Take a fresh look at your lifestyle.

रांची में उड़ रहीं नियमों की धज्जियां, 3850 अपार्टमेंट के पास नहीं है ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट

0 43

Ranchi: रांची की हर छोटी व बड़ी इमारत के लिए ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है. जिन भवनों के पास यह सर्टिफिकेट नहीं होगा उनका घर, अपार्टमेंट, मार्केट या मॉल नगर निगम द्वारा सील किया जा सकता है. मंगलवार को नगर निगम ने ऐसे 3 बिल्डिंग के निर्माण पर रोक भी लगाई. लेकिन सवाल यह उठता है कि जब निगम द्वारा नक्शा पास किया जाता है तो किस तारीख तक निर्माण पूरा होना है उसे पता होता है बावजूद इसकी जांच में लापरवाही बरती जाती है.

अभी शहर के लगभग 4000 अपार्टमेंट में से सिर्फ 150 अपार्टमेंट ने ही ऑक्‍यूपेंसी सर्टिफिकेट लिया है इसके अलावा मात्र 7 लोगों ने इसके लिए आवेदन दिया है. इधर जुलाई 2019 में निगम ने ऐसे बिल्डरों और आर्किटेक्ट को नोटिस भी जारी किया था लेकिन उन पर इसका कोई असर नहीं हुआ. शहर में पिछले 18 सालों में 2941 बहुमंजिला भवनों का निर्माण हुआ है.

निगम ने जुलाई 2019 में दिया था नोटिस

30 जुलाई 2019 को नगर निगम ने रांची के सभी रजिस्टर्ड बिल्डर और आर्किटेक्ट को ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट देने के लिए नोटिस भेजा था. नोटिस में यह कहा गया था कि नक्शा पास कराने के बाद तय समय सीमा पर भवनों का निर्माण नहीं हो पा रहा था. इसके अलावा निर्माण पूरा होने के बाद भी बिल्डर नगर निगम से ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट नहीं ले रहे हैं जबकि दोनों ही अनिवार्य की श्रेणी में आते हैं.

हो चुके हैं हादसे

बिल्डरों के मनमाने और निगम की ढीलेपन रवैये से दो बार बड़े हादसे हो चुके हैं. 2018 मई में गोपाल कंपलेक्स में आगजनी की घटना में 50 लोग फंस गए थे. वहीं साल 2018 में ही एचबी रोड में एक अपार्टमेंट में आगजनी में 40 लोग फंस गए थे.

बिल्डर नहीं देते कंपलीशन सर्टिफिकेट

दरअसल नियम के तहत बहु मंजिला बिल्डिंग बनाने वाले डेवलपर को नियम और शर्तों के अनुसार बिल्डिंग बनाने के बाद निगम से कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेना होता है. इसके बाद निगम द्वारा ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट जारी किया जाता है इससे पहले नक्शा के अनुरूप बिल्डिंग बना है या नहीं यहां से ही लेफ्ट बालकोनी पार्किंग जनरेटर रूम की जांच होती है.

निगम की लापरवाही पर चैंबर की खामोशी

अधिवक्‍ता दीपेश कुमार निराला का कहना है कि एक तरफ तो RMC/RRDA/सरकार, 2017 के पहले के भवनों को ना तो ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट/ कंपलीशन सर्टिफिकेट इश्यू कर रही है और ना ही अभी वर्तमान में रेरा के तहत आसानी से प्रोजेक्ट का रेरा निबंधन नंबर मिल रहा है. इससे पूरा बिल्डर समुदाय परेशान है.

दीपेश का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में जब निगम द्वारा कार्रवाई की जाती है तो भुक्‍तभोगी व्‍यवसायिों द्वारा विरोध और आपत्ति दर्ज की जाती है. जबकि ऐसी बातों पर आवाज चैंबर के द्वारा उठनी चाहिए. चैंबर की खामोशी भी कई सवाल खड़ा करती है.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.