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आरक्षण पर सुदेश महतो ने दी मोदी सरकार को चुनौती

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Ranchi: 2011 के जनगनणा में पहली बार सामाजिक-आर्थिक आधार पर जातिगत जनगणना की गयी थी. इस रिपोर्ट को वर्तमान मोदी सरकार सार्वजनिक करे. अगर जातिगत जनगणना की रिपोर्ट जारी नहीं कर रहे हैं, तो सरकार को इसका वजह भी बताना चाहिए. यह बातें रांची में आयोजित अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग सभा और अखिल झारखंड पिछड़ा वर्ग महासभा में आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने कही.

सुदेश ने अपने संबोधन में कहा कि मैंने पीएम मोदी से मिलकर कहा था कि झारखंड के लोग आपसे बहुत उम्‍मीद रखते हैं. उन्‍होंने कहा कि लोगों को जब यह बताया गया कि मोदी जी भी ओबीसी से आते हैं, तब लोगों की धारणा बदली थी. लोग एकजुट हुए थे. लोगों को लगा था कि मोदी जी का नेतृत्‍व आयेगा तो हमें अवसर मिलेगा. लेकिन बीते साढ़े चार सालों में कुछ पहल जिला के आधार पर तो हुए, पर उसकी जरूरत क्‍या थी. 2011 का जातिगत जनगणना का रिपोर्ट सार्वजनिक हो जाये तो इसकी जरूरत ही नहीं है.

सुदेश कुमार महतो ने कहा है कि आरक्षण सिर्फ आर्थिक आधार का नहीं प्रतिनिधित्व और भागीदारी का सवाल है. साथ ही हिस्सेदारी का मसला है. आर्थिक तौर पर इसे जोड़ कर देखा जाना या इस मुद्दे पर किसी तरह का कदम उठाया जाना बड़ी आबादी के हितों के साथ न्याय नहीं हो सकता.

उन्होंने कहा कि इस अधिवेशन और सम्मेलन के जरिए पहले से इस विषय पर छिड़ी बहस को वे बड़े दायरे में ले जाना चाहते हैं. क्योंकि पिछड़ा वर्ग अपनी आबादी के हिसाब से संवैधानिक अधिकार पाने का हकदार है, जिसे वंचित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आरक्षण के सवाल को बार-बार आर्थिक तानाबाना से जोड़ कर देखा जाता है. जबकि ज्यादा जोर इन बातों पर हो कि नौकरियों में नियुक्तियां और शिक्षण संस्थानों में दाखिले की भागीदारी सुनिश्चित हो और प्रतिनिधित्व करने का सीधा मौका भी. तभी बाबा साहब भीम राव अंबेडकर की नीति-सिद्धांत और सपने साकार हो सकते हैं. इस दिशा में संसद को भी संकीर्ण और दलीय दायरे से बाहर निकलकर पारदर्शिता और निष्पक्षता से सोचना होगा. फैसला लेना होगा.

उन्होंने कहा कि झारखंड में पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग को लेकर झारखंड पिछड़ा वर्ग महसभा लगातार आवाज उठाती रही है. साथ ही इस मांग पर जोर दी जाती रही है कि ’जिसकी जितनी संख्या उसकी उतनी हिस्सेदारी’. इसके अलावा राज्य के 13 जिलों में जो रोस्टर प्रणाली लागू की गई है, उसमें तत्काल सुधार किए जाने की जरूरत है.

श्री महतो ने कहा कि झारखंड राज्य में साल 2002 में मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने 73 फीसदी आरक्षण देने की अनुशंसा की थी. उस उपसमति में मैं भी था. सरकार ने इस बारे में प्रस्ताव भी पारित किया. लेकिन बाद में न्यायिक स्तर पर पहल नहीं की. झारखंड के पिछड़ों की आखिर टीस क्या है. एकीकृत बिहार में पिछड़ा वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण हासिल था. अलग राज्य गठन के बाद यह 14 प्रतिशत हो गया.

उन्होंने कहा कि सरकार कोर्ट के आदेशों का हवाला देती रही कि वह 50 फीसदी के दायरे से आगे नहीं बढ़ सकती. लेकिन तामिलनाड़ु, केरला, हरियाणा हिमाचलप्रदेश, आंधप्रदेश में पिछड़ों को 30 से 50 प्रतिशत तक आरक्षण हासिल है. बिहार में ही पिछड़ों को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है.

यानि उन राज्यों में 69 से 72 प्रतिशत तक संपूर्ण आरक्षण की व्यवस्था की गई है. दरअसल राज्य की सरकारें आरक्षण की सीमा पचास प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा सकती है. इसके लिए भी सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला पहले ही आया है. श्री महतो ने कहा कि मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं करने से भी बड़ी आबादी अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित होती रही है. वर्तमान हालात के मद्देनजर निजी क्षेत्रों में भी आरक्षण की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए.

पिछड़ों के साथ झारखंड में बड़ा अन्याय किया जा रहा है: चंद्रप्रकाश चौधरी

सम्मेलन में मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ने कहा है कि एकीकृत बिहार में हमलोग को 27 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त था, लेकिन अलग राज्य गठन के बाद झारखंड में पिछड़ा वर्ग अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित हो गया. इस बारे में अखिल झारखंड पिछड़ा वर्ग महासभा ने सरकार के कई बार ध्यान दिलाया गया है. वास्तव में पिछड़ों के साथ झारखंड में बड़ा अन्याय किया जा रहा है. राज्य सरकार और केंद्र सरकार से मैं मांग करता हूं कि झारखंड में पिछड़ों को 27 प्रतिशत का आरक्षण दिया जाए.

उन्होंने कहा कि दूसरे कई राज्यों में 69 से 72 प्रतिशत तक आरक्षण दिया है. झारखंड का पिछड़ा समाज अपने अधिकार के लिए आवाज मुखर करे. आने वाले चुनाव में यह सबसे बड़ा मुद्दा होगा. उन्होंने कहा कि अधिकार लेने के लिए आगे आएं. उन्होंने कहा कि साजिश के तहत पिछड़ों का आरक्षण रोक रखा गया है. इसलिए अखिल झारखंड पिछड़ा वर्ग महासभा के सदस्य और पदाधिकारी गांव-गांव में जाएं और लोगों को एकजुट करें. हमलोगों को यह निर्णय लेना होगा कि पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, तो तभी समर्थन दिया जाएगा.  उन्होंने कहा कि आरक्षण को लेकर सरकार को अपना नजरिये में बदलाव लाया जाना चाहिए. अभी मुख्यमंत्री ने जिलों को उपायुक्तों को पिछड़ा वर्ग के बीच सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया है. जबकि पहले ही झारखंड में सामाजिक आर्थिक जनगणना को लेकर सर्वेक्षण का काम किया जा चुका है.

इस लड़ाई को मुकाम तक ले जाएंगे-सहिस

सम्मेलन में आजसू के विधायक रामचंद्र सहिस ने कहा कि अलग राज्य की लड़ाई में बहुत कुछ खोने के बाद भी हम अपने ही राज्य में हक, अधिकार से वंचित हो रहे हैं. आरक्षण का मसला देश और राज्य में समानता की लड़ाई है. इस देश में सभी वर्ग को समान भागीदारी मिलना चाहिए.

उन्होंने कहा कि साल 2002 में सरकार के मंत्री रहते हुए सुदेश कुमार महतो की पहल पर मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने 72 प्रतिशत आरक्षण की अनुशंसा की थी. इसमें अनुसूचि जनजाति को 32 पिछड़े को 27 तथा अनुसूचित जाति को 14 फीसदी आरक्षण देने की अनुंशसा की गई थी. लेकिन वह राज्य में लागू नहीं हुआ.

अब पिछड़ा वर्ग जग गया हैः उमाकांत रजक

पार्टी के वरिष्ठ नेता उमाकांत रजक ने कहा कि 27 प्रतिशत आरक्षण पिछड़ों का हक बनता है. देश एक है. संविधान एक है. लेकिन आरक्षण की नीति में विसंगितयां हैं. तामिलनाड़ु में पिछड़ों को पचास प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है. केरल में चालीस प्रतिशत मिल रहा है. बिहार में 33 प्रतिशत मिल रहा है.

उन्होंने कहा कि 29 नवंबर 2001 में झारखंड मे कैबिनेट ने 72 फीसदी आरक्षण देने का फैसला लिया था. उस फैसले को लागू करने में सरकार ने कभी ठोस कदम नहीं उठाएं. पिछड़ा वर्ग अब जग गया है. सरकार इस मामले में बड़ी आबादी की भावना का ख्याल करे, वरना अंजाम भुगतना होगा.

महाधिवेशन में पारित किए गए प्रस्ताव-

  • झारखण्ड में पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव पारित किया गया.
  • अनुसूचित जनजाति को 32 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव पारित किया गया.
  • अनुसूचित जाति को 14 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव पारित किया गया.
  • मंडल आयोग के सभी सिफारिशों को देश में लागू करने का प्रस्ताव पारित किया गया.
  • सरकारी एवं अर्धसरकारी क्षेत्रों के साथ-साथ निजी क्षेत्रों में भी आरक्षण व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव पारित किया गया.
  • 13 प्वाईंट रोस्टर को निरस्त कर 200 प्वाईंट रोस्टर को पुनः बहाल करने का प्रस्ताव पारित किया गया.
  • सभा के अंत में इंद्र कुमार सिंह चंदापुरी को अगले राष्ट्रीय अधिविशन तक के लिए अध्यक्ष चुना गया.

सम्मेलन से सर्वप्रथम जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी गई. सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखा. साथ ही अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ और अखिल झारखंड पिछड़ा वर्ग महासभा देश के साथ खड़ी है. इसके अलावा हाल में ही अखिल भारत पिछड़ा वर्ग सभा के उपाध्यक्ष डॉ एम ए खान की माता के निधन को लेकर भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गई.

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