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धरती आबा बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि

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Runa Shukla

Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची से 70 किलोमीटर दूर खूंटी जिले में पहाड़ों- जंगलों से घिरे उलिहातू गांव में बिरसा मुंडा का जन्म हुआ था.

गौरतलब है कि झारखंड में लोग बड़े ही गर्व से बिरसा को भगवान मानते हैं और दूरदराज के गांवों में आदिवासी अब भी उनके लौटने का इंतजार करते हैं. उलगुलान के इस नायक को धरती आबा भी कहा जाता है . महज 25 साल की उम्र में बिरसा मुंडा की मौत हुई थी. देश के दूसरे राज्यों में भी आदिवासियों के बीच बिरसा मुंडा क्रांतिवीर के तौर पर पूजे जाते हैं.

भगवान बिरसा मुंडा की 9 जून को शहीदी दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती रही है लेकिन क्या वास्तव में यह सच्ची श्रद्धांजलि मानी जाएगी ?

सरकार ने निश्चित तौर पर गांव में सड़क और बिजली की बेहतर व्यवस्था की है इस गांव तक जाने वाली सड़क तो पक्की और चकाचक है, लेकिन इस चकमक सड़क के साथ क्या वास्तविक विकास पहुँच पाया है भगवान बिरसा के गाँव घर में?

तस्वीर नहीं बदली

15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती तथा 9 जून को पुण्य तिथि पर साहबों और राजनेताओं को उलाहातू आकर वादे- घोषणाएं करते ज़रूर देखा-सुना जाता है चाहें सरकार किसी की भी हो.

वैसे बिरसा मुंडा कांप्लेक्स, शौचालय, खेल का मैदान, अखड़ा भवन, आवासीय स्कूल समेत कई काम ज़रूर हुए हैं, लेकिन उलिहातू के लोगों को रोज़गार मिले, खेत और हलक को पानी मिले, गरीबी-तंगहाली दूर हो इसकी मुकम्मल व्यवस्था नहीं की जा सकी है.

भगवान बिरसा के वंशज एवं उलिहातू गांव में एक बात साफ़ तौर पर रेखांकित होती है कि नई पीढ़ी में रोज़गार की कसमसाहट तो है ही साथ ही हताशा-निराशा के स्वर भी सुनाई पड़ते हैं. खेती, यहां बारिश पर टिकी है,जबकि वनोत्पाद और दिहाड़ी मजदूरी जीने का मुख्य जरिया है.

शिक्षा और रोजगार की स्थिति इस गांव में बहुत खराब है. यदि सरकार धरती आबा को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहती है तो शिक्षा और रोजगार के स्तर में सुधार की सख्त आवश्यकता है जिस तरीके से उनके वंशजों ने अपने दर्द को साझा किया है निसंदेह यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी की अभी भी विकास इस गांव से बहुत दूर है.

जिस तामझाम के साथ बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि दी जाती हैं क्या उसी तामझाम के साथ उनके परिवार एवं उलिहातू गाँव के लोगों की सुविधाएँ बढ़ाई जाती हैं?  यह सवाल सत्ता पक्ष के साथ साथ विपक्ष से भी है क्योंकि श्रद्धांजलि देने के लिए सब आगे-आगे रहते हैं तो फिर उनकी समस्याओं के हल के लिए क्यों नहीं आगे बढ़कर आवाज उठाते हैं ?

परिवार के लिए रोजगार और पक्के मकान की व्यवस्था हो साथ ही बच्चों के लिए बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा की उचित व्यवस्था होनी चाहिए तभी धरती आबा को श्रद्धांजलि देना सार्थक होगा .

जिनके जन्म दिवस के अवसर पर झारखंड राज्य की स्थापना दिवस मनाई जाती है और लाखों खर्च किए जाते हैं अगर उसका कुछ हिस्सा उनके गांव में,विकास कार्यों में, शिक्षा,चिकित्सा, रोजगार पर खर्च किए गए होते तो उस परिवार की यह स्थिति में सुधार हुआ होता.

सरकार लाख दावे करती रहे कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचाया जा रहा है, लेकिन तस्वीरें सामने है. . उनका कहना है उलिहातू को आदर्श गांव बनाने के लिए कई काम होने हैं, लेकिन योजनाएं धरातल पर कब उतरेंगी, इसका इंतजार रहेगा.

– रुना (सामाजिक कार्यकर्ता)

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