Saraswati Puja Vidhi बता रहे हैं पंडित रामदेव पांडेय, जानें कब है सरस्‍वती पूजा 2021

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Saraswati Puja Vidhi: बसंत पंचमी (Basant Panchami 2021) के दिन विद्या की देवी माता का सरस्वती (Maa Saraswati) की पूजा की जाती है. माता सरस्‍वती की पूजा छात्रों के बीच खूब धूमधाम से की जाती है. स्‍कूल कॉलेजों, हॉस्‍टल और सभी घरों में माता सरस्‍वती की पूजा अर्चना बहुत ही भक्ति भाव से की जाती है. इस दौरान लोगों को पूजा कराने के लिए पुजारी और पंडित बहुत व्‍यस्‍त हो जाते हैं. अक्‍सर देखा जाता है कि छात्र माता Saraswati Puja Vidhi के लिए उपवास करके घंटों पुजारी या पंडित का इंतजार करते हैं.

पिछले कुछ सालों से अब आमतौर पर देखा जाता है कि जब पूजारी का इंतजार करते थक जाते हैं तो भक्‍त छात्र खुद से स्‍मार्टफोन में वीडियो के मंत्रोचारण और विधि विधान से माता सरस्‍वती की पूजा करते हैं. हमने इस संबंध में रांची के जाने माने पुजारी और ज्‍यातिष विद्या के ज्ञाता पंडित रामदेव पांडेय से बातचीत की. उन्‍होंने बताया कि Saraswati Puja 2021 में कब और कैसे पूजा करें. क्‍या पुजारी के बगैर कैसे पूजा करें. पूजा के मंत्र, विधि और किस तरह के पूजा सामग्री और प्रसाद की सामग्री की जरूरत पड़ती है. पूरा वीडियो देखकर आप ये जान सकते हैं.

Saraswati Puja 2021 Date: सरस्वती पूजा 16 फ़रवरी मंगलवार को है. पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्योहार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है. बसंत पंचमी का त्योहार उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल समेत पूरे उत्तर भारत में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है.

सरस्वती पूजा 2021 का शुभ मुहूर्त

  • सरस्वती पूजा की तारीख- 16 फरवरी 2021 दिन मंगलवार
  • पंचमी तिथि प्रारंभ- 16 फरवरी सुबह 3.36 बजे से
  • पंचमी तिथि समाप्त- 17 फरवरी सुबह 5.46 बजे तक
  • सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त- 16 फरवरी को सुबह 6.59 बजे से लेकर दोपहर 12.35 तक
  • सरस्वती पूजा का कुल समय- 5 घंटे 37 मिनट

सरस्वती पूजा की विधि (Saraswati Puja Vidhi)

सरस्वती पूजा के मौके पर लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं. हिंदू पंचांग के मुताबिक, पंचमी तिथि सूर्योदय और दोपहर के बीच रहती है. बसंत पंचमी पर मां सरस्वती पूजा करते समय सरस्वती चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए. मान्यता है कि इस दिन गृह प्रवेश, वाहन खरीदना,नींव पूजन, नया व्यापार प्रारंभ जैसे मांगलिक कामों की शुरुआत करने पर शुभ फल मिलता है.

नए काम की शुरुआत

सरस्वती (Saraswati puja) यानी कि बसंत पंचमी (Basant Panchami) के दिन से ही नए कामों की शुरुआत होती है. ज्योतिष के मुताबिक बसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के लिए जाना जाता है. इस दिन शुभ कार्यों की शुरुआत करने से परिणाम सकारात्मक मिलते हैं. बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है. कुछ घरों में इस दिन पीले पकवान और भोजन बनाने की परंपरा भी है.

बसंत पंचमी के दिन क्यों होती है सरस्वती पूजा?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माघ मास (Magh Maas) के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि जिसे बसंत पंचमी के नाम से जाना जाता है के दिन ही ब्रह्माजी (Lord Brahma) के मुख से प्रकट हुईं थीं देवी सरस्वती. यही कारण है कि हर साल बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मानकर उनकी पूजा अर्चना की जाती है. ऐसी मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता (Worship Goddess Saraswati) की पूजा करने से वह प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं.

सरस्वती पूजा का महत्व

सरस्वती पूजा के दिन को बेहद शुभ माना जाता है और इस दिन को कोई नई कला, संगीत सीखने या शिक्षा प्राप्त करने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है. बहुत से लोग इसी दिन से अपने बच्चों की अक्षर ज्ञान की शिक्षा शुरू करते हैं. गृह प्रवेश करने के लिहाज से भी बसंत पंचमी के दिन को शुभ माना जाता है. इसके अलावा बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्नी देवी रति की भी पूजा की जाती है.

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