राज्यसभा चुनाव: भाजपा को याद आये पुराने साथी, दीपक प्रकाश कभी सरयू तो कभी आजसू को लगा रहे गले

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Pushkar Mahto

Ranchi: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा के प्रत्याशी दीपक प्रकाश चुनाव जीतने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. मौसम का मिजाज की परवाह नहीं है. उन्हें परवाह है तो बस राज्यसभा का चुनाव जीतने की, सलिए वह सुबह-सुबह भाजपा से निष्कासित एवं झारखंड के बुद्धिजीवी राजनीतिज्ञ व विधायक सरयू राय से मिले.

सरयू राय से मिलकर दीपक प्रकाश ने ना सिर्फ अपने पक्ष में मतदान करने की अपील की. बल्कि, राज्यसभा का चुनाव जीतने का गुर भी सीखा.

सरयू राय से मिलने के दौरान दीपक प्रकाश के चेहरे पर मुस्कान थी, वह खुश नजर आ रहे थे. सरयू राय ने उन्हें गले लगाकर आशीर्वाद दिया.

दीपक प्रकाश का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में उनके अपने 25 विधायक पहले से हैं. इसके अलावा बाबूलाल मरांडी का एक मत, भाजपा से निष्कासित निर्दलीय विधायक अमित यादव का एक मत, आजसू पार्टी का दो मत मुझे प्राप्त है, सभी लोगों से मेरे पक्ष में मतदान में सहयोग की अपील की है. विधायकों ने जीत के प्रतिआश्वासन दिया है,इसलिए निश्चित हमारी जीत होगी.

दीपक प्रकाश इसी उम्मीद और भरोसे के साथ निरंतर आगे बढ़ रहे हैं और अपना चुनाव में विधायकों के द्वार पहुंच रहे हैं और उनका महत्वपूर्ण वोट मांग रहे है. उनका यह काम व मेहनत 26 मार्च तक चलेगा.

ज्ञात हो कि राज्यसभा का चुनाव झारखंड प्रदेश में 2 सीटों पर होने जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी की ओर से दीपक प्रकाश मात्र एक प्रत्याशी हैं,जबकि प्रतिद्वंद्विता की स्थिति में यूपीए की ओर से दो प्रत्याशी हैं.इनमें दिसुम गुरु व झामुमो के अध्यक्ष शिबू सोरेन एवं कांग्रेस की ओर से यूपीए के शहजादा अनवर प्रत्याशी के रूप में सामने हैं.

जीत का लक्ष्य भले ही बड़ा नहीं है लेकिन राज्यसभा का चुनाव जीतना वर्तमान परिपेक्ष में यूपीए की ओर से घोषित प्रत्याशी शहजादा अनवर एवं भारतीय जनता पार्टी के दीपक प्रकाश के लिए थोड़ी चुनौती जरूर है. जब तक परिणाम 28 मार्च को सामने नहीं आ जाते. क्योंकि प्रत्येक प्रत्याशी अपने अपने बलबूते पर चुनाव जीतने की रणनीति बनाकर मैदान में उतरे हुए हैं और दोनों ही प्रत्याशियों का एकमात्र लक्ष्य निर्दलीय विधायकों को सबसे पहले अपने पक्ष में करना उसके बाद पार्टियों की ओर सेंधमारी करना.

सेंधमारी करने का काम राजनीति में कोई नई बातें नहीं है आम है ,होता रहा है .इसलिए सभी लोग चाहते हैं कमजोर कड़ी को ढूंढ कर उसे अपने पक्ष में सबसे पहले करना.लेकिन पार्टियों के द्वारा व्हिप जारी हो जाने के पश्चात कोई भी विधायक दल बदल कानून में फंसना नहीं चाहता है. क्योंकि उसकी अपनी राजनीति और राजनीतिक भविष्य होता है.इसलिए भूलकर भी कोई भूल नहीं करना चाहता है.

इसके बावजूद भी लोग संभावनाएं तलाशते हैं कि कोई विधायक चुनाव के दौरान पहुंचे ही नहीं और किसी को बैठा कर भी हम उसका मत हासिल कर सकते हैं अर्थात वोट का प्रतिशत गिरा कर या वोट की संख्या गिरा कर.

राजनीति में साम ,दंड भेद सभी प्रकार की नीति अपनाये जाते है. माले के विधायक विनोद कुमार सिंह पूर्व में ही घोषणा कर चुके हैं कि राज सभा के चुनाव में व्यस्त रहेंगे. वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के विधायक बाघमारा से हैं दुल्लू महतो जी फरार चल रहे हैं. ढुल्लू महतो के ऊपर अपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं और फरार हैं. अभी तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है.

संशय की ऐसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी को ढुल्लू महतो की कमी को भी भरपाई करनी है. ऐसी परिस्थितियों में अगर दीपक प्रकाश मेहनत कर रहे हैं, निर्दलीयों से मिल रहे हैं तो उनका कदम सकारात्मक है.

इधर शिबू सोरेन अपनी जीत को लेकर पूर्णत:निश्चित हैं.आराम से है.जेएमएम के पास 30 विधायकों के आंकड़े प्रयाप्त है.

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