डीसी ऑफिस, उत्पाद व भू-बंदोबस्त के भवन अवैध, पर नोटिस तक नहीं, आम लोगों की भवन को तोड़ने का फरमान

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Ranchi: रांची नगर निगम एक शहर में 2 नियम लागू किए हुए हैं. एक ओर नगर आयुक्त की कोर्ट से रोजाना निजी भवन संस्थान और होटल हॉस्पिटल को तोड़ने का आदेश जारी हो रहा है, दूसरी ओर निगम कार्यालय के बगल में कलेक्ट्रेट बिल्डिंग, सर्वे मैदान के बगल में स्थित सेटेलमेंट ऑफिस और कांके रोड पुलिस लाइन स्थित उत्पाद भवन सहित 20 से अधिक सरकारी भवन बिना नक्शा के बने हुए हैं. इन भवनो को निगम ने आज तक ना तो नोटिस भेजा ना कोई कार्यवाही हुई.

नगर निगम के नए भवन बिल्डर मार्केट का नक्शा पास किया तो तो उसमें विचलन किया गया. बावजूद नगर निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की. निगम के अफसरों ने कभी सरकारी भवनों की जांच नहीं की. यह भी नहीं देखा कि बिल्डिंग बायलॉज के तहत भवन बन रहे हैं या नहीं. निगम की इस तरह की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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इधर नगर आयुक्त ने स्पष्ट कर दिया कि जिन भवनों का नक्शा नहीं है और निगम कोर्ट में भवन मालिकों ने समय देने के बाद भी नक्शा जमा नहीं किया है, उन भवनों को हर हाल में तोड़ा जाएगा.

गुरुवार को निगम कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए नगर आयुक्त ने कहा कि अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ संयुक्त अभियान चल रहा है. कई लोग बोल रहे हैं कि जिस समय बिल्डिंग बना उस समय नक्शा पास नहीं होता था, ऐसे लोगों को अपने दावे के समर्थन में कागजात जमा करने का समय दिया गया. लेकिन किसी ने कागजात जमा नहीं किया. उनके पक्ष को सुनने के बाद ही कोर्ट ने आदेश जारी किया है. कुछ लोग पिक एंड चूज का आरोप लगा रहे हैं. जो पूरी तरह बेबुनियाद है, जो भवन तोड़ने हैं. उसका डाटा है.

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सरकारी भवन कैसे बने इसकी जानकारी किसी के पास नहीं

नगर निगम ने वर्ष 2016 से पहले कितने सरकारी भवन का नक्शा पास किया, इसका रिकॉर्ड बताने से इनकार कर दिया. पिछले 4 वर्षों के दौरान नगर निगम बिल्डिंग, रविंद्र भवन, नया हाईकोर्ट भवन, विधान सभा भवन, वेंडर मार्केट का ही नक्शा स्वीकृत हुआ है.

आरआरडीए ने किसी सरकारी भवन का नक्शा पास किया है या नहीं इसका भी रिकॉर्ड नहीं है. आरआरडीए के अधिकारियों ने बताया कि सभी नक्शा की फाइल सीबीआई के पास है. इसलिए कुछ भी नहीं बताया जा सकता है. ऐसे में सदर हॉस्पिटल, नेपाल हाउस, प्रोजेक्ट भवन, जल भवन सहित अन्य सरकारी भवन कैसे बने. इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है.

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रांची नगर निगम के डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने सेवा सदन सहित पुराने भवनों को तोड़े जाने के फैसले का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि आरआरडीए का बिल्डिंग बायलॉज 1974 में बना तब नक्शा कहां से पास होता.

हाई कोर्ट का आदेश भी नहीं मानते नगर निगम और आरआरडीए

नगर निगम और RRDA के अफसर हाईकोर्ट के आदेश को भी नहीं मानते हैं. झारखंड हाई कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस भगवती प्रसाद ने वर्ष 2011 में शहर में हुए नक्शा घोटाले की सीबीआई जांच का आदेश दिया था. लेकिन आज तक सीबीआई भी नक्शा घोटाला का उद्भेदन नहीं कर पाई. हाईकोर्ट ने अवैध भवनों के निर्माण पर रोक लगाने के लिए शहर में बने सभी भवनों का सर्वे करने का आदेश दिया था, लेकिन आरआरडीए निगम के अफसर 9 वर्ष में सर्वे तक नहीं करा पाए.

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