झारखंड नियोजन नीति पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, कहा- हाईकोर्ट का आदेश सही

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Ranchi: झारखंड नियोजन नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है. सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश सही बताया है. सुप्रीम कोर्ट में झारखंड की नियोजन नीति को रद्द करते हुए राज्य के 13 अनुसूचित जिलों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया रद करने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ एसएलपी आदिख की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अपना फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने नियोजन नीति को असंवैधानिक बताने के आदेश के झारखंड हाई कोर्ट के आदेश को सही ठहराया है. साथ ही शिक्षकों की नियुक्ति मामले में राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट बनाने का निर्देश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद 12 मई 2022 को मामले में फैसला सुरक्षित रखा था. झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ झारखंड सरकार और अनुसूचित जिलों के सफल अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई.

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नियोजन नीति को लेकर झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी गई थी चुनौती

बता दें कि झारखंड सरकार ने वर्ष 2016 में तृतीय और चतुर्थवर्गीय पदों पर नियुक्ति के लिए नियोजन नीति बनाई थी. इसमें अनुसूचित जिलों की नौकरी में सिर्फ उसी जिले के निवासियों को ही नियुक्त करने का प्रावधान किया गया था. गैर अनुसूचित जिले के लोग इसमें आवेदन भी नहीं कर सकते थे, जबकि गैर अनुसूचित जिले में सभी जिलों के लोग आवेदन कर सकते थे. सरकार की इस नीति को सोनी कुमारी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. इसमें प्रार्थी के अधिवक्ता ललित कुमार सिंह ने अदालत को बताया था कि राज सरकार की यह नियोजन नीति सही नहीं है और यह समानता के अधिकार का हनन है.

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सरकार के इस फैसले से किसी खास जिले के लोगों के लिए ही सारे पद आरक्षित हो गए हैं. संविधान के अनुसार किसी भी पद को शत-प्रतिशत आरक्षित नहीं किया जा सकता है. सरकार की इस नीति से इस राज्य के लोगों को ही अपने राज्य में नौकरी के अधिकार से वंचित होना पड़ रहा है. जिसपर सुनवाई के बाद झारखंड हाई कोर्ट ने 21 सितंबर 2020 को राज्य की नियोजन नीति को रद्द कर दिया था.

यहां यह भी बता दें कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने झारखंड नियोजन नीति के आलोक में वर्ष 2016 में 17,572 पदों के लिए हाई स्कूल शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी. बाद में सोनी कुमारी ने सरकार की नियोजन नीति और नियुक्ति विज्ञापन को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. प्रार्थी ने इसे असंवैधानिक बताया था जिसके बाद हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद सरकार की नियोजन नीति को असंवैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट ने उसे रद्द कर दिया था और 13 अनुसूचित जिलों में शिक्षकों की नियुक्ति को रद्द कर दिया था. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को हाईकोर्ट ने कहा था कि वह फ्रेश आवेदन लेकर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करे. गैर अनुसूचित जिलों में नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने का भी निर्देश दिया था. जिसके खिलाफ शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की गई थी. मामले में राज्य सरकार की ओर से भी एसएलपी दायर की गई थी.

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