मेड इन इंडिया वंदे भारत ट्रेन का ट्रायल सफल, 180 की स्‍पीड में भी नहीं छलका पानी भरा ग्‍लास

New Delhi: सेमी-हाई स्पीड ट्रेन ‘वंदे भारत’ (Vande Bharat Train) को रेल सुरक्षा आयुक्त से हरी झंडी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Railway Minister Ashwini Vaishnav) ने शुक्रवार को इस बारे में मीडिया को जानकारी दी.

मीडियाकर्मियों से बात करते हुए वैष्णव ने कहा कि वंदे भारत ट्रेन (Vande Bharat Trail) के तीसरे रेक का ट्रायल रन पूरा हो गया है और यह भारतीय रेल के लिए बहुत गर्व का क्षण है.

पानी भरा गिलास 180 किमी स्‍पीड में भी नहीं छलका

ट्रेन और ट्रैक प्रबंधन के बारे में बात करते हुए रेल मंत्री कहा, “हमारा ध्यान केवल ट्रेनें बनाने पर नहीं है. हम सेमी हाई स्‍पीड या हाई स्‍पीड गति वाली ट्रेनों को चलाने के लिए ट्रैक प्रबंधन प्रणाली पर भी कड़ी मेहनत कर रहे हैं. वंदे भारत के परीक्षण (Vande Matram Trail) के दौरान हम पहले से ही दिखाया है कि पूरी तरह से भरा हुआ पानी का गिलास 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हिलता नहीं है, लेकिन इसने दुनिया को हिला कर रख दिया है.”

बुलेट ट्रेन से भी फास्‍ट स्‍पीड वंदे भारत की

वैष्णव ने यह भी बताया कि वंदे भारत का ट्रायल रन सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद अब शेष 72 ट्रेनों का सीरियल प्रोडक्शन जल्द शुरू होगा.

उन्‍होंने कहा कि तीसरी वंदे भारत ट्रेन की अधिकतम गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा है. बुलेट ट्रेन द्वारा लिए गए 55 सेकंड की तुलना में यह 52 सेकंड में 0-100 किमी प्रति घंटे तक पहुंच गई. पहली पीढ़ी की वंदे भारत ट्रेनें 0-100 तक पहुंचती हैं. 54.6 सेकंड में किमी प्रति घंटे और 160 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति है.

वंदे भारत ट्रेन लॉन्‍च डेट और रूट चार्ट

हालांकि तीसरी वंदे भारत ट्रेन के लॉन्च की तारीख और रूट की घोषणा अभी बाकी है.

वंदे भारत ट्रेन में मिलने वाली सुविधाएं

नई वंदे भारत ट्रेनों में यात्रा को सुरक्षित और अधिक आरामदायक बनाने के लिए रिक्लाइनिंग सीट, स्वचालित फायर सेंसर, सीसीटीवी कैमरे, वाईफाई सुविधा के साथ ऑन-डिमांड सामग्री, तीन घंटे का बैटरी बैकअप और जीपीएस सिस्टम सहित सुविधाओं में सुधार होगा. ICF ने अगस्त 2023 तक 75 वंदे भारत ट्रेनों के निर्माण का लक्ष्य रखा है.

इसमें वायु शोधन के लिए रूफ-माउंटेड RMPU में एक फोटोकैटलिटिक पराबैंगनी वायु शोधन प्रणाली भी है. सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स ऑर्गनाइजेशन (सीएसआईओ), चंडीगढ़ की सिफारिश के अनुसार, यह सिस्टम आरएमपीयू के दोनों सिरों पर कीटाणुओं, बैक्टीरिया, वायरस आदि से मुक्त हवा को फिल्टर और साफ करने के लिए डिजाइन और स्थापित किया गया है. ताजी हवा और वापसी हवा.

वर्तमान में परिचालित दो ट्रेनों की तुलना में नई ट्रेनों में यात्रा करना अधिक आरामदायक होगा. वजह यह है कि नई ट्रेनों के डिब्बे पुरानी ट्रेनों के मुकाबले हल्के होंगे. ट्रेन का वजन 38 टन घटाकर 392 टन कर दिया गया है और यह पटरियों पर दो फीट बाढ़ के पानी के साथ भी काम करना जारी रख सकती है. ये स्टेनलेस स्टील से बने होते हैं. वजन कम होने के कारण यात्री तेज रफ्तार में भी ज्यादा सहज महसूस करेंगे.

पायलट स्वचालित गेट संचालित करता है. खिड़कियां चौड़ी हैं, सामान रखने के लिए जगह ज्यादा है. शौचालय सुविधा उन्नत होगा. कुछ छोटे हिस्सों को छोड़कर ट्रेनों के अधिकांश हिस्से “मेड इन इंडिया” हैं.

यह भी उल्लेखनीय है कि इन ट्रेनों में अतिरिक्त सुरक्षा के लिए ‘कवच’ तकनीक लगाई गई है ताकि किसी भी ट्रेन के उसी ट्रैक पर आने की स्थिति में स्वचालित ब्रेक लगाया जा सके.

गौरतलब है कि वंदे भारत देश की पहली हाई स्पीड ट्रेन है. इन नवनिर्मित ट्रेनों की परीक्षण गति 180 किमी प्रति घंटा होगी, जबकि अधिकतम गति 160 किमी प्रति घंटे होगी.

वर्तमान में, जो दो ट्रेनें चल रही हैं, वे नई दिल्ली-वाराणसी और नई दिल्ली-वैष्णोदेवी कटरा के बीच हैं.

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