सरहुल पर बस्‍ती वालों ने जो किया उसे सालों तक नहीं भूल सकेंगे

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Ranchi: यूं तो सरहुल का त्‍योहार जश्‍न का होता है. लेकिन राजधानी रांची के नामकुम के जोरार बस्‍ती में अबकी बार जो हुआ उसे वो कभी भूल नहीं सकेंगे. सरहुल के मौके पर जो हुआ वो पहले कभी न देखा गया न सुना गया. एक एक मिसाल बनकर सालों तक लोग याद रखेंगे.

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आदिवासियों के त्‍योहार सरहुल के मौके पर सभी थिरकते हैं, नाचते हैं, गाते हैं, उमंग व उल्लास में रहते हैं. पर आज इस बस्ती में इस साल ऐसा कुछ नहीं हुआ. तो आखिर क्‍या हुआ यहां? यहां दिखा– सिर्फ और सिर्फ कोरोना से अपने गांव को बचाने की जागरुकता. जो शहरी क्षेत्रों में रहनेवाले मुहल्लों के लोगों के बीच नहीं दिखती.

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जरा देखिये, बस्‍तीवालों ने क्या किया हैं? अपने गांव के ठीक बाहर एक बैरियर बना डाला है, जिसमें साफ लिखा हैं- बाहरी लोगों का प्रवेश बंद, जोरार बस्ती. ये युवा किसी से जोर-जबर्दस्ती नहीं करते. ये हाथ जोड़कर खड़े हो जाते हैं.

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जोरार बस्‍ती को कोरोनामुक्‍त रखने की जिद

वे कहते हैं कि जोरार बस्ती कोरोनामुक्त हैं और हम यहां के लोगों को न तो कहीं आने दे रहे हैं और न जाने दे रहे हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि जो जहां हैं, वहीं रहे, ऐसे में केन्द्र और राज्य सरकार के आदेशों का पालन करना और कोरोना से लड़ने की जिम्मेवारी हम सब की है.

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यही नहीं, इन बस्‍ती वालों ने कोरोना से लड़ने के लिए अपनी बस्ती में मास्क और सेनिटाइजर की भी व्यवस्था की हैं. ये किसी अतिआवश्यक कामों से गांव से बाहर जानेवाले लोगों एवं अंदर जानेवाले लोगों को सेनिटाइज करना नहीं भूलते.

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सरहुल पर कोरोना से लड़ने का संकल्‍प

बस्‍ती के लोगों ने सरहुल पर्व पर संकल्प लिया है कि वे अपनी बस्ती में यह जागरुकता घर-घर फैलायेंगे कि सभी को कोरोना से लड़ना हैं तो मास्क पहनना होगा, घर से नहीं निकलना होगा, खुद को सेनिटाइज्ड करना होगा और दूसरे बस्तियों को भी इसके लिए जागरुक करना होगा.

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जोरार बस्ती के इन युवाओं की सोच का प्रभाव अन्य बस्तियों पर भी पड़ रहा हैं, सरहुल पर्व को इस प्रकार नये तरीके से मनाने का यह उत्साह जोरार बस्ती के युवाओं ने जो दिखाया है, वह काबिले तारीफ हैं.

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