अनलॉक के बीच स्‍कूल-कॉलेज और कोचिंग संस्थानों को बंद रखना दुर्भाग्यपूर्ण

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Ranchi: कोविड संक्रमण के आड़ में शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करने एवं इससे जुड़े लोगों से संबंधित अहितकारी निर्णय लेने के रूप में सरकार की छवि स्थापित होती जा रही है. सरकार अन्य सभी  क्षेत्रों रेस्टोरेंट, सिनेमा हॉल, बैंक्वेट हॉल, स्टेडियम आदि को खोलने पर सकारात्मक निर्णय लेती है, परंतु जब बात शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विद्यालय, महाविद्यालय एवं कोचिंग संस्थानों की आती है तो सरकार नकारात्मक हो जाती है. उक्त बातें अखिल झारखंड छात्र संघ की प्रदेश सचिव ज्योत्सना केरकेट्टा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही है.

उन्होंने आगे कहा कि अनलॉक के बीच विद्यालय, महाविद्यालय एवं कोचिंग संस्थानों बंद रखना दुर्भाग्यपूर्ण है. जब विवाहों में 50  लोगों के शामिल होने की छूट दी जा सकती है, सिनेमा हॉल में युवा सिनेमा देखने जा सकते हैं, स्टेडियम में युवा खेल अभ्यास कर सकते हैं, युवा 10 से 08 के बीच बाजारों, दुकानों से शॉपिंग कर सकते है, बसों में बैठकर एक जिले से दूसरे जिले में जा सकते हैं तो क्या अपनी आधी क्षमता के साथ अल्टरनेट डे के हिसाब से छात्र- छात्राओं के साथ विद्यालय, महाविद्यालय एवं कोचिंग संस्थान कार्य नहीं कर सकते, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए.

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बीते 15 महीनों से संक्रमण एवं लॉक-अनलॉक के बीच सबसे ज्यादा नुकसान किसी का हुआ है तो वो है हमारे छात्र- छात्राएं, युवा एवं शिक्षा जगत से जुड़े लोग. सरकार अनलॉक से जुड़े निर्णय विभिन्न सेक्टरों को ध्यान में रख कर लेती है, परन्तु हर बार सरकार के निर्णय एजुकेशन सेक्टर के विपरीत होते हैं, छात्र- छात्राओं, युवाओं के भविष्य के विपरीत होते हैं.

उन्‍होंने कहा कि आजसू मांग करती है कि सरकार कम से कम वर्तमान में विद्यालयों में 08 से 10वीं कक्षा, महाविद्यालयों में इंटरमीडिएट, स्नातक, स्नातकोत्तर की कक्षा एवं निजी कोचिंग संस्थानों को 50 प्रतिशत क्षमता के साथ प्रारम्भ करें.

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