रिम्‍स रांची के डॉक्‍टर की लिस्‍ट जो अपनी कमाई से खुश नहीं, करते हैं प्राईवेट प्रैक्सिस

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रिम्‍स डॉक्‍टर्स ,जो करते हैं प्राईवेट प्रैक्टिस

  • हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एलबी मांझी बरियातू स्थित लाइफ केयर अस्पताल में मरीजों को देखते हैं.
  • हड्डीरोग विशेषज्ञ डॉ गोविंद गुप्ता निरामया अस्पताल में समय देते हैं.
  • नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ राहुल, सर्जन डॉ शीतल मलुआ भी कोकर स्थित निरामया अस्पताल में मरीजों का इलाज करते हैं.
  • रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी सुरेश टोप्पो आलम नर्सिंग होम में बैठते हैं.
  • यूरोलॉजिस्ट डॉ. अरशद जमाल बरियातू जोड़ा तालाब के पास स्थित लेक वियू नर्सिंग होम में समय देते हैं.
  • न्यूरो सर्जन सीबी सहाय भी अपने आवास पर मरीजों को बुलाते हैं.
  • स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शशि बाला अंजुमन अपस्ताल में मरीजों का इलाज करती हैं.
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इसके अलावा अन्य कई अस्पतालों में ये डॉक्‍टर ऑन कॉल मरीजों को देखने पहुंचते हैं. डॉक्‍टर कई बार रिम्स में मरीजों का इलाज करने के बाद उन्हें अपने आवास या निजी क्लिनिक पर आने की सलाह भी देते हैं.

#Ranchi: डॉक्‍टर्स की यह सूची newswing.com ने जारी की है. अपनी रिपोर्ट ने न्‍यूज विंग ने दावा किया है कि रिम्‍स के ये डॉक्‍टर सरकारी मेडिकल कॉलेज में नियमित योगदान के साथ-साथ बाहर के निजी क्‍लीनिक में धंधा करते हैं और मोटी कमाई करते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि रिम्स के डॉक्‍टर सिर्फ रिम्स की कमाई से ही संतुष्ट नहीं हैं. ज्यादा कमाने की चाहत में डॉक्‍टर निजी प्रैक्टिस भी करते हैं. किसी ने फलां क्लिनिक से, तो किसी ने फलां अस्पताल से अपनी-अपनी सांठ-गांठ बना रखी है.

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डॉक्‍टर रिम्स में कम और निजी क्लिनिक में ज्यादा नजर आते हैं. जबकि, रिम्स में सभी डॉक्‍टर्स को सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक और अपराह्न तीन से शाम पांच बजे तक ड्यूटी पर उपस्थित होना रहता है. लेकिन, ये डॉक्‍टर इस दौरान रिम्स में उपस्थित रहना अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते. पैसों की भूख ने धरती के भगवान कहे जानेवाले इन डॉक्‍टर्स को गैरजिम्मेदार बना दिया है.

रिम्स में भर्ती मरीज डॉक्‍टर्स के लिए बन गये चारागाह

रिम्स में डॉक्‍टर मरीजों को देखने में दिलचस्पी नहीं दिखाते, यहां के मरीज उनके लिए चारागाह के समान है. वो रिम्‍स से मरीजों को अपने क्लिनिक में मरीजों को जांच और इलाज के लिए भेजते हैं. डॉक्टर निजी क्लिनिक में 500 से 1000 रुपये तक फीस लेकर बड़े चाव से मरीजों का इलाज करते हैं. रिम्स में इन्हीं डॉक्‍टर्स को मरीजों का इलाज करने में सिरदर्द होने लगता है. इलाज तो दूर की बात है, मरीजों की रिपोर्ट तक देखने में रिम्स के डॉक्‍टर नौटंकी करते हैं और उन मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी अपने जूनियरों पर थोप देते हैं.

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आयकर ने डॉ. हेमंत नारायण के निजी क्लिनिक की ली तलाशी

अभी तीन पहले ही रिम्स के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ हेमंत नारायण के निजी क्लिनिक में आईटी डिपार्टमेंट की टीम द्वारा सर्वे किया गया. इसमें यह पाया गया कि डॉ हेमंत सिर्फ रिम्स से मिलनेवाली सैलरी का ही रिर्टन फाइल करते हैं. जबकि, निजी प्रैटिक्स से भी उनकी आमदनी लाखों में होती है.

 

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