राज्यसभा चुनाव: बाप को टिकट नहीं मिला तो विधायक बेटा नाराज

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Puskar Mahto

Ranchi: झारखंड प्रदेश से राज्‍यसभा चुनाव (Rajya Sabha Election Jharkhand) के लिए होने वाले 2 सीटों में से 1 सीट पर कांग्रेस (Congress) के गोड्डा विधायक इरफान अंसारी (Irfan Ansari) अपने पिता फुरकान अंसारी के लिए टिकट चाहते थे. लेकिन, झारखंड प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह (RPN Singh) व कांग्रेस संसदीय बोर्ड ने फुरकान अंसारी (Furkan Ansari) के स्थान पर रामगढ़ निवासी व कांग्रेसी नेता शहजादा अनवर (Shahzada Anwar) को राज्‍यसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट देने का काम किया. फुरकान अंसारी पूर्व सांसद भी हैं.

अब फुरकान अंसारी के विधायक बेटा इरफान अंसारी बगावत पर उतर गए हैं और कांग्रेस के झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह के खिलाफ बयानबाजी करने लगे हैं. अब झारखंड कांग्रेस का अंतर्कलह खुलकर सामने आ गया है.

राज्यसभा का चुनाव दिलचस्प

इससे कांग्रेस प्रत्याशी शहजादा अनवर की जीत की दावेदारी पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष प्रभाव देखने को मिल सकता है. इधर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ वोटिंग करने वाले निर्दलीय विधायक भी अब कांग्रेस के पचड़े में नहीं पड़ना चाहते हैं.

वैसे कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह सारी व्यवस्थाओं को समझ रहे हैं और कुशल राजनीतिज्ञ के तौर मामले को पटाक्षेप की ओर ले जाएंगे और राज्यसभा का चुनाव को दिलचस्प बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे.

फिलवक्त कांग्रेस के विधायक इरफान अंसारी के द्वारा उठाया गया कदम दल-बदल कानून के दायरे में आ सकता है. अगर वह मतदान के दौरान नकारात्मक रूप अख्तियार करते हैं तो उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. इसलिए विधायक इरफान अंसारी को काफी सोच समझकर ही कदम उठाना होगा.

इरफान अंसारी की नाराजगी

चूंकि इरफान अंसारी का राजनीतिक कैरियर काफी लंबा है. समय रहते सचेत हो जाना चाहिए और अपनी नाराजगी को समाप्त कर पार्टी द्वारा घोषित उम्मीदवार को विजयश्री दिलाने की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए.

इरफान अंसारी की नाराजगी स्वाभाविक थी और मांग भी उचित. फुरकान अंसारी स्वाभाविक रूप से राजनीति के नक्षत्र में कुशल राजनेताऔर सोच समझ बेहतर रखने वाले हैं. भाजपा के सामने चुनौती खड़ा करने की दिशा में फुरकान अंसारी सबसे सफल एवं योग्य उम्मीदवार साबित होते हैं.

इसके बावजूद आरपीएन सिंह ने काफी सोच समझ के साथ ही यह कदम उठाया होगा. जिसका फलाफल 28 मार्च को परिणाम के रूप में सामने आएगा.

चूंकी राजनीति में कुछ भी संभव है. कहा जाता है किस समय ऊंट किस करवट बैठेगा वक्त आने पर पता चलेगा. इरफान अंसारी ने अपने पिता फुरकान अंसारी के लिए सियासी पटल पर लोकतांत्रिक लड़ाई लड़कर बेटा होने का फर्ज निभाया है. वहीं अब कुशल राजनीतिज्ञ बनकर अब नई तारीख लिखने की जरूरत होगी. जो उनके राजनीतिक कैरियर के लिए मील का पत्थर साबित हो सकेगा.

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