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बोफोर्स का अपग्रेडेड वर्सन आधुनिक देसी धनुष गन, सेटेलाइट से दुश्‍मन के ठिकाने का पता करके करती है फायर

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Jabalpur: जबलपुर की गन कैरेज फैक्टरी (जीसीएफ) में छह धनुष गन तैयार किया गया है. जिसे सेना के सुपुर्द कर दी गयी. रक्षा सचिव डॉ कुमार व बोर्ड के अध्यक्ष सौरभ कुमार ने बताया कि धनुष 155 एमएम 45 कैलीबर की आधुनिक आर्टिलरी गन में एक है. इस आर्टिलरी गन में 81 प्रतिशत पार्ट स्वदेशी है और लक्ष्य 91 प्रतिशत स्वदेशी पार्ट्स का है.

उन्होंने बताया कि इस गन की मारक क्षमता 38 किलोमीटर तक है. यह 13 सेकंड में तीन फायर कर सकती है. फायर करने के बाद गन अपनी पोजिशन चेंज कर करती है. उन्होंने बताया कि आर्टिलरी गन का वजन 13 टन है.

उन्होंने इस बात से भी इंकार किया कि यह बोफोर्स का अपग्रेडेड वर्जन है. बोफोर्स तथा धनुष के कुछ फंक्शन सामान्य हैं. यह रात के समय भी लक्ष्य पर निशाना साध सकती है. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने कुल 414 गन की मांग की है.

पूरी तरह देश में विकसित:  जानकारी के मुताबिक, 1990 में बोफोर्स के बाद अब जाकर कोई बड़ी गन सेना को सौंपी जा रही है. देश में विकसित सबसे बड़ी आर्टिलरी गन धनुष में कई खूबियां हैं. 2012 में इस पर काम शुरू हुआ था.

इसमें अपग्रेडेड कम्यूनिकेशन सिस्टम लगाया गया है. ये तोप सेटेलाइट के जरिए न केवल दुश्मन के ठिकानों की पोजीशन हासिल कर सकती है, बल्कि खुद गोले लोड कर फायर करने में भी सक्षम है.

114 तोप का नया ऑर्डर: जीसीएफ को नए वित्तीय वर्ष के लिए 114 तोप का बल्क प्रोडक्शन ऑर्डर हाल ही में हासिल हुआ. इसके बाद से उत्पादन की रफ्तार भी बढ़ा दी गई. 38 किलोमीटर दूरी तक निशाना साधने वाली इस एकमात्र तोप की तैनाती पाकिस्तान और चीन से लगी सरहद पर की जाएगी.

4599 राउण्ड फायर: धनुष की शुरुआत के साथ जुलाई 2016 से जून 2018 तक धनुष के कई ट्रायल किये गये. इसके अलावा नवंबर 2012 से अब तक कुल 4599 राउंड फायर किए जा चुके हैं। सेना ने इसे निम्न एवं उच्च तापमान में परखा है. देश में पांच जगहों पर हुए परीक्षण में फायरिंग के परिणाम सकारात्मक आये हैं.

धनुष की खासियत-

  • 3 फायर प्रति मिनट में डेढ़ घंटे तक लगातार दागने में सक्षम.
  • 155 एमएम बैरल से 38 किमी दूरी तक निशाना साधने में सक्षम.
  • 12 फायर प्रति मिनट करने की क्षमता भी हासिल.
  • 46.5 किलोग्राम का गोला किया जा सकता है फायर.

 

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