सरकारी योजनाओं में धड़ल्‍ले से हो रहा है अवैध बालू का इस्तेमाल, ये अधिकारी हैं दोषी

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Ranchi: झारखंड में सभी तरह की सरकारी योजनाओं में धड़ल्‍ले से अवैध बालू का इस्‍तेमाल किया जा रहा है. बालू का अवैध कारोबार की वजह से चार गुणा उंची कीमत पर बालू बेची जा रही है. अधिकारियों के संरक्षण में बालू कारोबारियों द्वारा अवैध खनन किया जा रहा है. इससे राज्‍य सरकार को पिछले एक साल में राजस्‍व का भारी नुकसान हो रहा है.

झारखंड में अवैध बालू खनन को लेकर विरोधी दल के मुख्‍य सचेतक बिरंची नारायण ने सरकार के खान विभाग को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्‍होंने बालू माफियाओं संग अधकारियों के मिलीभगत की बात कही है. उन्‍होंने माइनिंग इंस्‍पेक्‍टर सुबोध सिंह का प्रमुखता से नाम लिया है.

अपने पत्र में मुख्‍य सचेतक ने कहा है कि झारखंड में अधिकारियों और बालू माफियाओं के मिलीभगत से खूब अवैध खनन, परिवहन और व्यापार हो रहा है. राज्य में बालू जो एक-डेढ़ वर्ष पूर्व जिस दर पर जनता को प्राप्त होता था, आज उससे 4 गुणा अधिक राशि चुका कर जनता को बालू खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है.

राज्य सरकार ने पिछले एक साल से बालू घाटों की बंदोबस्ती/निलामी नहीं की है, जिससे सरकार को भी भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है और इस प्रकार बालू माफिया और अफसरों का गंठजोड़ के कारण जनता को 4 गुणा अधिक राशि चुका कर बालू खरीदने को विवश होना पड़ रहा है.

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विगत एक-डेढ़ वर्ष में जितने भी सरकारी और गैर-सरकारी काम हो रहे हैं, साथ में प्रधानमंत्री आवास एवं शौचालय, इत्यादि बनाये जा रहे हैं, सभी में बालू का प्रयोग हो रहा है. अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब सरकार और प्रशासन ने बालू का बंदोबस्ती/निलामी किया ही नहीं है, तो फिर यह बालू आ कहां से रहे हैं?

अभी एक तरीका ज्ञात हुआ है कि खनन विभाग के पदाधिकारी बालू डिपो अर्थात् बालू के भंडारण का परमिशन दे रहे हैं, लेकिन बालू के खनन पर राज्यभर में रोक है, क्योंकि विगत 1 वर्ष से राज्य के बालू घाटों के बंदोबस्ती/निलामी ही नहीं हुई है, ऐसे में बालू माफिया और खान विभाग के पदाधिकारियों के मिली-भगत से अवैध तरीके से बालू का खनन, दोहन और परिवहन करके बालू का भंडारण उक्त बालू डिपो में किया जा रहा है, जहां से उक्त अवैध बालू को बालू डिपो के मार्फत वैध बालू में तब्दील करके पूरे राज्य में बालू का लूट मचा है, जैसा कि मीडिया में भी प्रकाशित हुआ है.

मुख्‍य सचेतक ने पत्र में कहा है जैसा कि जानकारी मिली है कि कुछ स्थानीय जो उक्त बालू माफिया और अफसरों के गंठबंधन से बाहर जाकर स्थानीय स्तर पर ट्रैक्टरों, इत्यादि छोटे वाहनों के माध्यम से स्थानीय बालू घाटों से बालू लाकर सिर्फ जीविकोपार्जन के लिए बालू का व्यापार कर रहे हैं, तो उनकी धर-पकड़ जोरों से चल रही है और माइनिंग डिपार्टमेंट के लोग ही बालू समेत इन वाहनों को जब्त करवा कर महज कार्रवाई की खानापूर्ति कर रहे हैं, लेकिन बड़े स्तर के बालू माफियाओं पर प्रशासन का कोई लगाम नहीं है.

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बिरंची नारायण ने कहा है कि सबसे बड़ी विडंबना है कि जिला खनन पदाधिकारी जैसे पदों पर तो नियमित रूप से स्थानांतरण-पदस्थापन हो जाता है, लेकिन झारखण्ड के लगभग सभी वैसे जिले जहां पर बड़े-बड़े बालू घाट, इत्यादि खनन क्षेत्र हैं, वहां के खान निरीक्षकों और छोटे स्तर के कर्मियों एवं पदाधिकारियों का स्थानांतरण कई वर्षों से नहीं हुआ है, जिससे वे लोग स्थानीय खनन/बालू माफियाओं से गठजोड़ करके प्रत्यक्ष रूप से विभाग को हानि पहुंचाने का काम करते हैं.

जैसा कि झारखण्ड स्टेट मिनरल डेवलपमेंट कार्पोरेशन को राज्य के सभी बालू घाटों की निलामी करनी है, लेकिन यह वर्षों से संभव नहीं हो पाया है, अतः यह जांच का विषय है कि आखिर वे कौन लोग हैं, जो राज्य में बालू घाटों की बंदोबस्ती/निलामी को रोके हुए है ? अब उन अड़चनों को दूर करने की जरूरत आ गई है. 

जिस प्रकार जानकारी मिली है कि बालू डिपो के माध्यम से अवैध बालू के खनन को वैध व्यापार में तब्दील किया जा रहा है, अतः इसमें व्यापक स्तर पर जांच करने की जरूरत है कि, आखिर बालू उन बालू डिपो में आ कहां से रहे हैं? और अगर राज्य के बाहर से बालू लाए जा रहे हैं तो उनका चालान जो प्रदर्शित किया जा रहा है, वह सही है अथवा फर्जी?, क्योंकि इन बालू डिपो में जो बालू का भंडारण किया गया है, उसकी क्वालिटी स्थानीय बालू घाटों में उपलब्ध बालू के समान है, यदि बाहर राज्यों से बालू का परिवहन करके बालू डिपो में बालू लाया जाता तो बालू डिपो में उपलब्ध बालू की क्वालिटी स्थानीय बालू घाटों के बालू के क्वालिटी से अलग होती!

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उन्‍होंने अपने पत्र में कहा है कि जनहित में आग्रह है कि इस प्रकार के बालू के अवैध खनन, परिवहन और व्यापार पर तत्काल रोक लगाते हुए वर्षों से खनन कार्यालयों में जमे खान निरीक्षक एवं छोटे स्तर के कर्मियों का भी स्थानांतरण करते हुए यथाशीघ्र झारखण्ड के सभी बालू घाटों की बंदोबस्ती/निलामी की कार्रवाई की जाय, ताकि सरकार को भी राजस्व की प्राप्ति हो और जनता को भी सही रेट में बालू की उपलब्धता हो सके जैसे कि, एक वर्ष पहले उन्हें होती थी.

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