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विजयादशमी पर संघ ने मोदी सरकार के फैसलों को सराहा

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Nagpur: आज देश भर में विजयदशमी का पर्व मनाया जा रहा है. विजयदशमी के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से पथ संचलन का आयोजन किया जा रहा है. इस अवसर पर स्वयंसेवको को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मोदी सरकार की जमकर तारीफ की.

उन्होंने कहा कि यह मजबूत सरकार है जिसने कई साहसिक फैसले लिए हैं. अनुच्छेद 370 को खत्म करने के सरकार के फैसले का उन्होंने स्वागत किया.

संघ के पथ संचलन में बीजेपी के बड़े नेता शामिल

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की अगुवाई में निकलने वाली इस पथ संचलन में हिस्सा लेने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और वीके सिंह पहुंच गए हैं. साथ ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंच गए हैं. आरएसएस द्वारा आयोजित पथ संचलन में मुख्य अतिथि के तौर पर एचसीएल के संस्थापक शिव नाडर भी पहुंचे.

संघ प्रमुख मोहन भागवत का संबोधन

सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि यह साल कई वजहों से याद रखा जाएगा. इस साल जनता ने एक बार फिर से देश की सरकार पर विश्वास व्यक्त किया है. कई कठोर निर्णयों को जनता की सिद्धी प्राप्त हुई है. मजबूत फैसलों की वजह से 2014 से बड़ा जनादेश 2019 में मिला.

मोहन भागवत ने कहा, ‘साहसी और कठोर फैसले लेने की क्षमता इस सरकार में है. जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को लेकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का कार्य प्रशंसनीय है. इस देश में दो विधान, दो प्रधान और दो संविधान नहीं हो सकता है. मिशन चंद्रयान ने अच्छी सफलता हासिल की.’

देश की सुरक्षा बेहतर

संघ प्रमुख ने कहा, ‘सेना का मनोबल उत्तम है. सुरक्षा तैयारियां अच्छी है इसका उदाहरण मिल चुका है.देश में आतंकवादी घटनाएं कम हुई है.’

देश तोड़ने वालों पर निशाना

मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया और देश में ऐसे भी लोग है जिनको भारत का मान सम्मान नहीं चाहिए. भारत का नाम दुनिया में ऊंचा नहीं चाहिए, इसके लिए ऐसे लोगों के कारनामे भारत में चलते हैं. देशहित की भावना उन लोगों में नहीं होती है. ऐसी शक्तियां समाज में दूरियां बढ़ाती है. विविधताओं को भड़काती हैं. समाज की दूरियां बढ़ाती है. तरह तरह के असंतोषों को लोगों को मनों में भड़काना. ऐसे लोगों का प्रतिकार हमको करना पड़ेगा.

कुछ ताकतें देश में रहकर देश विरोध के काम करती है.

RSS पर महापुरुषों के वचन

‘RSS के सामाजिक कार्यों में मैं राष्ट्रहित देख रहा हूं. व्यक्तिगत चरित्र ध्येय के प्रति प्रतिबद्धता है, इस कार्य में आपको सफलता न मिलने का प्रश्न ही नहीं उठता’ महात्मा गांधी

‘समाज को संगठित करने में संघ का बताया हुआ मार्ग सही है पर मैं राजनीति के क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ चुका हूं. इस समय आपके साथ चलना संभव नहीं है. क्षमा करें.’
सुभाषचंद्र बोस

‘लोग मुझे Royal Beggar कहकर बुलाते हैं. अगर आप चाहे तो, मैं संघ के लिए धन जुटाऊंगा.’
मदन मोहन मालवीय

‘मुझे आश्चर्य होता है यह देखकर कि यहां पर स्वयंसेवक किसी भी प्रकार के भेदभाव के बिना, किसी दूसरे की जाति जाने बगैर परस्पर भाईचारे से रह रहे हैं.’
डॉ. भीमराव आंबेडकर

‘आरएसएस के ऊपर दंगा और दहशतगर्दी का आरोप हैं, ये बिल्‍कुल बेबुनियाद है. परस्पर प्रेम, सौहार्द, संगठन ऐसे विचार, मुसलमानों को संघ से सीखना चाहिए.’
डॉ. जाकिर हुसैन

“मैं संघ का समर्थक हूं. अनुशासन, देशभक्ति और समाज सेवा के लिए यह संगठन जाना जाता है.”
दलाई लामा

‘मेरी पार्टी का संघ के साथ वैचारिक मतभेद हो सकता है लेकिन जब देश संकट में हो तो हम सबको एकजुट होकर काम करना चाहिए ‘
पंडित जवाहर लाल नेहरू

संघ के स्वयंसेवकों की देशभक्ति किसी प्रधानमंत्री से कम नहीं है । अगर जनसंघ फासीवादी है तो मैं भी फासीवादी हूं.
जय प्रकाश नारायण

संघ की स्थापना में कांग्रेस का रोल!

-संघ के संस्थापक डॉक्टर के बी हेडगेवार कांग्रेस के नेता बी एस मूंजे के शिष्य थे
-बी एस मूंजे, बाल गंगाधर तिलक के समर्थक कांग्रेसी नेता थे
-तिलक के निधन के बाद उनके समर्थक कांग्रेस में किनारे किए जाने लगे
-महात्मा गांधी ने मुस्लिमों के ख़िलाफ़त आंदोलन के समर्थन का एलान किया
-तब हिंदुओं को एकजुट करने के लिए डॉक्टर हेडगेवार ने RSS की स्थापना की

RSS मुस्लिमों के लिए क्या कर रहा है?

मुस्लिमों को साथ जोड़ने के लिए संघ ने एक संगठन बनाया
साल 2002 में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का गठन हुआ
संघ मुस्लिमों में आधुनिकता का प्रचार प्रसार चाहता है
मदरसे का आधुनिकीकरण संघ के एजेंडे में ऊपर है
संघ मुस्लिमों में धार्मिक कट्टरता का विरोध करता है
RSS इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ मुस्लिमों को जागरुक करता है
RSS ने ट्रिपल तलाक़ खत्म करने की वकालत की थी

देश पर संकट के समय RSS का योगदान

– 1962 भारत-चीन युद्ध के समय सीमा पर सैनिकों को रसद पहुंचाने में मदद
– 1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय दिल्ली में ट्रैफिक संभालने की जिम्मेदारी
– 1967 में बिहार में अकाल के समय अकाल पीड़ितों की मदद की

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