘कविता भाभी’ (एकदम ‘लोकल’) कहती हैं, “ इंटीमेट सीन्स करने में कोई प्रॉब्लम नहीं है. अगर स्क्रिप्ट डिमांड करती है बोल्ड सीन्स, तो मैं करूंगी, क्योंकि मेरे लिए मेरा काम मेरी पूजा है, फिर चाहे लॉकडाउन हो या न हो.”

सच में, आर्थिक समृद्धि के इस दृष्टिकोण से भी ‘लोकल’ में बहुत्ते दम है. साहेब को तो विरोधी लोग बस ऐवईं लाइटली ले लेते हैं. ‘देसी (लोकल) विरोधी’ कहीं के. हूं.
इमरान अली के स्‍वतंंत्र विचार

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