गर्मियों के मौसम में खुद की स्वच्छता कितनी जरूरी है

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कर्क रेखा भारत को लगभग दो बराबर भागों में बांटती है. यह भारत के अधिकांश हिस्से को एक उष्णकटिबंधीय देश बनाता है. तापमान में भिन्नता अधिक होती है और गर्मी के महीनों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच सकता है. इस तरह के उच्च तापमान के साथ शुष्क और बहुत आर्द्र मौसम भी होते हैं. यदि मार्च, अप्रैल और मई के महीने गर्म और शुष्क होते हैं, तो जुलाई और अगस्त में गर्मी और आर्द्रता रहती है. उच्च तापमान और आर्द्रता में व्यापक भिन्नता का यह लंबा समय हमारी खुद की स्वच्छता के लिये मुश्किलों भरा होता है. उच्च तापमान और आर्द्रता और लगातार पसीना आना न केवल व्यक्ति को असहज करता है, बल्कि त्वचा पर लाल चकत्ते या फॉलिकुलिटिस या सन-बर्न जैसे कुछ गंभीर संक्रमण भी पनप सकते हैं.

उच्च आर्द्रता और उच्च तापमान भी बैक्टीरिया और फंगस के  बढ़ने का आधार हैं.  ये या तो स्वयं संक्रमण पैदा कर सकते हैं या मौजूदा संक्रमण को बढ़ा सकते हैं. व्यक्तिगत स्वच्छता में वह सब कुछ शामिल है जो हम स्वयं को साफ-सुथरा रखने के लिये करते हैं. इसमें टॉयलेट की साफ-सफाई और बीमारी की स्वच्छता सहित हमारा हाथ धोना, ब्रश करना, नहाना और साफ-सफाई के मूल नियमों का पालन करना शामिल है.

गर्मियों के दौरान हमें न केवल साफ-सफाई का काफी ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है, बल्कि उच्च तापमान और उच्च आर्द्रता के संपर्क में रहने के दौरान हम जो विकल्प चुनते हैं, उनके बारे में भी सावधान रहना होता है. गर्मी के महीनों के दौरान हमें अपने प्रयोग के क्लींजर और मॉइश्चराइजर, पहनने वाले कपड़ों और उन्हें बदलने की समय-सीमा आदि का चुनाव बड़ी सावधानी के साथ करना चाहिए, क्योंकि ये सभी अच्छी निजी स्वच्छता के महत्वपूर्ण घटक हैं.   

एक रानी की तरह नहायें

अपने आप को साफ रखने और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने का सबसे आसान और सरल तरीका है, रोजना दो बार नहाना. यह गंदगी पैदा करने वाले और अन्य प्रदूषकों को दूर करने में मदद करता है, हमें बेहतर और ताजा महसूस कराता है और हमारी त्वचा को फिर से तरोताजा और हाइड्रेट करता है. इसके अलावा, नहाने भर से हमें तनाव और थकान को कम करने में मदद मिलती है. दो बार रोजाना नहाने के अन्य फायदों में रक्त प्रवाह में सुधार और मृत त्वचा कोशिकाओं का हटना शामिल है. आपको क्लींजर का चुनाव अपनी त्वचा की प्रकृति, अन्तर्निहित परिस्थितयों आपको कौन-सी चीज से बेहतर महसूस होता है, इस पर आधारित होना चाहिए. कुछ महिलाएं लाइम या लेमन की ताजगी पसंद करती हैं जबकि कुछ अन्य कोलोन, खस, चंदन या मेन्थॉल पसंद करती हैं.

अपनी पसंद के क्लींजर से सबसे बढ़िया परिणाम पाने के लिये व्यक्ति को केवल बाहरी सुगंध के अलावा अन्य बातों पर भी गौर करना चाहिए. आपके क्लींजर का पीएच मान यह फर्क करने के लिये अच्छा है. हालांकि, अल्कलाइन या न्यूट्रल क्लींजर को बेहतर माना जाता है, फिर भी कुछ प्रकार की स्किन के लिए थोड़ा एसिडिक क्लींजर बेहतर काम करता है. एक सामान्य नियम के अनुसार संतुलित को चुनना चाहिए. आम तौर पर ऐसे क्लींजर से बचना चाहिए जिनमें बेवजह काफी सारी सामग्रियाँ या बहुत तेज सुगंध हो. आम तौर पर उससे बचा जाना चाहिए. तेज सुगंध के अपने नुकसान हैं.

गर्मियों में बार-बार हाथ धोना और नाखूनों की देखभाल

महामारी ने हमें बार-बार हाथ धोने का महत्व सिखाया है. हममें से अधिकांश लोगों ने सिक्स-स्टेप हैंड वॉश सीख लिया है और अब हम बार-बार सैनिटाइजर का उपयोग करने के भी आदी हो गये हैं. हम जिस चीज में चूक जाते हैं वह है नाखूनों की देखभाल. हमारे नाखून गंदगी, बैक्टीरिया और फंगस का सबसे बड़ा भंडार हैं. गर्मी के महीनों में हमारी त्वचा की तरह नाखूनों की देखभाल भी बहुत ज़रूरी होती है. चूँकि, अधिकांश भारतीय हाथों से ही भोजन करते हैं, इसलिये नाखूनों की देखभाल के महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. गर्मी वह समय है जब नाखूनों की लंबाई या हमारे द्वारा लगाये जाने वाले नेल पेंट से ज्यादा साफ नाखूनों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. यदि एक नेल क्लिपर महत्वपूर्ण है, तो नेल-फाइल भी. गर्मियों में इन दोनों ही नन्हे यंत्रों को काफी महत्व दिया जाता है. लेकिन उन्हें भी साफ रखने के लिये ज्यादा सावधानी रखें.

साफ-सुथरे नाखून आपके व्यक्तित्व की भी पहचान होते हैं, आप आमतौर पर कितनी स्वच्छता रखते हैं उसके बारे में बताते हैं और ऐसा आभास देतें हैं कि आप बिलकुल सही चल रहे हैं.

अपनी त्वचा की देखभाल करें, डीअडरेंट और सन-स्क्रीन का उपयोग करें

गर्मी के मौसम में हमारे शरीर से लगातार निकलने वाले पसीने के साथ उच्च तापमान और आर्द्रता, बैक्टीरिया और फंगस के प्रजनन के लिये आदर्श माने जाते हैं. गर्मी के महीनों के दौरान हमें जो बदबू महससू महसूस होती है, वह सतही प्रोटीन के टूटने से निकलने वाली दुर्गंध से ज्यादा कुछ नहीं है. तकनीकी रूप से इसे केरेटिन कहा जाता है. यह सतही प्रोटीन उनके पोषण की तरह काम करता है.

कई मेटाबोलाइट्स भी पसीने के जरिए बाहर निकल जाते हैं. चूंकि हमें गर्मियों में अधिक पसीना आता है, इसलिये इन मेटाबोलाइट्स की उपस्थिति भी दुर्गंध को बढ़ा सकती है.

तो, इसे रोकने के क्या उपाय हैं? इससे पहले कि हम इसका उत्तर दें, आइए समझते हैं कि पसीना अपने आप में हमारे शरीर के तापमान को बनाए रखने के लिये एक रक्षा तंत्र की तरह काम करता है. इसलिये गर्मियों के दौरान अधिक पसीना आना बढ़ते तापमान के लिये एक उपयोगी शारीरिक प्रतिक्रिया है. लेकिन इसका नकारात्मक प्रभाव यह है कि अतिरिक्त नमी और आदर्श तापमान, बैक्टीरिया के पनपने के लिये अनुकूल हैं. गर्मियों के दौरान एंटी-बैक्टीरियल तत्वों वाले डीअडरेंट का उपयोग व्यक्तिगत स्वच्छता का एक जरूरी हिस्सा है. इस तरह के डीअडरेंट्स शरीर के रक्षा तंत्र में बाधा नहीं डालते, बल्कि बैक्टीरिया को बढ़ने और त्वचा पर हानिकारक प्रभाव पैदा करने से रोकते हैं.

इसी तरह, गर्मियों के दौरान सनस्क्रीन का प्रयोग न केवल सौन्दर्य-प्रसाधन (कास्मेटिक) गुणों के ख्याल से बल्कि  अपनी चिकित्सीय उपयोगिता केक लिए भी बहुत उपयोगी साधन हैं. लगातार और लंबे समय तक सूरज की रोशनी के संपर्क में रहने से त्वचा पर सनबर्न से लेकर असमान स्किन टोन जैसे नुकसान हो सकते हैं. सनबर्न से त्वचा का कैंसर हो सकता है और त्वचा के कैंसर की आशंका को रोकना जरूरी है.

गर्मियों के दौरान मासिक धर्म संबंधी स्वास्थ्य

गर्मी का मौसम महिलाओं के लिये काफी परेशानी का मौसम होता है. इस अवधि में गर्मी और नमी यूटीआई सहित पहले से मौजूद रैशेज और सतह के अन्य संक्रमणों को बढ़ा देती है. जहां तक कपड़े की क्वालिटी और पोशाक की डिजाईन के महत्व की बात है, तो मासिक धर्म के दौरान सूती सैनिटरी नैपकिन या टैम्पोन का उपयोग संक्रमण और रैशेज की संभावना को कम करने में मदद करता है. आरामदायक सूती अंडरवियर का उपयोग और सैनिटरी नैपकिन को बार-बार बदलना बहुत जरूरी है.

बेहतरीन दिखें, हल्के फुल्के फैब्रिक से बने साफ कपड़ों का उपयोग करें

भीषण गर्मी के दौरान अपनी स्वच्छता बनाये रखने के लिये सही कपड़े का चुनाव बहुत अहम है. कपड़े ऐसे होने चाहिए जिससे हवा का आवागमन आसानी से हो सके इससे हमें मौसम से होने वाली चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलती है. गर्मी के महीनों के लिये कॉटन को सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है. यह एक प्राकृतिक फाइबर है जो आरामदायक होता है. फाइबर से हमारी त्वचा को परेशानी नहीं होती और न हीं इससे एलर्जी होने का खतरा होता है. कॉटन में पानी सोखने का गुण होता है और इस तरह यह पसीने का आदर्श अवशोषक है. इसका उच्च वाष्पीकरण-गुण गर्मी के महीनों में इसे एक बेहतरीन कपड़ा बनाता है. कॉटन के रेशों को इस तरह से तैयार किया जाता है कि वे गर्मी के अच्छे संवाहक के रूप में काम करते हैं जिससे कॉटन सभी मौसमों के लिये पसंदीदा विकल्प बन जाता है.

कॉटन का दूसरा सबसे बड़ा फायदा है, इसका विविध उपयोग. इसे फॉर्मल वियर, कैजुअल वियर, पार्टी वियर या इवनिंग वियर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. कॉटन नाइट-वियर या कॉटन अंडरगारमेंट्स पुरुषों, महिलाओं, युवा और बुजुर्ग, सभी लोगों की पहली पसंद हैं.

फैब्रिक की पसंद के साथ-साथ ड्रेस का कट और फिट भी काफी मायने रखता है. टाइट-फिटिंग ड्रेस की तुलना में फ्री फ्लोइंग कॉटन के कपड़े बेहतर दिखते हैं. इस भीषण गर्मी में कॉटन जैसे प्राकृतिक फाइबर से बने हल्के फुल्के परिधानों में बेहतरीन दिखना अब आसान हो गया है.

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