झारखंड लॉकडाउन ई-पास बनाने में प्राइवेसी सुरक्षित नहीं, तकनीकी कमियों का कोई भी कर सकता है गलत इस्‍तेमाल

by

Ranchi: झारखंड में 16 मई सुबह से घर से बाहर निकलने के लिए ई-पास जरूरी है. इस नियम को तोड़ने वाले को जुर्माना और कोर्ट का चक्‍कर लगाना पड़ सकता है. स्‍वास्‍थ्‍य जागरूकता सप्‍ताह में बढ़ी सख्‍ती के बाद इस नियम से झारखंड में हर कोई ऑनलाइन ई-पास निकालने में जुटा हुआ है. इसकी वजह से अहले सुबह http://epassjharkhand.nic.in/ पोर्टल कुछ समय के लिए क्रैश हो गया. ई-पास के लिए बना झारखंड सरकार के इस पोर्टल का सर्वर लोड नहीं ले सका. परेशान लोग ई-पास के लिए सोशल मीडिया, व्‍हाट्सएप और दूसरे ऑनलाइन माध्‍यम से उपाय सर्च करने में जुट गए ताकि वे घर से बाहर अपने जरूरी काम निपटा सके.

हर कोई इस जुगाड़ में है कि ई-पास कहां से बनायेंगे? ई-पास बनाने का मौजूदा तरीका और सिस्‍टम में लोगों की प्राइवेसी सुरक्षित नहीं है.

  • मोबाइल ओटीपी वेरिफिकेशन की सुविधा नहीं है यानी अगर कोई चाहे तो मुख्यमंत्री या राज्यपाल के नंबर का इस्तेमाल करके भी इसमें लॉग इन कर सकता है या फिर कोई आलतू-फालतू जैसे बिना नंबर के नंबर का इस्तेमाल करके लॉग इन कर सकता है.
  • आधार कार्ड नंबर के बदले आप कोई भी 12 अंक डाल दीजिए, स्वीकार कर लेगा. बिना आधार की तस्वीर अपलोड किये भी आप आगे बढ़ सकते हैं. आधार कार्ड का नंबर सही दिया जा रहा है या गलत यह वेबसाइट इसकी जांच नहीं कर सकता है.
  • पास निर्गत करने की पूरी प्रक्रिया ही ढीली है. कोई भी इसका किसी भी विवरण के साथ दुरूपयोग कर सकता है. इस वेबसाइट में भरी जा रही जानकारी किसी भी तरह से सुरक्षित नहीं है यानी अगर आपने अपना खाता यहां बनाया है, तो मैं आसानी से आपके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करते हुए आपका पासवर्ड रिसेट कर सकता हूं. आपको इसकी खबर तक नहीं होगी.
  • पैदल बाहर निकलनेवालों के लिए साफ निर्देश नहीं है. अगर कोई पैदल या साइकिल वाला या ठेलेवाला हुआ तो वह पास कैसे बनायेगा. यह व्यवस्था सिर्फ वाहन मालिकों के ही पास निर्गत कर सकती है.
  • कायदे से मोबाइल पर मैसेज आना चाहिए ताकि स्पष्ट हो कि जिस व्यक्ति को पास निर्गत​ किया है, यह ई-पास उसी को जा रहा है. पुलिसिया जांच भी सिर्फ पास देखकर न हो, बल्कि एसएमएस देखकर भी हो. तकनीकी भाषा में इसे डूयल वेरिफिकेशन कहते हैं. अभी की स्थिति यह है कि निर्गत पास को आसानी से फोटोशॉप कोई भी व्यक्ति अपने नाम का पास बना सकता है.
  • कल शाम से ही यह वेबसाइट स्लो हैं, जबकि अखबारों के अनुसार अभी लगभग सवा लाख ही पास निर्गत हुए हैं. जब संभालने की क्षमता नहीं थी तो क्यों जारी किया गया पास सिस्टम? सोचिए, सवा लाख पास निर्गत करने में ये हाल है तो सिर्फ रांची की आबादी लगभग 10 लाख से ज्यादा है सभी को निर्गत करना पडे, तो इस व्यवस्था के पसीने छूट जायेंगे.
  • इस पास निर्गत करने की व्यवस्था में उपयोगकर्ता के फोटो होने का भी विकल्प होना चाहिए था, जो नहीं है. जिसके कारण लोग आसानी से बराक ओबामा, इमरान खान, नरेंद्र मोदी और कोरोना कुमारी जैसे नाम का पास बना कर इस व्यवस्था का माखौल उड़ा सकते हैं या उड़ा रहे होंगे.
Read Also  झारखंड में शुरू होगी 61 करोड़ की कृषक पाठशाला, जानें क्‍या होगा फायदा

झारखंड गरीबों का राज्‍य है. एक बड़ी के पास न रोजगार है और न पैसा. भूख से मौत होने वाले इस राज्‍य में ऐसे भी परिवार हैं जिनके पास अनाज के लाले पड़े हैं वो ई-पास के लिए स्‍मार्टफोन कहां से लाये.  

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.