उग्रवादी हिंसा की पिडिता वीणा देवी को सात साल बाद भी नहीं मिली अनुकम्पा की नौकरी

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Ranchi: झारखंड के  सिमडेगा जिले के कोलेबि‍रा प्रखंड अंतर्गत ग्राम टूटीकेल निवासी वार्ड पार्षद स्व० अर्जुन सिंह  20 सितंबर 2011 को उग्रवादी हिंसा में मौत के शिकार हो गये थे.  घटना के बाद पुलिस अधीक्षक के जांच रिपोर्ट के आधार पर 20 जून 2013 को उपायुक्त , सिमडेगा की अध्यक्षता में ‘जिला अनुकम्पा समिति’ की बैठक हुई. बैठक प्रोसिडिंग की कण्डिका -2 में मृतक के पिडि‍ता पत्नी वीणा देवी को चतुर्थ वर्ग अनुसेविका में सरकारी अनुकम्पा नौकरी व सरकारी अनुग्रह राशि देने के लिए अनुसंशित कर गृह विभाग झारखंड सरकार के प्रधान सचिव के पास पत्राचार किया गया.

लेकिन उहापोह में वगैर आवंटन प्राप्त किये डिस्ट्रि‍क्ट फंड से 22 नवंबर 2013 के चेक सं०- 118854 के माध्यम से  3,00,000 (तीन लाख ) रुपये केन्द्रीय सहायता राशि सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक के द्वारा सिधे पिडि‍ता के बैंक खाते में भेजकर खाता को लॉक-अप कराते हुए सिर्फ ब्याज की राशि से गुजर-बसर करने को बोला गया. साथ ही यह भी कहा गया कि भविष्य में सरकारी अनुकम्पा नौकरी लगेगी तथा घटना के लगभग साढे तीन सालों बाद 13 अक्‍टूबर 2016 को पिडि‍ता को जिला कार्यालय में बुलाकर राज्य सरकार द्वारा प्रदत 1,00,000 (एक लाख ) रुपये का चेक भुगतान कर  अनुदान राशि की प्रतिपूर्ति के बाद ही अनुकम्पा नौकरी देने के लिए पिडि‍ता को आश्वस्त किया गया.

प्रशासनिक महकमे के द्वारा सरकारी अनुकम्पा नौकरी मे बिलम्ब होने पर  पिडि‍ता वीणा देवी के द्वारा 02 मई 2018 को उपायुक्त सिमडेगा को एक लिखित पत्र दिया गया. पत्र में उन्‍होंने केन्द्रीय सहायता राशि बैंक से वापस लेकर नौकरी देने के लिए गुहार लगायी, जिसे लेकर उपायुक्त जटा शंकर चौधरी के द्वारा विभागीय पत्रॉक 14(i) , दिनॉक 01.06.2018 के एक पत्र के तहत गृह विभाग , झारखण्ड सरकार के प्रधान सचिव से मार्गदर्शन मांगी गयी. लेकिन, गृह विभाग के विभागीय पत्रांक – 4098, दिनांक 20.07.2018 मे सरकार के अवर सचिव के द्वारा स्पष्ट किया गया कि बगैर केन्द्रीय सहायता भुगतेय राशि के प्रतिपूर्ति के बगैर अनुकम्पात्मक नौकरी अनुमान्य नहीं होगा. उक्त राशि की  प्रतिपूर्ति होने के बाद ही अनुकम्पा नौकरी पर विचार किया जाएगा.

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बहरहाल जिले के सामान्य शाखा के प्रभारी पदाधिकारी व  उपायुक्त सिमडेगा के द्वारा विभागीय ज्ञापॉक – 785(ii), दिनांक 24 अगस्‍त 2018 के एक पत्र का हवाला देकर कहा जा रहा है कि केन्द्रीय अनुदान राशि की 70℅ प्रतिपूर्ति हो गयी है और अब जल्द ही 30℅ राशि की  प्रतिपूर्ति हो जाएगा. इसके तुरन्त  बाद ही पिडि‍ता को अनुकम्पा आधारित चतुर्थवर्ग अनुसेविका पद की  नौकरी दी जायेगी.

भागदौड़ व सरकारी कार्यालयों का चक्कर काटने के बाद पिडि‍ता वीणा ने राज्य में काम कर रहे एक सामाजिक संस्था ‘ नागरिक अधिकार संरक्षण समिति’ के राज्य सचिव आनन्द किशोर पाण्डा के पास लिखित रूप से न्याय दिलाने की गुहार लगायी है. श्री पण्डा ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए मुख्यमंत्री जनसंवाद में शिकायत कर इसकी पूर्ण जांच कराकर   पिडि‍ता को अतिशिघ्र अनुकम्पा आधारित चतुर्थवर्ग सरकारी नौकरी दिलाने का आग्रह किया है .

नागरिक अधिकार संरक्षण समिति के राज्य सचिव श्री पण्डा का कहना है कि घटना के  7 वर्षो पर भी पिडि‍ता को सरकारी अनुकम्पा नौकरी नहीं देना सरकारी नियमावली व माननीय झारखंड उच्च न्यायालय के आदेशों की घोर अवहेलना है. साथ ही विभागीय उदासिनता का परिचायक के साथ-साथ मानवाधिकार का घोर हनन भी है. उन्‍होंने मुख्यमंत्री से पिडि‍ता को हर हाल में तुरंत नौकरी दिलाने की मांग  की है.

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