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पूर्व विधायक अमित महतो के पैर धोने का आग्रह करते ललित ओझा का वीडियो वायरल

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Ranchi: रांची के नेता ललित ओझा ने आजसू पार्टी छोड़कर झामुमो का दामन थाम लिया है. मौके पर पूर्व विधायक अमित महतो भी थे. इस दौरान ललित ओझा ने आजसू और पार्टी के नेताओं के बारे में वहीं बातें कहीं जो एक नाराज व्‍यक्ति कहता है. इन सबसे अलग इस पूरे वाक्‍ये का एक वीडियो वायरल हुआ है. इस वीडियो में ललित ओझा अमित महतो की पैर धोने का आग्रह करते दिख रहे हैं.

फेसबुक पर इस वीडियो को पोस्‍ट करते हुए लिखा गया है कि राजनीति में इन दिनों नाटकबाजी का दौर है तो भला झारखंड में कैसे नाटक नहीं होगा… कल तक आलोचना करने वाले अब चरण पखारने लगे. इस वीडियो पर कई तरह के कमेंट किये जा रहे हैं. इमरान रजा अंसारी ने लिखा है- आसमान से गिरे खजूर पे लटके. तो सुमंत सुमन ने लिखा- यही राजनीति है.

पूर्व आजसू नेता ललित ओझा के बारे में ओरमांझी जिला परिषद सदस्य सरिता देवी ने कहा कि किसी के उपर इल्जाम लगाने से पहले अपने दमन पर जरुर झांक लेने चाहिए. उन्होंने कहा कि ललित जी महिला उत्पीड़न के आरोपी अमित महतो का पैर धोने में आपको थोड़ा भी शर्म नहीं आया. आपको तो  चूल्लु भर पानी में डूब जाना चाहिए था.

उन्होंने कहा कि सिल्ली के पूर्व विधायक अमित महतो पर वर्ष 2014 में विधानसभा चुनाव के दौरान सरकारी पदाधिकारी पर हमला करने, सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप है. कोर्ट में केस की समीक्षा के बाद उनकी अग्रिम जमानत याचिका को ख़ारिज कर दिया गया है. सरकार  ने महतो की बेल की अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता का नाम प्राथमिकी में मौजूद है. उन्होंने एक गंभीर अपराध किया है और इसके लिए उनको अग्रिम जमानत नहीं मिलनी चाहिए.

तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यकाल में चुनाव कार्य में डिस्टर्ब करने के आरोप में धारा  147, 148, 149, 341, 342, 323, 353, 354, 379 के अंतर्गत अमित महतो और अमिताभ चौधरी के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था. सह अभियुक्त अमिताभ चौधरी की अग्रिम जमानत भी खारिज कर दी गई है. ललित जी उस समय हेमंत सोरेन जी मुख्यमंत्री थे ।

महिला पदाधिकारी ने दर्ज कराया था केस

17 अप्रैल, 2014 को चुनाव ड्यूटी पर लगी एक महिला पदाधिकारी रांची डीसी के निर्देश पर खेलगांव, रांची की ओर गयी थी. उनके पास उस समय इवीएम भी था. इस दौरान वहां 200 लोगों की भीड़ ने उन्हें उन्हें घेर लिया था. उनलोगों ने महिला के साथ बदतमीजी की, हाथ खींचा और मोबाईल भी छीन लिया था. इवीएम को भी क्षति पहुंचाई गयी. एक अन्य अफसर ने उन्हें बचाने की कोशिश की तो उनको भी मारा गया. इसी मामले में महिला पदाधिकारी ने अमित महतो, जेवीएम नेता अमिताभ चौधरी और अन्य के खिलाफ धारा 147, 148, 149, 341, 342, 323, 353, 354, 379 के तहत केस दर्ज कराया था. इसके तहत राजकीय ड्यूटी पर तैनात पदाधिकारी से मारपीट करने, गाली गलौच करने और सरकारी काम में बाधा पहुँचाने का आरोप लगाया गया था. इस धारा के तहत आरोप सिद्ध होने पर आरोपी को तीन साल तक के लिए जेल जाना पड़ सकता है और कोर्ट द्वारा तय जुर्माना भी देना पड़ सकता है.    

कोर्ट ने माना संवेदनशील

सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता ने महतो की जमानत याचिका का विरोध किया और इसे गंभीर मामला बताया. कोर्ट ने भी मामले को सुनने के बाद ये माना कि इलेक्शन ड्यूटी पर तैनात महिला अधिकारी के साथ अभद्र हरकत हुई है और उसे अपने दायित्व निर्वहन से रोका गया जो एक गंभीर अपराध है. अतः अमित महतो, अमिताभ चौधरी को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती.

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