टूलकिट मामले में निकिता जैकब और शांतनु पर लगे गंभीर आरोप, गैर जमानती वारंट जारी

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New Delhi : ग्रेटा थनबर्ग टूलकिट मामले में 21 साल की दिशा रवि की गिरफ्तारी के बाद अब दिल्ली पुलिस निकिता जैकब और शांतनु नाम के शख्स की तलाश में जुट गई है. इन दोनों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने गैर जमानती वारंट जारी करवा लिए हैं. पुलिस सूत्रों का कहना है कि निकिता जैकब मुंबई की रहने वाली हैं और पेशे से वकील है. निकिता पर भी टूल किट मैं एडिट करने का आरोप है. इतना ही नहीं निकिता को भी टूल किट तैयार करने वालों में से एक बताया गया है, जिसका संपर्क खालिस्तानी समर्थक संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन से है. वहीं शांतनु महाराष्ट्र के बीड जिले का रहने वाला है. वह इंजीनियरिंग ग्रेजुएट है. उसके ईमेल के आधार पर ही गूगल डॉक्युमनेट में टूल किट तैयार करवाई गई थी.

टूलकिट के स्क्रीनशॉट में निकिता जैकब का नाम- दिल्ली पुलिस

दिल्ली पुलिस साइबर सेल के जॉइंट सीपी प्रेमनाथ का कहना है कि निकिता का नाम उस समय सामने आया जब टूल किट मामले की जांच शुरू की गई और गूगल में अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से टूलकिट के संबंध में जानकारी मांगी गई. पुलिस को टूलकिट के कई स्क्रीनशॉट मिले थे. जिसमें निकिता जैकब का नाम सामने आया. पुलिस ने 9 फरवरी को निकिता जैकब के घर के सर्च वारंट जारी करवाये और मुंबई के लिए रवाना हो गयी.

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11 फरवरी को पुलिस टीम ने निकिता जैकब से पूछताछ की और उसके 2 लैपटॉप और 1 मोबाइल फोन की भी जांच की गई. उससे लिखित में एक अंडरटेकिंग भी ली गयी कि आगे जब भी जांच के चलते पूछताछ की जरूरत होगी तो वह सहयोग करेगी. लेकिन उसके बाद निकिता ने पुलिस से कोई सहयोग नहीं किया और न ही वह पुलिस के सम्पर्क में आई. इस दौरन गूगल से भी कुछ जरूरी जवाब पुलिस को मिले और फिर 13 फरवरी को बंगलुरू से दिशा रवि को गिरफ्तार कर लिया गया. वह निकिता और शांतनु के संपर्क में थी और इस टूलकिट की ऑथर भी थी. पुलिस का कहना है कि निकिता पेशे से वकील है.

टूलकिट को तैयार करवाने के पीछे खालिस्तान समर्थक संगठन का हाथ- पुलिस

वहीं, दिल्ली पुलिस ने बताया है कि टूलकिट को तैयार करवाने के पीछे खालिस्तान समर्थक संगठन पॉलिटिक्स जस्टिस फाउंडेशन का हाथ है, जो इस टूल किट के माध्यम से न केवल भारत के अंदर सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सौहार्द को खराब करना चाहता था. बल्कि विदेशों में स्थित भारतीय दूतावास पर प्रदर्शन करवा कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को भी धूमिल करने की फिराक में था.

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दिल्ली पुलिस ने इस पूरे मामले में एक नए किरदार के नाम का भी खुलासा किया, जिसका नाम पीटर पैट्रिक है. टूलकिट नामक इस डॉक्यूमेंट का नाम ग्लोबल फार्मर्स स्ट्राइक और ग्लोबल डे ऑफ एक्शन 26 जनवरी रखा गया था. दिल्ली पुलिस का दावा है कि वह साल 2006 से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है. इस टूल किट को तैयार करवाने का मास्टरमाइंड है. वह बताता था कि सोशल मीडिया पर किसे है टैग करना है, क्या हैशटैग करना है और किस पोस्ट को ट्रेंड करवाना है.

खालिस्तानी आतंकी भजन सिंह भिंडर का साथी है पीटर पैट्रिक

पीटर पैट्रिक खालिस्तानी आतंकी भजन सिंह भिंडर का साथी है. भजन सिंह आईएसआई के लिए भी काम कर चुका है. जॉइंट कमिश्नर पुलिस प्रेमनाथ ने बताया कि इस टूल किट को तैयार करवाने के लिए पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन के सह संस्थापक मो धालीवाल ने 11 जनवरी को ज़ूम ऐप के माध्यम से निकिता, दिशा रवि, शांतनु और कुछ अन्य लोगों के साथ एक मीटिंग की थी. इस मीटिंग में यह तय किया गया था कि 26 जनवरी से पहले डिजिटल स्ट्राइक करके किसान आंदोलन की आड़ में देश के अंदर स्थिरता का माहौल पैदा करना है. लोगों को बताना है कि वे या तो सोशल मीडिया के माध्यम से या फिर फिजिकल तौर पर 26 जनवरी को होने वाली ट्रैक्टर रैली में भाग ले. इसी का नतीजा था कि 26 जनवरी को दिल्ली के अंदर रैली के दौरान हिंसा हुई.

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दिशा रवि की गिरफ्तारी के बाद से ही तमाम नेता व एक्टिविस्ट दिशा की गिरफ्तारी पर सवाल उठा रहे हैं. इन सवालों पर दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर प्रेमनाथ ने जवाब देते हुए कहा कि यह टूल किट एक प्रतिबंधित संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन द्वारा तैयार करवाया गया है. यह संगठन खालिस्तानी समर्थक है. अभी तक कि जांच में में यह सामने आया है कि इसे दो भाग में बांटा गया था.

टूलकिट में जैसा बताया गया है, वैसे ही किया गया- पुलिस

प्रायर एक्शन, जिसमें 26 जनवरी और उससे पहले हैशटैग की डिजिटल स्ट्राइक करनी है. 23 जनवरी से ट्वीट की बाढ़ लानी है. 26 जनवरी को फिजिकल एक्शन करना है. 26 को किसान रैली के लिए दिल्ली में दाखिल होना है और फिर बॉर्डर पर आना है. दूसरे भाग में भारत की सांस्कृतिक धरोहर योग और चाय के विषय पर विघटन करना आदि शामिल था. जब टूल किट को एक्सेस किया गया तो यह देख कर हैरानी हुई कि जो कुछ होता आ रहा है, वह टूलकिट में जैसा बताया गया है, वैसे ही किया गया है. जिसके बाद 4 फरवरी को स्पेशल सेल ने आईपीसी की धारा 124ए, 153, 153ए और 120बी के तहत एफआईआर 41/21 दर्ज की और जांच साइबर सेल को सौंपी गई.

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