तो क्‍या चाइनीज सामानों का विरोध रघुवर दास का विरोध माना जायेगा

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झारखंड के मुख्‍यमंत्री रघुवर दास चीन यात्रा में हैं. मुख्‍यमंत्री वहां निवेश की संभावनाओं को तलाश रहे हैं. इसके लिए उनके साथ मंत्रियों और अधिकारियों का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल भी गया है. यह वहां के सत्‍ता के लोगों और बिजनेसमैन से मुलाकात कर रहे हैं.

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग में झारखंड का स्‍थान गुजरात से बेहतर रहा. जुलाई 2018 में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग रिपोर्ट में झारखंड को चौथा स्‍थान मिला. झारखंड की इस रैंकिंग से दुनिया भर के निवेशकों के बीच झारखंड की छवि बेहतर हुई है.

इसी तरह के रिपोर्ट से प्रभावित होकर मिनिस्टर ऑफ इंटरनेशनल डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के सोंध थाओ ने मुख्‍यमंत्री रघुवर दास से कहा कि झारखंड में जो निवेश का वातावरण है, झारखंड का जो ग्रोथ रेट है, ईज ऑफ डुइंग बिजनेस है, जो बिजनेस इंवायरमेंट है वह प्रशंसनीय है. उन्होंने कहा कि हालांकि झारखंड एक नया राज्य है, लेकिन ये 8.2 प्रतिशत के ग्रोथ रेट से बढ़ रहा है जो कि हाईली एप्रेसिएबल है. उन्होंने ये भी कहा कि झारखंड में निवेश की काफी संभावनाएं हैं.

चीनी मंत्री से झारखंड की तारीफ सुनकर मुख्‍यमंत्री रघुवर दास बहुत खुश हैं. खुश भी क्‍यों न हों. मुख्‍यमंत्री रघुवर दास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंतिम चीन दौरे के बाद से देश के किसी राज्य के पहले मुख्यमंत्री के तौर पर चीन में ये दौरा किया है. इसे बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भारत-चीन सम्बन्ध और चीन का भारत के विभिन्न राज्यों के साथ जिस प्रकार से निवेश का एवं बेहतर सम्बन्धों की कोशिश हो रही है, उस दृष्टि से यह दौरा बहुत महत्वपूर्ण है.

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड राज्य में 29-30 नवंबर 2018 को आयोजित होने वाले ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट 2018 के बारे जानकारी देते हुए कहा कि इसमें विश्व के कई देशों के एग्रीकल्चर एंड फूड प्रोसेसिंग से संबधित कई कंपनिया भाग लेंगी. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सोंध थाओ को भी चाइनीज कंपनियों को इसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित किया.

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ज़ेनजो (Zhengzhou) सिटी स्थित शेनचुवान (Sanquan) कंपनी के चेयरमैन शेन जेमिन (Chen Zemin) को झारखंड में सब्जियों के उत्पादन और फूड प्रोसेसिंग की संभावनाओं के बारे में अवगत कराया. मुख्यमंत्री ने झारखंड की फूड प्रोसेसिंग नीति तथा उद्योगों के लिए जो सुविधाएं झारखंड सरकार दे रही है, उसकी जानकारी दी. इसके अलावा उन्हें झारखंड आ कर इस संभावनाओं को समझने के लिए आमंत्रित किया.

झारखंड में ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट 2018 29-30 नवंबर को आयोजित होगा. इसमें कई चाइनीज कंपनियां भी भाग लेंगी. इस प्रचार प्रचार झारखंड सरकार मोमेंटम झारखंड की तरह करना चाहेगी. रांची शहर में चाइनीज निवेशकों और कंपनियों और मुख्‍यमंत्री के बड़-बड़े पोस्‍टर लगेंगे.

इस कार्यक्रम का जिस समय खूब प्रचार-प्रसार होगा. वह त्‍योहारों का है. दुर्गा पूजा, दशहरा, दिवाली, धनतेरस और छठ त्‍योहार सब एक महीने के भीतर ही संपन्‍न होंगे. इन त्‍योहारों के दौरान बाजार में चाइनिज सामान भरे रहते हैं. कई सामाजिक संगठन इन चाइनिज सामानों का पुरजोर विरोध करती हैं. इंटरनेट और सोशल मीडिया में इससे जुड़ी मैसेज वायरल रहते हैं.

वायल मैसेज में कहा जाता है चीनी सामान का बहिष्‍कार करो, चीनी झालर का बहिष्‍कार करो, मिट्टी के दिया जलाओ, स्‍वदेशी अपनाओ, विदेशी भगाओ… आदि. पिछले साल डोकलाम विवाद के असर की वजह से दिवाली और धनतेरस में चीनी सामान की मांग भी कम हो गई थी.

वॉट्सएप पर प्रसारित हुई पिछले साल की एक तस्वीर

झारखंड एक पहला राज्‍य नहीं है जिसके मुख्‍यमंत्री चीन का दौरा किया. इसके पहले महाराष्‍ट्र के सीएम देवेंद्र फर्णांडीस और हरियाणा के मुख्‍यमंत्री एमएल खट्टर भी चीन का दौरा कर चुके हैं. 24 जनवरी 2016 को डीएनए की अखबर के अनुसार चीन का सबसे अमीर आदमी हरियाणा में 60 हजार करोड़ निवेश करेगा.

22 जनवरी 2016 की ट्रिब्यून की ख़बर है कि हरियाणा सरकार ने चीनी कंपनियों के साथ 8 सहमति पत्र पर दस्तख़त किये हैं. ये कंपनियां 10 बिलियन का इंडस्ट्रियल पार्क बनाएंगी, स्मार्ट सिटी बनाएंगी.

5 जनवरी 2016 के इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर कहती है कि महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने चीन की दो मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी को 75 एकड़ ज़मीन देने का फैसला किया है. ये कंपनियां 450 करोड़ का निवेश लेकर आएंगी.

एक समय इन्हीं कारोबारी रिश्तों को सरकार और अर्थव्यवस्था की कामयाबी के रूप में पेश किया जाता है और जब विवाद होता है तब इन तथ्यों की जगह लड़ियों-फुलझड़ियों का विरोध शुरू हो जाता है.

क्या चीनी सामान का विरोध करने वाले भारत में चीन के निवेश का विरोध करके दिखा देंगे?

संदेश यह है कि ठीक है सीमा पर विवाद है. उसे समझना भी चाहिए लेकिन उससे भावुक होकर घर के गमले तोड़ने से कोई लाभ नहीं है. विवाद सुलझते रहते हैं, धंधा होता रहता है.

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