रेड मिर्ची तत्‍काल सॉफ्टवेयर के जरिये रांची में रोज होता है 10 लाख रुपये के तत्‍काल टिकट बुकिंग का करोबार

#Ranchi: रांची और  हटिया रेलवे स्टेशन पर तत्काल  टिकट लेने के लिए काउंटर बनाये गये हैं. यात्री तत्काल टिकट लेने के लिए  लाइन में लगते हैं, लेकिन उनकी बारी आने तक तत्काल टिकट समाप्त हो जाता है. यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि तत्‍काल टिकट कालाबाजारी का बड़ा रैकेट है. जो एक खास सॉफ्टवेयर के जरिये ऑनलाइन चलाया जाता है.

रेल का तत्‍काल टिकटों की बुकिंग करने वाले इस सॉफ्टवेयर का नाम है ‘रेड मिर्ची तत्काल’. राजधानी रांची के लगभग सभी ट्रेवल एजेंटों के पास यह सॉफ्टवेयर मौजूद है. इस साफ्टवेयर की मदद से राजधानी के ट्रेवल एजेंट रोजाना 10 लाख रुपये से ज्यादा का तत्काल टिकट का कारोबार कर रहे हैं.

रांची रेल मंडल के एक वरीय अधिकारी की मानें, तो रेलवे बुकिंग काउंटर की तुलना में ट्रेवल एजेंट सात गुना से भी अधिक तत्काल टिकट रोजाना बेच रहे हैं. इसके पीछे की वजह है तत्काल टिकट बुक करनेवाले सॉफ्टवेयर ही हैं. ‘रेड मिर्ची तत्काल’साफ्टवेयर को वही एजेंट खोल सकते हैं, जो इसके लिए  निर्धारित शुल्क का भुगतान प्रतिमाह करते हैं.

राजधानी के ही एक ट्रेवल एजेंट ने को बताया कि वह ‘रेड मिर्ची तत्काल’ सॉफ्टवेयर के लिए संबंधित कंपनी को प्रतिमाह लगभग 5000 से 6000 रुपये का भुगतान करता है. जबकि, वह दूरी और क्लास के अनुसार से टिकट की दर के अलावा यात्री से 500-1000 रुपये वसूलता है.

ऐसे बुक होता है टिकट 

एजेंट ने बताया कि द्वारा तत्काल टिकट के लिए सफर करनेवाले यात्री से एक दिन पूर्व ही उसकी पूरी जानकारी ले ली जाती है. इसमें नाम, पता, श्रेणी, मोबाइल नंबर आदि शामिल होता.

रात में ही उस सॉफ्टवेयर में यात्री का पूरा डिटेल अपलोड कर दिया जाता है. सुबह जब रेलवे की अाधिकारिक वेबसाइट खुलती है, तो रेड मिर्ची तत्काल में लॉगइन करते ही करीब छह साइटें खुल जाती हैं. इसके बाद पहले से कंप्यूटर में डाली की सूचना के आधार में साइट तेजी से तत्काल टिकट आरक्षित कर देती है.

हटिया-रांची से 33 ट्रेनों का होता है परिचालन

हटिया-रांची से कुल 23 ट्रेनें प्रतिदिन रवाना होती हैं. इसके अलावा 10 ट्रेनें रांची और हटिया स्टेशन से होकर गुजरती हैं. एक रेल अधिकारी ने बताया कि रांची व हटिया से खुलने वाली विभिन्न ट्रेनों में यात्रियों के क्षमता के आधार पर हर श्रेणी में तत्काल कोटे की सीटें निर्धारित की गयी हैं. एक ट्रेन में एसी और स्लीपर की औसतन 100 सीटें ही हों, तो सभी 23 ट्रेनों में तत्काल कोटे के 2300 टिकट प्रतिदिन बिकते हैं.

रेलवे काउंटर और यात्रियों द्वारा अपने स्तर से लगभग 300 टिकटों की बुकिंग प्रतिदिन की जाती है. शेष टिकट एजेंट के माध्यम से ही यात्री लेते हैं. एक टिकट पर एजेंट अगर औसतन 500 रुपये ही चार्ज लेते हैं, तो 2000 टिकट से राजधानी के एजेंट प्रतिदिन 10 लाख रुपये से अधिक का कारोबार कर रहे हैं.

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