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लालू ने चिट्ठी में लिखी 44 साल बाद चुनाव प्रचार से दूर रहने का दर्द

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Ranchi: चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav latter) ने बिहार के लोगों के नाम जेल से एक चिट्ठी लिखी है. लालू की चिट्ठी तीन पन्ने की है. इसे लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव ने ट्वीटर पर भी शेयर किया है.

लालू की चिट्ठी में लिखी बातें

लालू प्रसाद ने इस पत्र में लिखा है, ई समय दोस्त और दुश्मन दोनों को पहचानने की घड़ी है. साथ में जुटके और जोड़के लड़ने की घड़ी है. मार्मिक अंदाज में लिखे इस पत्र के जरिए लालू प्रसाद ने अस्पताल में अपने अकेलेपन की चर्चा की है.

लालू प्रसाद यादव फिलहाल रांची स्थित राजेंद्र आर्युवज्ञान संस्थान में भर्ती है. वे कई बीमरियों की चपेट में हैं.

44 साल बाद चुनाव प्रचार से दूर रहेंगे लालू

सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानात याचिका खारिज कर दी है. लालू प्रसाद की जमानत याचिका खारिज किए जाने के साथ ही संकेत साफ हैं कि 44 साल बाद बाद पहली बार वे चुनाव प्रचार में शामिल नहीं रहेंगे. जाहिर है लालू प्रसाद और उनकी पार्टी के लिए ये मुश्किल की घड़ी है.

लालू ने पत्र के जरिए दलित और बहजुन साथियों से आग्रह कर रहे हैं कि दिल्ली की तख्त पर वंचित समाज के लोगों का कब्जा जरूरी है.

उन्होंने कहा है कि इस वक्त बिहार एक नई गाथा लिखने जा रहा है. यहां रांची के अस्पताल में अकेले में बैठकर सोच रहां हूं कि क्या विध्वंसकारी शक्तियां इस तरह कैद कराके बिहार में फिर किसी षड़यंत्रकारी पटकथा लिखने में सफल हो जाएंगी.

उन्होंने लिखा है, ”इस बार देश, समाज, लालू, आपका हक, आपकी इज्जत, गरिमा सब दांव पर है. लड़ाई आर- पार की है. मेरे गले में सरकार और चालबाजों का फंदा कसा हुआ है. उम्र के साथ शरीर साथ नहीं दे रहा. पर आन और आबरू की लड़ाई में लालू का ललकार हमेशा रहेगा. ई ललकार हमनारे सिपाहियों के दम पर है. मैं कैद में हूं पर मेरे विचार नहीं. इसलिए विचारों को साझा कर रहा हूं. हर आदमी को लालू बनकर लड़ना होगा. सामने चाहे कितनी भी मुश्किल हो, डर और धमीक हो, लालच हो खतराहो डटकर लड़ना होगा. और गरीब गुरबों की मान प्रतिष्ठा बचानी होगी.”

लालू ने यह भी कहा है कि भले दी दीवारों में चुनवा दिया जाए, पर जंग जारी रहेगी. उन्होंने कहा है कि ई सरकार नौटंकी की है. मुंह में राम बगल में छुरी चलाने वाली सरकार है. लालू के रहते कोई जालीबाज इधर झांकने की हिम्मत नहीं करता था. उन्होंने कहा है कि बिहार में सीट बंटवारे को लेकर सबका ख्याल रखा गया है. जिन नेता, कार्यकर्ता को टिकट नहीं मिला वे सब कुछ बचाकर आरक्षण और संविधान बचाने के लिए आगे आएं.

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