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Veeru Devgan नहीं बन सके हीरो, फिर बेटे Ajay Devgan को कैसे बनाया सुपर स्टार

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Mumbai: फिल्म अभिनेता अजय देवगन (Ajay Devgan) के पिता वीरू देवगन (Veeru Devgan) का मुंबई में निधन हो गया है. वीरू देवगन एक प्रसिद्द स्टंट मास्टर थे.

वीरू देवगन ने कई बड़ी और हिट फिल्मों में एक्शन सीन कोरियोग्राफ किये हैं. इसमें फिल्म इंकार (1977), मिस्टर नटवरलाल (1979), क्रांति (1981), हिम्मतवाला (1983), शहंशाह (1988), फूल और कांटे (1991) जैसी फ़िल्में शामिल हैं.

इसके लिए उन्हें कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया.

फिल्म अभिनेता अजय देवगन के पिता वीरू देवगन ने आज मुंबई में अंतिम सांस ली. उनकी तबियत बहुत समय से खराब चल रही थी. मुंबई में 27 मई 19 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा.

वीरू मशहूर स्टंट और एक्शन कोरियोग्राफर और डायरेक्टर थे. उन्होंने करीब 80 से अधिक फिल्मों में एक्शन कोरियोग्राफ करने का काम किया था. इसके अलावा उन्होंने ‘हिंदुस्तान की कसम’ नामक फिल्म का निर्देशन भी किया था.

निधन पर वीरू देवगन के करीबियों का संदेश

बॉलीवुड एक्टर विक्की कौशल के पिता और एक्टर-डायरेक्टर श्याम कौशल ने भी ट्विटर पर वीरू देवगन को श्रद्धांजलि दी है. उन्होंने लिखा, ‘RIP वीरू देवगन जी. अभी-अभी इस दुखद खबर के बारे में पता चला. एक्शन डायरेक्टर के रूप में हमेशा समय से आगे रहे. वह एक अच्छे इंसान थे. मैं उनकी दुआओं के चलते ही 8 अगस्त 1980 में स्टंट मैन बना था. उन्होंने मुझे अपनी टीम का हिस्सा बनाया.’

अशोक पंडित ने लिखा, ‘यह जानकर दुख हुआ कि मशहूर एक्शन डायरेक्टर वीरू देवगन नहीं रहे. जब कोई सुविधा भी नहीं होती थी, तब भी बिग स्क्रीन पर फाइट्स कोरियोग्राफ करने में वो कमाल थे. अजय और उनके पूरे परिवार के साथ मेरी सहानुभूति है.’

वीरू देवगन का बॉलीवुड जीवन

सन 1957 में 14 साल के वीरू देवगन बॉलीवुड में घुसने की चाह लिए अमृतसर में अपने घर से भाग गये, बिना टिकट लिए बंबई जाने के लिए फ्रंटियर मेल पकड़ ली और पकड़ें गये टिकट नहीं लेने के कारण दोस्तों के साथ हफ्ते भर जेल में रहे थे.

बनना चा‍हते थे हीरो

बाहर निकलने पर बंबई शहर और भूख ने उनको तोड़ दिया था. जहां उनके साथ आये कुछ दोस्त टूटकर अमृतसर वापिस लौट गये. लेकिन, वीरू देवगन नहीं गये. वह टैक्सियां धोने लगे और कारपेंटर का काम करने लगे.

हौसला लौटने पर फिल्म स्टूडियोज़ के चक्कर काटने लगे. उन्हें हीरो बनना था, लेकिन उन्हें जल्द ही समझ आ गया कि हिंदी फिल्मों में जो चॉकलेटी चेहरे हीरो और अभिनेता बने हुए हैं. उनके सामने उनका कोई चांस नहीं है.

अजय देवगन के सफलता पीछे वीरू देवगन की मेहनत

वीरू देवगन ने अपने बेटे अजय देवगन को हीरो बनाने के लिए बहुत कड़ी मेहनत की है. उन्हें कम उम्र से ही फिल्ममेकिंग, और एक्शन से जोड़ा. ये सब अजय के हाथों ही करवाते थे. कॉलेज गये. तो उनके लिए डांस क्लासेज शुरू करवाईं गई. घर में ही जिम बनावाया गया.

हॉर्स राइडिंग सिखाया और फिर उन्हें अपनी फिल्मों की एक्शन टीम का हिस्सा बनाने लगे. उन्हें बताने लगे कि सेट का माहौल कैसा होता है. जिसके चलते आज अजय फिल्ममेकिंग को लेकर बहुत सक्षम हो पाये है.

उन्होंने Inkaar (1977), Mr. Natwarlal (1979), Kranti (1981), Himmatwala (1983), Shahenshah (1988), Tridev (1989), Baap Numbri Beta Dus Numbri (1990), Phool Aur Kaante (1991) जैसी फिल्मों में एक्शन निर्देशन किया थाl

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