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उड़ता झारखंड: चुनाव में जीत का नया फार्मूला!

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Ranchi: लोकसभा चुनाव से पहले तक झारखंड में सरकार के नियंत्रण में शराब बेची जाती थी. सीमित दुकानें थी. खुलने का समय भी तय होता था. दोपहर एक बजे शराब की दुकानें खुलती थी और 10 बजे तक खुली रहती थीं. बीच में 4 बजे एक घंटे का ब्रेक होता था. तब वाइन शॉप पर लीकर लेने के लिए लंबी कतारें भी होती थीं. लेकिन चुनाव के ठीक पहले झारखंड सरकार ने सूबे में शराब का कारोबार पहले की तरह निजी ठेकेदारों को देने का फैसला लिया. पूरे राज्‍य में पहले से बहुत ज्‍यादा शराब की दुकानें खोली गईं. पंचायत स्‍तर पर अंग्रेजी शराब की दुकाने हो गई. और यकीन मानिये लोकसभा चुनाव में बीजेपी को झारखंड में कुल 14 सीटों में से 12 सीटें मिलीं.

क्‍या शराब से जुड़ा कारोबार झारखंड में बीजेपी सरकार के लिए अच्‍छा शगुन या फार्मूला है. लोकसभा चुनाव मे जीत के बाद अब झारखंड में विधानसभा चुनाव से पहले शराब की दुकानदारी को और बढ़ाने की बात कही जा रही है. रांची से प्रकाशित एक कथित बड़े अखबार की मानें तो झारखंड की रघुवर सरकार ने तय किया है कि अब झारखंड के किराना दुकानों में भी शराब उपलब्‍ध होंगी. यानि की अब आसानी से लोगों को शराब मिल सकेगा. और यह सब हो जाएगा विधानसभा चुनाव से पहले. तो आइए जानते हैं इस बारे में आम लोग क्‍या कहते हैं. आइए देखते हैं इस वीडियो में…

आप और हम सब यह जानते हैं कि शराब खराब है. नशे की रोकथाम के लिए कई कड़े कानून भी हैं. कोई भी इसका खुलकर बैनर-पोस्‍टर लगाकर प्रचार नहीं कर सकता है. फिल्‍मों में जब इस तरह के दृश्‍य दिखते हैं तो चेतावनी भी लिखी होती है.  पड़ोसी राज्‍य विहार में शराब पूरी तरह बैन है. लेकिन रघुवर सरकार का शराब बेचने के लिए इतना झुकाव चौंकाने वाला है.

झारखंड में भी नशे की रोकथाम के लिए कई कड़े कानून बने हैं.  सजा और दंड का भी प्रावधान हुआ. रांची नगर निगम अधिनियम में तो सिगरेट खैनी जैसे नशे के सामान बेचने को लेकर भी कई कानून हैं. नियम कहता है कि जहां सिगरेट, खैनी, पान-मसाला बेचे जाते हैं वहां किसी भी तरह की खाने-पीने की वस्‍तुएं नहीं बेची जा सकती हैं. दुकानदारों के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता की भी बात कही गई है. इस बारे में नगर निगम के द्वारा कई बार नोटिस जारी किया गया. लेकिन आज तक किसी पर कोई सख्‍ती नहीं की गई.

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