10 आदिवासी युवकों का कथित धर्म परिवर्तन, टूट रहा परिवार और सरना समाज

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Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची से 30 किलोमीटर दूर ओरमांझी प्रखंड में पहाड़ की वादियों के बीच बसा है गगारी पंचायत. यहां की प्राकृतिक वादियों की सुंदरता देखते ही बनती है. यहां के गावों में ज्‍यादातर हिन्‍दू और सरना धर्म को मानने वाले प्रकृति पूजक रहते हैं. अब यह इलाका इसलिए चर्चा में है कि यहां के 10 युवकों ने कथित तौर पर धर्म परिवर्तन कर लिया है. ये युवा पुरखों के सरना और हिन्‍दू धर्म का त्‍याग कर मसीही ईसाई धर्म का अनुसरण करने लगे हैं. हालांकि युवाओं के इस बदलाव से उनके परिवार और समाज के लोग हैरान हैं.

अविवाहित छोटे भाई दिनेश बेदिया के धर्म परिवर्तन के फैसले से उनके बड़े भाई धनेश्‍वर बेदिया न सिर्फ परेशान हैं बल्कि आहत भी हैं. अपनी पीड़ा बताते हुए वे भावुक हो जाते हैं. अपने आंसू रोक नहीं पाते हैं. धनेश्‍वर कहते हैं कि जिंदगी गरीबी में बीता है. खुद सरकारी स्‍कूल में पढ़ाई की, वहीं बहुत मेहनत और संघर्ष से छोटा भाई को अच्‍छे प्राइवेट स्‍कूल में पढ़ाया. आज दो कमरे का मकान है. कभी अपने छोटे भाई को अलग नहीं समझा. आज वह अपना धर्म अलग कर लिया. वो हमको बांट दिया. अभी भी उससे कहता हूं कि पूरी संपर्ति रख लो, मेरे लिए मे मां-बाप से बढ़कर कोई नहीं. जो उनका धर्म है वही हमारा धर्म है. आज मेरा भाई हमसे रिश्‍ता तोड़ लेना चाहता है. उसको दूसरा धर्म प्‍यारा है, हम उसके लिए प्‍यारे नहीं हैं, तभी तो वो छोड़कर दूसरे रास्‍ते पर जा रहा है.  

10 युवाओं के धर्म परिवतर्न पर जितेंद्र बेदिया खुले तौर पर कहते हैं कि यह कहना गलत होगा कि इन युवाओं को बिना प्रलोभान के अपना धर्म छोड़ रहे हैं.  वे उन युवाओं की रहन-सहन और बातों पर कई सवाल खड़ा करते हुए कहते हैं कि ये लोग कब और कहां चर्च देखा. आज ये लोग हमारे धर्म की बुराई भी कर रहे हैं. ये युवा कहते हैं कि भगवान राम का जन्‍म नहीं हुआ. ये बातें इन्‍हें कौन सीखा पढ़ा रहा है. यहां धर्म परिवर्तन करने वाले लोग मेरे से ज्‍यादा एजुकेटेड नहीं हैं. आज इनलोगों को संविधान के अनुच्‍छेद भी पता चल गया है. ये सब कहां से सीखा. इन लोगों को सीखाया पढ़ाया गया है और कहा गया है कि आप अनुच्‍छेद की बातें करिए लोग बुड़बक बनेंगे.  

गगारी पंचायत के दो अलग-अलग टोलों में रहने वाले वीरेंद्र बेदिया, दिनेश बेदिया, सूरज बेदिया, गंगा बेदिया, राजेश बेदिया, मजेंद्र नायक, भुवनेश्वर बेदिया, झुमरी देवी, जितेंद्र बेदिया और श्याम नायक सरना-हिन्‍दू धर्म का त्‍याग कर ईसाई धर्म के रीति-रिवाज का पालन कर रहे हैं. कुछ लोगों ने दावा किया है कि धर्म बदलने के फैसले से परिवार के दूसरे सदस्‍य भी साथ हैं.

ईसाई धर्म की ओर अपनी रूचि दिखाने वाले दिनेश कुमार बेदिया का कहना है कि लोग जिस तरह से कह रहे हैं कि कि पैसा या प्रलोभन देकर कोई हमें क्रिश्‍चन बना रहा है, ऐसी कोई बात नहीं है. बचपन से इस धर्म के प्रति रूचि थी. गांव वालों ने बैठक की. यहां हमें प्रताडि़त किया जा रहा है. धर्म परिवर्तन की कोई प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है. 2017 में कानून बनने के बाद अब यह आसान नहीं है. हम गांव में धर्म प्रार्थना करते हैं और प्रचार भी करते हैं.

धर्म बदलाव करने वाले बिरेंद्र बेदिया कहते हैं कि मैंने ईसाई धर्म को अपनाया है. मैं इसका प्रचार नहीं करता हूं. मैं हिन्‍दू लड़की से शादी किया हूं. प्रेम विवाह हुआ है. उन्‍होंने दावा किया कि घर में पत्‍नी और परिवार के लोग धर्म परिवर्तन से फैसले से खुश हैं. आस-पास चर्च नहीं है. जब रांची जाते हैं तो वहां कभी-कभार चर्च चले जाते हैं.

हमने कथित तौर पर धर्म परिवर्तन करने वाले कुछ और युवाओं के परिवार वालों और उनकी पत्नियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने अपने परिवार से नहीं  मिलवाया. ग्रामीणों बताया कि इनमें से माजेंद्र नायक और श्याम नायक ने भोले भाले सरना आदिवासी  को बहला-फुसलाकर प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं. सीता देवी बताती हैं कि कुछ साल पहले पति की तबियत खराब हुई थी. झाड़-फूंक से ठीक नहीं हुए. तब कुछ लोगों ने मदद की थी और कहा था कि हमारा धर्म और रीति रिवाज अपनाने का ऑफर किया था.

गगारी पंचायत में के 10 नवजवानों के कथित तौर पर धर्म बदलने की बात से हड़कंप मचा हुआ है. परिवार और समाज के शिकायतों के बाद रविवार को इस विषय पर समाज की पंचायती की गई थी. इसमें धर्म परिवर्तन की बात करने वाले युवकों को भी आमंत्रित किया गया था. लेकिन इस बैठक से युवाओं ने खुद को दूर कर लिया. हांलांकि पंचायत के जिम्‍मेदार लोग आपसी बातचीत से मामले को सुलझाने की बात कह रहे हैं.

गगारी पंचायत की मुखिया सीता देवी ने बताया कि धर्मांतरण को लेकर 27 सितंबर को बैठक रखा गया था. आदिवासासी समाज के लोग ईसाई धर्म और रीति रिवाज को अपनाने वाले 10 युवाओं के फैसले से खुश नहीं हैं. इसकी को लेकर समाज की बैठक बुलाई गई थी. संविधान हर किसी को अपना धर्म मानने का अधिकार देती है. समाज को इसकी जानकारी देने के लिए बैठक बुलाई गई थी. धर्म बदलने वाले युवाओं को खास तौर पर बुलाया गया था. लेकिन, इनमें से कोई भी बैठक में नहीं आया. हम बैठकर ही हर मसले पर बात कर सकते हैं. बैठक में नहीं आए इसलिए समाज के लोगों को अभी तक पता नहीं चला है कि किस वजह से ये लोग धर्म परिवर्तन कर रहे हैं. जब तक हम आमने-सामने बैठकर बात नहीं करेंगे जो भी परेशानी और कंफ्यूजन है वह दूर नहीं होगी. हम बातों को जानने की कोशिश कर रहे हैं.

अब यहां इस तरह से युवाओं द्वारा कथित तौर पर धर्म-परिवर्तन मामला सामने आने से परिवार और समाज टूट रहा है. हालांकि इलाके में दूर-दूर तक कोई ईसाई मसीही या चर्च नहीं है. अब गगारी पंचायत के लोग इस बात नहीं समझ नहीं पा रहे हैं कि गांव के युवाओं को कौन गुमराह कर रहा है. हालांकि धर्मारतण के घटना पर भाजपा ने सीधे तौर पर झारखंड सरकार को आड़े हाथों लिया है. सवाल के जवाब में भाजपा प्रदेश अध्‍यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा है कि जब से नई सरकार आई है झारखंड में लोगों को अपनी धर्म-संस्‍कृति की रक्षा पर संकट आ गई है.

हालांकि गगारी के ये सभी 10 युवा कानूनी तौर पर धर्म परिवर्तन नहीं किया है. इसके आड़े पिछली रघुवर सरकार की धर्मांतरण विधेयक-2017 आ रही है. इस कानून के अनुसार बलपूर्वक या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति या संस्था पर क़ानूनी कार्रवाई होगी. वहीं अपनी मर्ज़ी से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को स्थानीय उप आयुक्त/कलेक्टर को धर्म परिवर्तन की सूचना और स्थान बताना होगा और ऐसा न करने पर दंड का प्रावधान है.  

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