इसलिए मानाया जाता है वर्ल्ड पॉपुलेशन डे!

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न‍ितिश कुमार

किसी भी देश के लिए उसकी जनसंख्‍या कफी महत्‍वपूर्ण है लेकिन ये महत्‍व तब ज्‍यादा खतरनाक हो जाता है जब देश की संसाधन सीमित मात्रा में हो और जनसंख्‍या दर तेजी से बढ़ रहा हो. भारत की अगर की बात करें तो जिस गति से यहां की जनसंख्‍या दर बढ़ रही है, आने वाले समय में जल्‍द ही विश्‍व कि सबसे बड़ी अबादी वाले देश चाइना को पीछे छोड़ देगी. भारत में जनसंख्या को रोकने के समाधान और इस लोगों को जागरूक करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तमाम कोशिशें की जाती हैं. कई जगहों पर सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं तो कहीं पर इन विषयों को लेकर चर्चा की जाती है. साथ ही लोगों को विभिन्न प्रकार के गर्भनिरोधकों के बारे में भी जानकारी दी जाती है ताकि वह इन उपायों को अपना सकें और बढ़ती जनसंख्या पर रोक लग सके.  इसे लेकर दुनियाभर में विश्व जनसंख्या दिवस हर साल 11 जुलाई को जनसंख्या के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है. इस दिन को मानाने का उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या को रोकने व इसके प्रति लोगों को जागरूक करना होता है.

1872 में हुई थी भारत की पहली जनगणना

सन् 1872 में भारत की पहली जनगणना हुई थी. फिर 1881 के पश्चात् हर दशक के बाद लगातार भारत में जनगणना हो रही है. मार्च को निर्देश तिथि माना गया. आज़ादी के बाद अब तक भारत में जन्म दर में लगातार वृद्धि हो रही है और उसी अनुपात में मृत्यु दर में भी कमी हो रही है. यही कारण है कि भारत की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है.

क्‍यों मनाया जाता है वर्ल्ड पॉपुलेशन डे

यूनाइटेड नेशन ने 11 जुलाई 1989 को आम सभा में ‘ World Population Day’ मनाने का फैसला लिया था. दरअसल 11 जुलाई 1987 तक वर्ल्ड पॉपुलेशन का आंकड़ा 5 अरब के भी पार पहुंच चुका था. तब दुनिया भर के लोगों को बढ़ती आबादी के प्रति जागरूक करने के लिए इसे वैश्विक स्तर पर मनाने का फैसला लिया गया था.

वर्ल्ड पॉपुलेशन डे की थीम

विश्व जनसंख्या दिवस 2021 की थीम है- अधिकार और विकल्प उत्तर हैं: चाहे बेबी बूम हो या बस्ट, प्रजनन दर में बदलाव का समाधान सभी लोगों के प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों को प्राथमिकता देना है.

किस तरह मनाया जाता है वर्ल्ड पॉपुलेशन डे

वर्ल्ड पॉपुलेशन डे पर पूरी दुनिया में पॉपुलेशन कंट्रोल करने के लिए तरह-तरह से नियमों से लोगों को परिचित कराया जाता है. इसके अलावा परिवार नियोजन के मुद्दे पर लोगों से बातचीत की जाती है. इस दिन जगह-जगह जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों के जरिए लोगों को जागरूक करने की कोशिश की जाती है. जेंडर इक्वलिटी, मां और बच्चे का स्वास्थ्य, जेंडर एजुकेशन, गर्भनिरोधक दवाओं के इस्तेमाल से लेकर यौन संबंध जैसे सभी गंभीर विषयों पर लोगों से खुलकर चर्चा की जाती है.

​उठी टू चाइल्ड पॉलिसी की मांग

#TwoChildPolicy जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे थे। यहां सबकी मांग थी कि सरकार को जनसंख्या विस्फोट रोकने के लिए टू चाइल्ड पॉलिसी, मतलब अधिकतम दो बच्चों वाला कानून लाना चाहिए।

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