चीन को जवाब देने के लिए भारत ने लद्दाख में तैनात किए T-90 और T-72 टैंक

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New Delhi: भारत-चीन एलएसी तनाव को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच अनेक बार सैन्य वार्ता भी की गयी है. इस बीच भारतीय सेना के टैंक और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स पूर्वी लद्दाख में चुमार-डेमचोक क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास तैनात हैं.

भारतीय सेना ने BMP-2 इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स के साथ T-90 और T-72 टैंकों की तैनाती की है जो पूर्वी लद्दाख में चुमार-डेमचोक क्षेत्र में एलएसी के पास माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पर काम कर सकते हैं. यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह कठोर सर्दियों के दौरान जम न जाए, सेना ने 3 प्रकार के विभिन्न ईंधनों का प्रयोग किया है.

सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन के बीच लगभग पांच महीने से तनाव जारी है और सर्दियों के आगमन के साथ, भारतीय सेना की बख्तरबंद रेजिमेंट 14,500 फीट से अधिक ऊंचाई पर चीनी सेना को ले जाने के लिए तैयार हैं. गौरतलब है कि लद्दाख में सबसे अधिक सर्दियां देखी जाती हैं.

बता दें कि हालिया सैन्य वार्ता में चीनी सेना ने पैंगोग झील के दक्षिणी किनारे से सैनिकों को पीछे हटाने से शुरुआत करने पर जोर दिया लेकिन भारतीय सेना ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले सभी बिंदुओं पर गतिरोध दूर करने के लिए एक साथ कदम उठाए जाने चाहिए. सरकारी सूत्रों ने शुक्रवार को इस बारे में बताया.

सूत्रों ने बताया कि वार्ता के दौरान भारत और चीन की सेनाओं के बीच मतभेद उभरे और एक-दूसरे के उलट विचार जाहिर किए गए लेकिन दोनों पक्षों ने इस पर सहमति जतायी कि पूर्वी लद्दाख में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि तनाव नहीं भड़के. उन्होंने बताया कि भारतीय पक्ष ने भी चीनी प्रतिनिधिमंडल से कहा कि देपसांग तथा टकराव वाले सभी स्थानों से सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया चलनी चाहिए और यह चुनिंदा तरीके से नहीं बल्कि एक साथ होना चाहिए.

सूत्रों ने बताया कि चीनी पक्ष को बता दिया गया कि भारतीय सेना अपने देश के क्षेत्र की रक्षा के लिए असाधारण परिस्थिति में आग्नेयास्त्रों का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकिचाएगी. वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने हालात सामान्य बनाने पर सहमति जतायी. हालांकि, सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया पर कोई नतीजा नहीं निकला. सूत्रों ने बताया कि सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए सिलसिलेवार वार्ता की जरूरत है.

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