भगवान बिरसा मुंडा जयंती के दिन सरना धर्म कोड के लिए जंतर-मंतर दिल्‍ली में होगा उलगुलान

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Ranchi: राष्ट्रीय आदिवासी समाज सरना धर्म रक्षा अभियान के तत्वाधान में, इसके सभी अनुषंगी सामाजिक संगठनों का विशेष बैठक रांची में हुई. इस बैठक में सरना धर्म के आंदोलन को केंद्र सरकार तक पहुंचाने के लिए कार्य योजना एवं रणनीति की घोषणा की गई.

बैठक की अध्यक्षता सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने की. धर्मगुरु ने अपने संबोधन में कहा कि समय आ गया है कि हम सरना धर्म कोड की मांग लेकर दिल्ली में दस्तक दे और भारत सरकार को अवगत कराए कि देश के आदिवासियों की जनभावना सरना धर्म कोड के पक्ष में है. उसके लिए जरुरी है कि हम जिस तरह से विभिन्न धर्मों को जनगणना परिपत्र में अधिसूचित है, उसी तरह सरना धर्म अधिसूचित हो.

डॉ करमा उरॉव ने विस्तार से बैठक की विषयवस्तु एवं कार्य योजना को बैठक के समक्ष रखा और दिल्ली में प्रतिनिधि सभा और जंतर मंतर में धरना तथा विभिन्न राज्यों में धर्म कोड के आंदोलन को तेज करने तथा अन्य समसमायिक मुद्दों पर प्रकाश डाला.

बैठक को विभिन्न संगठनों के रूप में सर्वश्री सोमा मुण्डा, सुशील उरांव, दुर्गावती ओरया, नारायण उरांव , बलकू उरांव, प्रेमनाथ मुण्डा, मथुरा कांडिल, रवि तिग्गा,शिवा कच्छप, सूरज खलखो समेत कई आदिवासी नेताओं ने अपने विचार रखे.

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सामाजिक संगठनों में राजी पाड़हा प्राथना सभा, आदिवासी छात्र संघ, केंद्रीय सरना समिति, संयुक्त पाड़हा खूंटी, सरना धर्म सोतो समिति खूंटी, सरना संगोम समिति खूंटी,  झारखण्ड आदिवासी सरना समिति ओरमांझी, वीर बुधू भगत हुही मोर्चा रांची, 21 पाड़हा नगरी सहित दर्जनों सामाजिक संगठनों के सैकड़ों प्रतिनिधि उपस्थित थे.

बैठक में लिए गए निर्णय:-

1:- भारत सरकार के समक्ष अगामी जनगणना परिपत्र में सरना धर्मकोड की सुमार हेतु भारत सरकार के प्रधानमंत्री, ग्रह मंत्री, आदिवासी मामले के मंत्री, रजिस्‍ट्रार जेनरल सेन्सस, भारत सरकार  और भारत के राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुति हेतु स्मारपत्र भेजी जाएगी और उनसे प्रतिनिधिमंडल के रूप में भेंटवार्ता हेतु पहल की जाएगी.

2:- देश के परिपेक्ष में सरनाधर्म कोड की मांग को तेज करने हेतु दिल्ली में 14 एवं 15 नवम्बर 2021 को क्रमशः अंतर राज्यीय प्रतिनिधि सभा एवं जंतर-मंतर में  सत्याग्रह सह धरना का आयोजन होगा, जिसमे विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.

3:- विभिन्न राज्यों में धर्मकोड की मांग को लेकर विशेष प्रतिनिधि सभा का आयोजन होगा जिसमें अभियान के  तरप से 11 सदस्यीय प्रतिनिधि उक्त सभा में भाग लेंगे. यह कार्य सितम्बर एवं अक्टूबर के द्वितीय सप्ताह तक सम्पन्न होगा. इसके लिए  11 सदस्यीय प्रतिनिधि को 6 समूह में बांटा गया है,

  • पहला – बंगाल, राजस्थान
  • दूसरा – असम, अरुणाचल प्रदेश
  • तीसरा – मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र
  • चौथा – बिहार, झारखण्ड
  • पांचवा – उड़ीसा, छतीसगढ़, गुजरात
  • छठा – नेपाल, भूटान, उत्तर प्रदेश
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4:- वीर बुधू भगत के जन्मस्थली सिलगाई में बन रहे एकलब्य विद्यालय का नामांतरण, शहीद वीर बुधू भगत के नाम पर हो और विद्यालय सिलागाई में ही उनके धार्मिक एवं सांस्कृतिक परिपेक्ष के बाहर निर्माण हो  विद्यालय की स्थापना भारत सरकार कर रही है उसका स्वागत की जाती है. अध्ययन दल की रिपोर्ट प्रस्तुति की गई, इसके साथ यह भी निर्णय हुआ की उक्त विषय पर विभिन्न मतों के सामाजिक संगठनों का संयुक्त बैठक आहूत की जाएगी ताकि एक मत हो सके.

5:- राज्य में रोजगार, व्यवसाय विभिन्न स्तरीय राजकीय सेवा संवर्गी की नियुक्ति प्रकिया अविलम्ब पूरा की जाय तथा इसके पूर्व -स्थानीय एवं नियोजन नीति की समुचित परिभाषा, जिसमे स्थानीयता की परिभाषा में 1932 तथा अंतिम जमीन सर्वे  रिकॉर्ड के मद्देनजर भाषा एवं संस्कृति को परिदृश्य में शर्ते निर्धारित हो उक्त प्रसंग में मुख्यमंत्री की घोषणा स्वागत योग्य है. पर अविलम्ब कार्य रूप दी जाय ताकि लाखों बेरोजगार युवा पीढ़ी को रोजगार एवं नियोजन मिल सके.

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6:- देश में जातीय जनगणना लागू हो ताकि राजकीय संसाधनों का वजटीय प्रावधान कल्याणकारी राज्य की कल्पना के अनुरूप वंचित समाज एवं समुदायों का जनसंख्या अनुपात में उनका हक मिल सके. लोकसभा, विभिन्न राज्यों के विधान सभाओं और राजकीय सेवाओं यथा केंद्रीय सेवा एवं राज्यों के सेवाओं में सही प्रतिनिधित्व मिले. इसमे जातीय जनगणना अपेक्षित है. झारखण्ड के मुख्यमंत्री की घोषणा के वे उक्त मुद्दे पर सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री से मिलेंगे.

अंतः यह भी मांग की जाती है कि उक्त प्रतिनिधि मंडल विधानसभा से पारित सरना धर्म कोड की प्रस्ताव को प्रधानमंत्री के समक्ष रखने का सफल करे.

7:- राज्य के आदिवासिययों सामाजिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का निधार्रण, रेखांकन, सुरक्षण एवं सुंदरीकरण राज्य सरकार अविलंब शुरू करे और बजटीय प्रवधान करे.

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