बंगाल में टीएमसी नेताओं के बगावती पोस्टर- हम दादा के साथ हैं दीदी के नहीं

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Kolkata: शुभेंदु अधिकारी से शुरू हुई बग़ावत की आग का असर अब बंगाल के कई ज़िलों में नज़र आने लगा है. टीएमसी के कई सांसद, विधायक और पार्टी के पुराने नेताओं ने शुभेंदु के समर्थन में पोस्टर वॉर शुरू कर दिया है.

माना जा रहा था कि 19 और 20 दिसंबर को गृह मंत्री शाह के दौरे से पहले टीएमसी में बग़ावत काफ़ी बढ़ सकती है. सबकुछ ठीक उसी दिशा में जाता हुआ दिख रहा है. वहीं, ममता लगातार हर मंच से अपने बाग़ियों को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए ललकार रही हैं.

ममता बनर्जी पर बीजेपी का प्‍लान भारी

बंगाल में ममता के मिशन के मुक़ाबले बीजेपी का प्लान फिलहाल भारी पड़ता नज़र आ रहा है. टीएमसी में बड़े नेताओं की बग़ावत बढ़ती जा रही है, जिसे रोक पाने में ममता की कोशिशें और अल्टीमेटम दोनों नाकाफ़ी साबित हुए हैं. ममता अपने चुनावी मंचों से लगातार बाग़ियों पर हमले कर रही हैं, जवाब में उन पर भी पलटवार हो रहा है, जो टीएमसी के लिए चिंता की बात है.

  1. ममता बनर्जी के बाग़ी नंबर 1- शुभेंदु अधिकारी (पूर्व मंत्री)
  2. ममता के बाग़ी नंबर 2- राजीव बनर्जी (वन मंत्री)
  3. ममता के बाग़ी नंबर 3- जितेंद्र तिवारी (विधायक)
  4. टीएमसी के बाग़ी नंबर 4- सुनील मंडल (सांसद)
  5. ममता के बाग़ी नंबर 5- देवाशीष मुखर्जी (नगरपालिका उप प्रमुख)
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टीएमसी के इन नेताओं की बग़ावत तीसरी बार सत्ता में आने की ममता की कोशिशों पर पानी फेर सकती है. ममता ने उत्तर बंगाल के दौरे में कूचबिहार से बीजेपी पर हमला बोला, क्योंकि उनका मानना है कि टीएमसी में बग़ावत को बीजेपी ही हवा दे रही है.

ममता ने यहां तक कह दिया कि संघ के लोग चंबल के डाकू हैं और वो संघ के हिंदू धर्म के सियासी ब्रांड पर यक़ीन नहीं करती.

पार्टी के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी ने बीजेपी में शामिल होने की तैयारी कर ली है. वहीं, वन मंत्री राजीव बनर्जी ने ममता के ख़िलाफ़ कोलकाता में पोस्टर वॉर शुरू कर दिया है. आसनसोल से टीएमसी विधायक और मेयर जितेंद्र तिवारी ने ममता पर हमला बोला है.

बर्धवान पूर्व से टीएमसी सांसद सुनील मंडल के भी शुभेंदु का साथ देने वाले पोस्टर लग चुके हैं. वहीं, हुगली नगरपालिका के उप प्रशासक देवाशीष मुखर्जी ने भी टीएमसी को कॉरपोरेट सियासत वाली पार्टी करार देते हुए बागी तेवर दिखाए हैं.

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दरअसल, टीएमसी में बग़ावत की शुरुआत शुभेंदु अधिकारी से हुई थी, जो अब ममता के लिए बड़ा सिरदर्द बनते जा रहे हैं.

शुभेंदु की बग़ावत कितनी घातक

शुभेंदु अधिकारी ने TMC से इस्तीफ़ा दे दिया है

शुभेंदु ने विधानसभा सदस्यता छोड़ी और इस्तीफ़ा स्पीकर को भेज दिया

नंदीग्राम से विधायक रहे शुभेंदु पूर्वी मिदनापुर के प्रभावशाली नेता हैं

2007 में नंदीग्राम और 2008 में सिंगूर आंदोलन के रणनीतिकार

शुभेंदु के प्रभाव वाले 6 ज़िलों पर राजनीतिक दबदबा कायम है

पूर्वी मिदनापुर, बर्दवान, जंगल महल रीजन में 65 सीटें

शुभेंदु के प्रभाव वाली 65 विधानसभाओं पर लोकप्रियता बरक़रार

65 सीटों पर जीत से सत्ता का गणित आसान हो सकता है

65 सीटों पर शुभेंदु ने TMC का वोट शेयर 28% से 42% पहुंचाया

शुभेंदु 17 दिसंबर को दिल्ली जाकर शाह से मिल सकते हैं

शाह और नड्डा से मुलाक़ात के बाद बीजेपी का दामन थामेंगे

19 दिसंबर को पूर्वी मिदनापुर में शाह के मंच पर आ सकते हैं

कई बाग़ी नेताओं ने शुभेंदु के समर्थन में पोस्टर लगाए हैं

ममता के ख़िलाफ़ बाग़ी पोस्टर्स पर ‘दादा Vs दीदी’ लिखा है

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बाग़ियों ने लिखा है- हम दादा के साथ हैं दीदी के नहीं

बीजेपी और टीएमसी दोनों का ये मानना है कि शाह के इस बार के दौरे में ममता के बाग़ियों के लिए कुछ विशेष प्लान ज़रूर होगा. एक तरफ़ टीएमसी के बड़े नेता लगातार बग़ावत का झंडा बुलंद कर रहे हैं, तो दूसरी ओर पार्टी के रणनीतिकार उन्हें मनाने में नाकाम साबित हो रहे हैं. ताज़ा मामला बर्दवान पूर्व से सांसद सुनील मंडल का है, जिनके पोस्टर शुभेंदु की तस्वीर के साथ लग चुके हैं.

लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बंगाल में अब तक का बेहतरीन प्रदर्शन किया था, इसलिए उसका वोटबैंक और हौसले दोनों मज़बूत हैं. अब 2021 में टीएमसी के बाग़ी उसकी जीत की राह आसान बनाने में मददगार साबित हो सकते हैं. टीएमसी के लिए अब शायद वक्त आ गया है कि पार्टी में बढ़ती बग़ावत को ममता अपने स्तर पर रोकने की कोशिश करें, क्योंकि ममता ने जिन लोगों को रणनीतिकार बनाया है, बाग़ियों को उन्हीं लोगों से परेशानी है. ऐसे में ममता को बग़ावत के ख़िलाफ़ ख़ुद मोर्चा संभालना होगा.

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