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बागी विधायकों ने कहा, बाबूलाल छुपकर अमित शाह से मिलते हैं

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#Ranchi: झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) से भाजपा में शामिल हुए छह विधायकों में से बचे हुए दो विधायकों की सुनवायी शुक्रवार को झारखंड विधानसभा की खुली अदालत में हुयी. विधानसभा के ट्रिब्यूनल में दल-बदल के आरोपी के रूप में पेश झाविमो के दो बागी विधायकों ने यह दावा किया कि पार्टी प्रमुख बाबूलाल मरांडी छुपकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिलते हैं.

दलबदल मामले में सुनवायी के दौरान अपनी गवाही दे रहे सरकार में कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने कहा कि झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) का भाजपा में विलय करने का फैसला बाबूलाल मरांडी का था जिसका सभी विधायकों ने समर्थन भी किया था. मरांडी ने शुरू में पार्टी की बीजेपी में विलय पर अपनी सहमति दे दी थी. लेकिन पार्टी के तत्कालीन केंद्रीय महासचिव प्रदीप यादव के कहने पर मरांडी ने अपना फैसला बदल दिया.

मंत्री रणधीर सिंह की गवाही के बाद झाविमो के अधिवक्ता आरएन सहाय ने उनसे पूछा की मरांडी ने अपना फैसला क्यों बदला? तो सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि मरांडी का कोई ”हिडन एजेंडा” रहा होगा जिस वजह से उस वक्त तुरंत विलय नहीं हो पाया. कृषि मंत्री ने कहा कि एक रेस्टोरेंट में यह फैसला हुआ था. बाद में पार्टी विधायक मरांडी के आवास पर भी गए और उनसे इस बाबत बात की.

इस पर झाविमो सुप्रीमो ने कहा कि पहले प्रदीप यादव को इसके लिए तैयार करना होगा. सिंह ने कहा कि घटते जनाधार के कारण झाविमो का भाजपा में विलय किया गया. रणधीर सिंह ने गवाही के दौरान अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्हें कभी भी पार्टी का संविधान दिया ही नहीं गया. पार्टी में केवल प्रदीप यादव की ही चलती है और उनकी तानाशाही के आगे सभी नतमस्तक हैं. उन्होंने कहा कि इस बात का उन्हें गर्व है कि वह भाजपा में हैं.

झाविमो से भाजपा में शामिल हुए दूसरे आरोपी विधायक और वर्तमान में झारखंड आवास बोर्ड के अध्यक्ष जानकी प्रसाद यादव ने गवाही के दौरान कहा कि वर्ष 2009-2014 के मध्य विधानसभा चुनाव में झाविमो के उम्मीदवारों का मत प्रतिशत गिरता जा रहा था. दूसरी तरफ पार्टी में तानाशाही चलती आ रही थी. पार्टी का संविधान आलमारी में बंद था, कभी भी उसे दिया नहीं गया. दोनों आरोपी विधायकों की गवाही के बाद विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने कहा कि प्रतिवादी पक्ष के सभी गवाहों की गवाही समाप्त हो गई है.

साथ ही छह प्रतिवादी विधायकों की भी गवाही पूरी हो गई है. आगे की वैधानिक प्रक्रिया के लिए उन्होंने वादी पक्ष को बहस शुरू करने को कहा. बता दें कि प्रतिवादी पक्ष की गवाही 14 जुलाई 2017 को शुरू हुई थी.

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