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लोकसभा में तीन तलाक विधेयक पारित, कांग्रेस का वाकआउट

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New Delhi: मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण (तीन तलाक) विधेयक गुरुवार को लोकसभा में पारित हो गया. सदन में बहस पूरी होने के बाद देर शाम इस विधेयक को लेकर वोटिंग हुआ. लोकसभा में इस कानून के पक्ष में 238 और विपक्ष में 12 वोट पड़े. वोटिंग से पहले कांग्रेस और एआइडीएमके ने सदन से वाकआउट किया. .

इस कानून में एक बार तीन तलाक को ग़ैर क़ानूनी क़रार देने और इसे तोड़नेवाले पति को तीन साल की सज़ा दिए जाने का प्रस्ताव पास किया गया है.

इससे पहले बहस के दौरान कांग्रेस और एआइडीएमके इस बिल पर और विचार के लिए संसद की संयुक्त चयन समिति के पास भेजने की मांग कर रहे थे. विपक्ष इस कानून में सजा का प्रावधान रखने का विरोध कर रहा था.

विपक्ष ने कहा गैरकानूनी

साथ ही विपक्ष का जोर इस बात पर था कि ये विधेयक सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करता, जिसमें तीन तलाक को गैरकानूनी ठहराया गया था और इस क़ानून का गलत इस्तेमाल हो सकता है.

मगर सरकार का कहना था कि ये विधेयक नारी के अधिकारों की हिफ़ाजत और सम्मान के लिए लाया गया है.सरकार का ये भी कहा था कि विपक्ष की  विपक्ष की आपत्तियों को सुनने और उनपर चर्चा के लिए तैयार हैं.

पिछले हफ्ते सदन में इसकी सहमति बनी थी कि 27 दिसंबर को विधेयक पर चर्चा होगी. एनटीवी की खबरों के मुताबिक बीजेपी और कांग्रेस ने लोकसभा के अपने सदस्यों के लिए व्हिप जारी किया है और चर्चा के दौरान सदन में उपस्थित रहने के लिए कहा था.

कैबिनेट ने दी थी मंजूरी

यह अध्यादेश सितंबर में लाया गया था, जिसके अंतर्गत त्वरित तीन तलाक को को भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध माना गया था. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले साल 15 दिसंबर को ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक’को मंजूरी प्रदान की थी.

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से पहले भी तीन तलाक विधेयक लाया जा चुका है. हालांकि तब लोकसभा में इसे मंजूरी मिलने के बाद कांग्रेस सहित कई अन्य विपक्षी दलों के इसके कुछ प्रस्तावों पर असहमति जताई थी .

इस दौरान केंद्र सरकार ने कई संशोधनों के साथ तीन तलाक को लेकर अध्यादेश पारित किया था जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं डाली गई थीं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने भाषण मे कहा था कि तीन तलाक प्रथा मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय है. तीन तलाक ने बहुत सी महिलाओं का जीवन बर्बाद कर दिया है और बहुत सी महिलाएं अभी भी डर में जी रही हैं.
हांलांकि इस बिल पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ( एआइएमपीएलबी) कहता रहा है कि विधेयक को लेकर मुस्लिम पक्ष की राय क्यों नहीं ली गई.

 

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