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बिजली टैरिफ बढ़ोतरी की जनसुनवाई में खुलेगी रघुवर सरकार के दावों की पोल-पट्टी

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Ranchi: झारखंड में बिजली की व्‍यवस्‍था से आप कितने संतुष्‍ट है. सरकार तो कहती है कि हम शहर-शहर और गांव-गांव हर घर में 24 घंटे मुहैया करा रहे हैं. (JBVNL) झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड पूरे डाटा के साथ एक बार फिर बिजली की दर बढ़ाने के लिए आमदा है.

अगर आप सरकार के इन दावों से सहमत नहीं हैं. तो यह मौका है अपनी बात रखने का. 12 फरवरी 2019 को झारखंड विद्युत नियामक आयोग की ओर से आईएमए रांची में बिजली व्‍यवस्‍था और दर वृद्धि को लेकर जन सुनवाई आयोजित की गयी है. इसमें हर वर्ग चाहे वह शहर का हो या गांव का. अपनी बात रख सकता है.

वर्किंग डे में क्‍यों

लोकल खबर से बातचीत करते हुए झारखंड राज्‍य विद्युत नियामक आयोग के सलाहकार समिति के सदस्‍य अजय भंडारी कहा जनसुनवाई वर्किंग डे पर क्‍यों रखा जाता है. जनसुनवाई से जन को गायब कर दिया जाता है. यह अधिकारियों की सोची समझी साजिश है. बिजली पर जो जनसुनवाई है वह चैंबर और जेसिया एक तरफ और जेबीवीएनएल एक तरफ होता है. चार साल से यही ड्रामा चल रहा है. लोगों की सुविधा के अनुसार जनसुनवाई होनी चाहिए.

एक्‍शन क्‍यों नहीं

उन्‍होंने कहा कि जनसुनवाई का फायदा क्‍या हो रहा है. जितने भी दिशा-निर्देश नियामक आयोग जेबीवीएनएल को देता है. उसमें से 80 फीसदी लागू होता ही नहीं है और नियामक आयोग उस पर कोई एक्‍शन भी नहीं लेता है. एक साल बीत जाता है. उसके बाद फिर जनसुनवाई होता है. यह जनसुनवाई कहां है. ये तो लीपापोती है.

भगत सिंह का ट्रायल

अजय बताते हैं कि पिछले साल मैंने एक शब्‍द कहा था- हुजूर ये भगत सिंह का ट्रायल है, फैसला तो आप लिख चुके हैं. सिर्फ दिखावे की प्रक्रिया कर रहे हैं. हमको तो यही लगता है कि यह भगत सिंह का ट्रायल है और सही मायने में ऐसा ही होता है.

अजय भंडारी ने कहा कि नियामक आयोग के टैरिफ ऑर्डर में जो निर्देश दिये जाते हैं. उन निर्देशों को आप लागू नहीं कराते हैं. तो क्‍या सुधार हुआ है. नियामक आयोग का कार्यक्षेत्र सिर्फ दर तय करना नहीं है. प्राईवेट भागीदारी को बढ़ावा देकर कंपीटिशन लाना है. दक्षता (efficiency) लानी है और कंज्‍यूमर के हितों की रक्षा करनी है. तो क्‍या ये कंज्‍यूमर के हितों की रक्षा करते हैं.

2 घंटे और 152 स्‍पीकर

उन्‍होंने कहा कि जनसुनवाई की कहानी देख लिजिए. पूरे जनसुनवाई में जन को सिर्फ 2 घंटे मिलते हैं. यानी 120 मिनट. पिछली का का अटेंडेंस रजिस्‍टर देख लिजिए करीब 152 स्‍पीकर थे. ये सभी जनसुनवाई में बोलना चाहते थे. 152 लोग 120 मिनट में अपनी बात रखेंगे. क्‍या इसे जनसुनवाई कहा जा सकता है.

जनसुनवाई में बड़े-बड़े पावर प्‍वाइंट प्रजेंटेशन दिखाये जाते हैं. यह पावर प्‍वाइंट प्रजेंटेशन तो सभी को मेल कर दिया जा सकता है. वह नियामक आयोग को पेन ड्राइव में दे सकता है. इसमें जन को बुलाकर सुनना चाहिए.

गांव वाले बतायेंगे हकीकत

इस बार जनसुनवाई में गांव के लोगों को भी अपने प्रयास के बुलाया गया है. घर-घर बिजली का हल्‍ला बहुत हो रहा है. अब घर-घर बिजली पहुंची है या सिर्फ तार पहुंची है, यह गांव के लोग भी बतायेंगे.

पिछली बार जनसुनवाई के दौरान मैंने कहा भी था कि we are the people . पर नियामक आयोग ने बना दिया Who are the people. जन कहां है. 70 साल बाद भी यहां के आदिवासी, मूलवासी और गांवा वाले जनसुनवाई के रडार पर तो हैं ही नहीं.

Live Streaming

लोकल खबर अपने ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म पर  इस महत्‍वपूर्ण जनसुनवाई का लाइव स्‍ट्रीमिंग करेगा. आप इस लाइव स्‍ट्रीमिंग को https://localkhabar.com/live/ पर क्लिक करके देख सकते हैं.

 

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