Rafale Scame: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- सीबीआई जांच हुई तो देश को होगा भारी नुकसान

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New Delhi: Rafale Deal राफेल लड़ाकू विमान मामले में रिव्यू पिटिशन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई लंच के बाद फिर शुरू हुई. संजय सिंह की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इन्‍कार किया. राफेल मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लड़ाकू विमान से संबंधी कोई भी अतिरिक्त दस्तावेज़ लेने से इन्‍कार कर दिया.

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि रक्षा मंत्रालय से कुछ दस्तावेज किसी कर्मचारी द्वारा चुराए गए थे. उन्होंने कहा कि हम रक्षा खरीद जिसमें राज्य की सुरक्षा शामिल है, उससे निपट रहे हैं। यह बहुत ही संवेदनशील मामला है.

लंच ब्रेक के बाद सुप्रीम कोर्ट में फिर से राफेल मामले में रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई शुरू हुई. संजय सिंह की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने किया इन्‍कार. कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट पर आप नेता संजय सिंह के द्वारा दिया गया बयान काफी अपमानजनक है.

राफेल रिव्यू पिटिशन की सुनवाई के बाद और सिंह को कोर्ट को समझाने का मौका देने के बाद अपमानजनक टिप्पणियों के लिए संजय सिंह के खिलाफ कार्रवाई करेगा.

प्रशांत भूषण ने सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार याची को कोर्ट में फैक्ट रखने से रोक रहा है और यह अवमानना है.

सुनवाई के दौरान जस्टिस जोसेफ ने कहा कि भले ही चोरी किए गए दस्तावेजों का हवाला दिया जाये और अगर इसे प्रासंगिक पाया जाता है तो भी कोर्ट इस पर गौर कर सकती है.

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने कहा कि एफ 16 उन्नत किस्म का जहाज है, क्या हमें उससे बेहतर जहाज नहीं चाहिए; वैसे मिग ने अच्छा काम किया है जो 1960 का बना है. मामले में सीबीआई जांच से राफेल को लेकर डील में डैमेज होगा. देशहित में ये ठीक नही है. राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला रिव्यू में नहीं है. अगर सवाल है कि जांच की मांग पर विचार नहीं हुआ तो फिर आप गंभीर आरोपों की जांच की मांग पर राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ लेने की कोशिश कर रहे हैं.

इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि अगर अब सीबीआई जांच का निर्देश दिया जाता है, तो देश को भारी नुकसान होगा. उन्‍होंने कोर्ट को बताया कि राफेल डील से जुड़े दस्तावेज की चोरी के मामले में अब तक एफआइआर दर्ज नहीं हुई है. अगर हुई होती तो कुछ याची का नाम भी होता. दस्तावेज के स्रोत का खुलासा उन लोगों द्वारा किया जाना चाहिए जिन्होंने इसे प्रकाशित किया था.

सीजेआइ ने कहा कि मुख्य सवाल यह है कि अगर प्रासंगिकता या भ्रष्टाचार है तो क्या कोर्ट को साक्ष्य या दस्तावेज पर गौर नहीं करना चाहिए. इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि इस पर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह रक्षा और सीक्रेट्स से संबंधित है.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि हिंदू अखबार, याचिकाकर्ता भूषण और अन्य लोग चोरी के दस्तावेजों पर भरोसा कर रहे हैं, जिसके लिए उन्हें आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत अभियोजन का सामना करना पड़ेगा. जो किया गया है, वह अपराध है. हम इसका विरोध कर रहे हैं क्योंकि ये दस्तावेज संलग्न नहीं किए जा सकते. रिव्यू को खारिज किया जाए.

इससे पहले प्रशांत भूषण ने कहा कि राफेल फैसले में कई सारी गलतियां हैं, जिन तथ्यों पर भरोसा किया गया है. सरकार के सीलबंद नोट में तथ्यात्मक गड़बड़ियां होने की बात कही. कोर्ट का फैसला सरकार के दिए गलत नोट पर आधारित था. सरकार ने भी अपने नोट में टाइप की भूल से मतलब बदलने की बात स्वीकारी थी. प्रशांत भूषण ने एनराम द्वारा दिए गए 8 पेज की नेगोशिएटिंग टीम के तीन सदस्यों की रिपोर्ट हिंदी में दिखाई.

बता दें कि कोर्ट ने पिछले साल 14 दिसंबर के अपने आदेश में राफेल डील की जांच की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था. इसके बाद फैसले के खिलाफ रिव्‍यू पिटिशन दायर की गई थी. अब सुप्रीम कोर्ट राफेल डील को लेकर 14 दिसंबर 2018 के अपने फैसले के खिलाफ दायर रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई कर रहा है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच इस पर सुनवाई कर रही है.

राफेल डील को लेकर विपक्षी दल खासकर कांग्रेस और उसके अध्यक्ष अध्यक्ष राहुल गांधी सरकार पर लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि इस रक्षा सौदे में भ्रष्‍टाचार हुआ है. हालांकि, मोदी सरकार साफ कर चुकी है कि इस रक्षा सौदे में कोई भ्रष्‍टाचार नहीं हुआ है और यूपीए के दौर में हुई डील से सस्‍ते में राफेल विमान खरीदे जा रहे हैं.

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