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Video: आरक्षण के लिए उलगुलान शुरू, लगा नारा ‘पिछड़ोंं का बढ़ाओ कोटा, नहीं तो बटन दबेगा नोटा’

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Ranchi: आबादी के अनुसार पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण बढ़ाने की मांग को लेकर जय झारखंड अभियान के तहत सिल्ली प्रखंड अंतर्गत बनता-हजाम के रामजेहरा मैदान में ग्रामीणों की बैठक हुई. बैठक को सम्बोधित करते हुए सुनील कुमार महतो ने कहा कि झारखंड की कार्यपालिका से लेकर न्यायपालिका में झारखंड के 88 प्रतिशत आदिवासी/दलित/पिछड़ों का प्रतिनिधित्व आबादी के हिसाब से बहुत कम है.

नियुक्ति में उपेक्षा

उन्‍होंने कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग, झारखण्ड कर्मचारी आयोग, महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, अधिविद्य परिषद्, समाज कल्याण बोर्ड, सूचना आयोग, खादी बोर्ड जैसी संस्थाओं के अध्यक्ष पद पर एक भी आदिवासी/दलित/पिछड़े की नियुक्ति नहीं की गई है. झारखंड राज्य के 8 विवि में से किसी में 52 प्रतिशत आबादी पिछड़े वर्ग का कुलपति नहीं है. 235 DySP में से मात्र 14 DySP पिछड़े वर्ग से है. झारखंड के किसी भी जिला न्यायालय में जिला जज के रूप में एक भी आदिवासी/दलित/ पिछड़ा वर्ग का नहीं है. झारखण्ड उच्च न्यायालय के 19 जज में से एक भी जज पिछड़े या दलित वर्ग से नहीं है.

पिछड़ों को सिर्फ 14 फीसदी आरक्षण

सुनील महतो ने कहा कि तमाम सरकारी और गैर सरकारी व्यवस्थाओ में 12 प्रतिशत आबादी वाले सवर्ण वर्ग का कब्ज़ा है इसके वाबजूद उन्हे 10 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया है. 52 प्रतिशत आबादी वाले पिछड़े वर्ग को झारखंड में मात्र 14 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया है और रांची जिले में सवर्णों से भी कम मात्र 8 प्रतिशत का आरक्षण. गुमला, लातेहार, खूंटी, लोहरदगा, सिमडेगा, प. सिंहभूम और दुमका जिले में सवर्णो को 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा. लेकिन, पिछड़ा वर्ग को इन जिले में कोई आरक्षण नहीं मिलता है. निजी क्षेत्र के शैक्षणिक संस्थानों में भी सवर्णों को आरक्षण का लाभ दिया गया है. जबकि आरक्षित वर्ग के आदिवासी/दलित/पिछड़े वर्ग को कोई भी आरक्षण निजी क्षेत्र में नहीं है.

सवर्णों का कब्‍जा

सुनील ने कहा कि चूंकि शासन व्यवस्था और सभी राजनीतिक दलों में सवर्णों का कब्ज़ा है इसलिए उन्होंने अपने मन मुताबिक़ 5 दिनों के अंदर संविधान में संसोधन कर दिया और आदिवासी पिछडो की बात करनेवाले किसी भी दल ने विरोध तक नहीं किया. आदिवासी/दलित/पिछड़े वर्ग से आने वाले किसी भी सांसद और विधायक ने विरोध तक नहीं किया या पिछड़े वर्ग के आरक्षण को बढ़ाने के लिए कभी मुंह भी नहीं खोला.

बैठक को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि संसद और विधानसभाओ में आदिवासी/पिछड़े/ दलित वर्ग के हित में कानून नहीं बनेंगे या सरकार हमारे हित में फैसले नहीं लेंगी तो अब हम आनेवाले चुनाव में नोटा बटन का इस्तेमाल करेंगे. हमारे सांसद और विधायक अपने निजी स्वार्थ या टिकट के लोभ में राजनीतिक दलों के पिछलग्गू बने हुए है. बैठक की अध्यक्षता हरिचरन महतो एवं संचालन दसरथ महतो ने किया. बैठक को रामपदो महतो, करम सिंह महतो, ठाकुर प्रसाद कोइरी, कालीपद महतो, वासुदेव प्रसाद महतो, निर्मल महतो, आदि ने सम्बोधित किया.

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