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रानी मिस्‍त्री: हुनरमंद हाथों से हो रहा मजबूत निर्माण

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Ranchi: हमारे घर से लेकर बड़ी-बड़ी गगनचुम्मी इमारतें बनाने वाले लोगों को हम सब हमेशा से राज मिस्त्री के तौर पर जानते रहे हैं. आजकल राज मिस्त्री का काम करने वाली महिलाओं को एक बेहद खूबसूरत नाम रानी मिस्त्री का दिया गया गया है.

देखते ही देखते यह नाम हर किसी की जुबां पर चढ़ने लगा है. उसका नतीजा यह हुआ है कि आज इन महिलाओं के हौसले बुलंद तो हो ही रहे हैं यह सामाजिक बंधनों और परंपरा से निकलकर खूबसूरत इमारतों की नींव रखने में भी खूब जुट रही हैं.

पहले ये महिलाएं स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय निर्माण के कार्य में जुटी और आज वो प्रधानमंत्री आवास योजना समेत कई नव निर्माण के कार्यों में अपने हुनर का लोहा मनवा रही हैं.

महिला हाउसिंग ट्रस्ट के हुनरमंद रानी मिस्‍त्री

रानी मिस्त्री की कार्यकुशलता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि बहनें अब ठेका पर काम लेने लगी हैं. चाहे वह घर का निर्माण हो या सुन्दरीकरण हर काम में वो निपुण हैं.

इस काम को और मजबूती दे रहा है महिला हाउसिंग ट्रस्ट. इस संस्था ने 2016 से अब तक 1100 महिलाओं को कुशल मिस्त्री का प्रशिक्षण दिया है.

रांची जिला के कई इलाकों में जहां रेजा बहने होती हैं, उन्‍हें एमएचटी ने प्रशिक्षिण दिया है. प्रशिक्षण के बाद अब वही महिलाएं शौचालय निर्माण,राजीव आवास में जोड़ाई और प्लास्टर का कार्य के अलावे रानी मिस्त्री के रूप में अपने बस्ती के साथ–साथ अन्य बस्तिओं में प्रधानमंत्री आवास का निर्माण कर रही हैं. इनके काम को महिला आयोग ने भी सराहाऔरसम्मानित किया है.

विकास योजनाओं में सहभागी बन रहीं रानी मिस्‍त्री

लेकिन पुरुष प्रधान राज्य में आज भी महिलाओं को रानी मिस्त्री के रूप में नहीं अपनाया जा रहा है.एक ही कम के लिए पुरुष को अधिक और महिलाओं को कम मजदूरी दी जा रही है.

पुरुषों की तुलना में महिलाएं अपने काम के लिए अधिक सजग होती है साथ ही साथ राज्य में विकास योजनाओं के गति पकड़ने के कारण आजकल रानी मिस्त्री की डिमांड भी खूब है.

सरकार हो या कोई निजी संस्था हर कोई एक मात्र राज्य झारखंड में इस महिला मिस्त्री को बढ़ावा दे रहा है जिसका सिर्फ एक ही उद्देश्य है. हडिया-दारू से उपर उठ कर उनकी रोजगार क्षमता बढ़े और उन्हें बेहतर वेतन मिल सके. जिसमें महिलाएं भी पीछे नहीं हैं.

वह भी अब फक्र से कहती हैं कि पहले रेज़ा का काम करते थे जिसमे सिर्फ सर पे बोझ उठाते थे और पैसा भी कम मिलता था अब सिर्फ हुनर का काम कर ज्यादा मजदूरी पाते हैं.

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