मिसाइल से भी ज्‍यादा खतरनाक इन गांवों के नाम

by
Yogesh Kislay

पता नहीं किस मूरख ने कहा था कि नाम मे क्या रखा है. नाम मे बहुत कुछ रखा है मित्रों!

मेरे पुश्तैनी गांव का नाम है चोरेया. बड़ी आबादी वाला ऐतिहासिक और पुराना गांव. कई मित्र गांव का नाम सुनते ही हंस देते हैं और कहते हैं चोर लोगो का गांव है चोरेया. अब गांव के नाम को लेकर मैं पूरा नरेटिव ही बदलने की कोशिश कर रहा हूं. मैं उन्हें बताता हूं कि जिस तरह भगवान कृष्ण को माखनचोर कहा जाता है उसी तरह चोरेया के लोग, लोगों का दिल चुरा लेते हैं इसीलिए गांव का नाम चोरेया है. एक नरेटिव यह भी बनाने की कोशिश कर रहा हूं कि चोरेया का असल नाम शौर्य था लेकिन अंग्रेजो के उच्चारण दोष के चलते यह चोरेया हो गया. मैं जानता हूं कि इस नरेटिव को स्थापित करने में सालों साल लग जाएंगे लेकिन एक प्रयास तो है. मैं इस बात को लेकर भी संतोष कर लेता हूं कि चोरेया से भी ‘खतरनाक’ नाम वाले गांव यहां मौजूद हैं इसलिए पहले उनपर मुस्कुराइए. चोरेया गांव के पास ही एक गांव है जिसका नाम उमेडण्डा है. आगे बढिये तो बुढ़मू है. इसी के आसपास गांड़े है. पूरब में जाये तो एक गांव है फूदी. उसी के पश्चिम में बड़ा नामी गांव है गाड़गांव. अब इसके आगे भी गांव है जिसका उल्लेख करना शिष्टाचार के दायरे में नहीं.

रांची में ही एक पुराना गांव है चूतिया. हालांकि लोग चुटिया कहकर शर्मिंदगी से बचने की कोशिश करते है. चूतिया उर्फ चुटिया से थोड़ा ही बगल में थड़ पखना है. पखना पैखाना का ही समरूप है. थड़पखना के ठीक पास में पथलकुदुवा है. नाम से ही लगता है कि थड़पखना में कोई शौच करने बैठा होगा उसे पत्थर मारकर कुदाया/खदेड़ा गया होगा. थड़पखना के पास ही लोहराकोचा है. लोहरा समुदाय के लोग यहां रहते होंगे, लेकिन कोच कोच कर क्यों रहते होंगे यह पता नहीं. रांची में ही एक जगह है कोनका. कोनका है तो कोनका का कोनकी भी होना चाहिए. इसलिए पिठोरिया के पास कोनकी भी है. अब कोनका और कोनकी है तो इनकी सन्तान भी होनी चाहिए. तो है इनकी सन्तान – कांके. मां-बाप का नाम रोशन कर रहा है और दुनियाभर में नाम कमाया कांके ने.

हजारीबाग में तो एक थाना है जिसका नाम ही दारू है. आप समझ सकते हैं कि इस थाने मे कितना मौज मजा होगा. बगल के रामगढ़ जिले में एक जगह है, मांडू. लेकिन कुछ दूरदर्शी मनचलों ने ‘ म’ अक्षर के बीच की एक लकीर मिटाकर म को ग बना दिया और लगभग सभी माइलस्टोन में मांडू की जगह कुछ और पढ़ने को मिलेगा.

हिंदी फिल्मो में कभी भी भारत के असली गांवों के नाम नहीं रखे जाते. रामगढ़, रामपुर, सीतापुर जैसे नाम भरे पड़े मिलेंगे. किसी भी गांव का नाम करकरिया, कुरकुरा, मखमन्द्रों, लोटा नहीं मिलेगा.

देश की राजधानी दिल्ली में तो नरकट गंज, पटपड़गंज है तो कड़कड़डूमा भी है. कड़कड़डूमा जिला के रूप में कम अदालत की हैसियत से अधिक जाना जाता है. लेकिन इससे भी अधिक नामवर तीसहजारी है. तीसहजारी (कोर्ट कहने की जरूरत भी नहीं) के नाम पर तो बड़ी कम्पनियों के दलाल और वकील फोन पर भी धमकाते मिल जाएंगे.

ऐसा नहीं है कि बुरे नाम वाले ही बदनाम है, कई अच्छे नामवाले भी कभी-कभी अप्रासंगिक हो जाते हैं. मैंने बेटी की शादी की तो दामाद की पोस्टिंग कन्याकुमारी के न्यूक्लियर पावर प्लांट में हुई. बेटी वहां जाते ही जिद करने लगी जिस जगह का नाम ही कुवांरी कन्या है वहां मैं शादीशुदा कैसे रहूं. मैंने पूछा कि कहां जाओगी. बोली — गो गो गोआ. अब वह गोआ में है. दिल्ली के तर्ज पर रांची के एक उपनगर का नाम है सिल्ली. महेंद्र सिंह धोनी अक्सर यहां फुटबॉल खेलने जाया करते थे. जब धोनी का क्रेज उफान पर था तो न्यूज़ चैनल के एक रिपोर्टर ने ब्रेकिंग न्यूज़ भेजी — धोनी आज सिल्ली के स्टेडियम में फुटबॉल मैच खेलेंगे. असाइनमेंट वालों को लगा कि यह प्रिंटिंग मिस्टेक होगा और सिल्ली की जगह दिल्ली होगा. अब दिल्ली के स्टेडियमों में रिपोर्टर और कैमरामैन खाक छानते रहे. वैसे आपका ज्ञान बढ़ाते चलूं कि MS का नाम धोनी उत्तराखंड के उसके गांव के नाम पर पड़ा है.

ऐसा नहीं है कि नामों की ऐसी श्रृंखला केवल झारखंड और बिहार में है. यह विश्वव्यापी रोग है. इंग्लैंड की राजधानी को एक पाकिस्तानी एंकर ने ऐसा उच्चारण किया कि यूट्यूब में वायरल हो गया. दरअसल उसने लंदन नाम का उच्चारण किया तो आखिरी अक्षर ‘न ‘ को गायब कर दिया. इसी तरह जब एक देश का ही नाम यूगांडा हो तो बंगलादेश ने अपनी राजधानी को ढाका (धक्का) बनाया.

पोस्ट बड़ा हो रहा है इसलिए जाते जाते चोरेया वाली घटना. गांव में एक भाई साहब का तिलकोत्सव था. तिलकहरू लोग रास्ता नहीं भटके इसलिए मुख्य सड़क से गांव पहुंचने के लिए एक बराहिल को लगा दिया गया. तिलकहरू लोगों ने बराहिल को छेड़ते हुए कहा- आपलोग तो ठीक-ठाक लोग हैं तो ये चोर-चोरेया जैसा नाम क्यों रखा है. बराहिल सयाना और हाजिरजवाब था. बोला- सो तो ठीक है हुजूर, लेकिन उन गांववालों के बारे में आप क्या कहेंगे जैसे- पेलावल, कुतियावाली, भैसा टिब्बी, चुतर… तिलकहरू लोग बोले- बस कर भाई , गलती हुई.

इसलिए कहता हूं नाम मे बहुत कुछ रखा है… इसी बहाने मेरा यह पोस्ट तैयार हो गया..

नोट : गांवों के सभी नाम बाकायदा मौजूद हैं…इसमें कोई हेर फेर नही किया गया है…

Categories Opinion

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