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सरयू राय ने सीएम से पूछा- खनन घोटाला के सबूतों को अधिकारियों ने क्‍यों दबाया?

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Ranchi: झारखंड में खाद्य आपूर्ति सार्वजनिक वितरण विभाग के मंत्री सरयू राय ने मुख्यमंत्री रघुवर दास से खनन घोटाला से जुड़े कई सवाल पूछे हैं. मंत्री ने सीएम को पत्र लिखकर घोटाला से जुड़े सवाल पूछे हैं और जवाब मांगा है.

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मंत्री ने पत्र में कहा है कि अवैध खनन के मामले में सबूतों पर नीचे से ऊपर तक के अधिकारी परदा डाल रहे हैं. उन्‍होंने कहा है कि “जब मेड़ ही खेत खाए, तो फसलों की रक्षा कैसे होगी. और रखवाला ही चोर हो जाए, तो खजाना कैसे सुरक्षित रहेगा”?

मंत्री ने लौह अयस्क से जुड़े कथित तौर पर अवैध खनन के मामलों को तथ्यों के साथ मुख्यमंत्री के ध्यान में लाया है. गौरतलब है कि झारखंड में खान विभाग मुख्यमंत्री के पास है.

मंत्री ने पत्र के जरिए बताया है कि देश भर में हुई गड़बड़ियों के मद्देननजर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर 2012 में ”जस्टिस एम बी शाह आयोग” का गठन हुआ था.

आयोग ने  झारखंड के लौह अयस्क खनन क्षेत्रों में  बरती गई गंभीर अनियमितताओं का पर्दाफ़ाश किया और अवैध खनन करने वालों पर करीब 13 हजार करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया. जुर्माना वसूली के कई मामले विभिन्न न्यायालयों/अभिकरणों में चले.

इस संदर्भ में झारखंड सरकार के खान विभाग के कतिपय पूर्व एवं वर्तमान वरीय एवं कनीय अधिकारियों की भूमिका पर मंत्री ने सवाल खड़ेकरते हुए कहा कि तथ्यों और प्रमाण के आदार पर समीक्षा जरूरी है.

मंत्री ने यह भी बताया है कि प्रासंगिक नियमों का उल्लंघन कर बड़े पैमाने पर हुये छद्म खनन (प्रॉक्सी माइनिंग) के बारे में खान विभाग, झारखंड सरकार के अधिकारी अब दोहरी भूमिका निभा रहे हैं और नियम-कानून की धज्जियाँ उड़ाकर राज्य हित को नुकसान पहुंचा रहे हैं.

मंत्री ने शाह आयोग की अनुशंसा के आलोक में गठित तीन समितियों की जांच प्रतिवेदन पर भी  मुख्यमंत्री का ध्यान दिलाया है , जिसमें अन्य गड़बड़ियों के साथ ही खनिज समुदान नियमावली का उल्लंघन बताते हुए खनन पट्टा रद्द करने की अनुशंसा की गयी है.

मंत्री ने सवाल खड़े किये हैं कि गड़बड़ी करने सभी अधिकारी आज भी खान विभाग में अथवा राज्य सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर हैं.

अधिकारियों ने छुपाये तथ्‍य

मंत्री सरयू राय ने कहा है कि इन मामलों में राजस्व पर्षद में होने वाली सुनवाई के दौरान अफसरों ने मौन साधे रखा तथा प्रासंगिक तथ्यों को पेश करने के बजाय चतुराई से छुपा लिये. कागजातों को भी सुनवाई के दौरान सामने नहीं लाया गया. जबकि ये सभी काग़ज़ात खान विभाग की प्रासंगिक संचिकाओं में मौजूद हैं.

इनके खिलाफ पर्याप्‍त सबूत

मंत्री ने कथित तौर पर प्रॉक्सी माइनिंग करने वालों में पट्टाधारी निर्मल कुमार प्रदीप कुमार(एनकेपीके) देवाका भाई भेल जी, पद्म कुमार जैन, रामेश्वर जूट मिल्स के अलावा सिंहभूम मिनिरल्स के बारे में भी विस्तार से चर्चा की है तथा बताया है कि नियमों का उल्लंघन करने को लेकर इनके खिलाफ फाइलों में पर्याप्त प्रमाण हैं, पर न्यायालय से लेकर सचिवालय तक अधिकारी उन तथ्यों को छुपाने में जुटे हैं.

महाधिवक्ता की मंशा

मंत्री ने पत्र में लिखा है कि अगर खान विभाग और सरकार के बड़े अधिकारी ही अवैध खनन के संपुष्ट सबूतों को इस तरह दबायेंगे, अवैध खनन करने वालों को संरक्षण देंगे साथ ही राज्य सरकार के विद्वान वकील महाधिवक्ता  न्यायालय के समक्ष पूर्व प्रमाणित सबूतों को प्रस्तुत नहीं करेंगे, तो राज्य हित एवं नियम/क़ानून की क़ीमत पर दोषियों का समूह अपने प्रत्यक्ष-अपरोक्ष अपने लाभ के लिये नियम क़ानून तोड़ता रहेगा और राज्य हित और जन हित का नुकसान करता रहेगा.

 

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