बंगाल चुनाव में भाजपा को सबक सिखाने की तैयारी कर रहे किसान

by

New Delhi: नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान दिल्ली बॉर्डर पर 84 दिनों से जमे हुए हैं. सरकार के साथ 11 दौर की बैठक हो चुकी है. सड़क से लेकर संसद तक गरमा-गरम बहस के बाद भी बात नहीं बनी, तो किसानों ने अब आंदोलन का रुख बंगाल की तरफ मोड़ दिया है. इस बंगाल चलो का आह्वान महापंचायत के मंच से किया जा रहा है.

आंदोलनकारी किसानों ने उनका समर्थन ना करने वालों के खिलाफ वोट की अपील है. किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि बंगाल में किसान पंचायतें करेंगे. वहीं दूसरे किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा है कि बीजेपी हारेगी, तभी तो आंदोलन जीतेगा.

हालांकि बंगाल में संयुक्त किसान मोर्चा का जनाधार नाम का ही है. फिर भी इसके साइड इफेक्ट बीजेपी को दूसरे राज्यों में कहीं बैकफुट पर ना ले जाएं. इसकी रणनीति बनाने के लिए मंगलवार को बीजेपी का मेगा मंथन हुआ. अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जमीन से जुड़े यूपी, राजस्थान और पंजाब के नेताओं संग बैठक की. सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में शाह ने तीन बड़ी बातें कहीं.

Read Also  झारखंड में 22 से 29 अप्रैल तक संपूर्ण लॉकडाउन, जानिए क्‍या है गाइडलाइन

शाह का तीन सूत्रीय फॉर्मूला

पहले ये कि बीजेपी नेता खापों में जाएं. दूसरी ये कि सच्चाई जाट समाज को बतानी होगी. और तीसरे ये कि कम्युनिस्ट हमारी विचारधारा को खत्म करना चाहते हैं, आंदोलन का किसानों से कोई मतलब नहीं. अमित शाह के इस तीन सूत्रीय फॉर्मले को ध्यान में रखते हुए पंजाब, राजस्थान और यूपी के नेताओं को अगले 3 से 4 दिनों में ठोस रणनीति बनाकर 20 दिनों के लिए जमीनी स्तर पर काम करने का आदेश दिया गया है. लेकिन सूत्रों के मुताबिक ये जानकारी मिली है कि किसान बिल की बारीकियों को समझाते हुए बीजेपी एक बुकलेट तैयार करा रही है.

बुकलेट में किसान कानून को आसान शब्दों में समझाया जाएगा. आंदोलन पर बैठे ज्यादातर किसान जाट हैं, इसलिए जाट बाहुल्य इलाकों में बीजेपी नेता बुकलेट के साथ जाएंगे और लोगों से चर्चा करेंगे. इस रणनीति से बीजेपी का मकसद ये है कि आंदोलन को मिल रहे जनसमर्थन को जड़ से ही काट दिया जाए और जनाधार नहीं तो आंदोलन नहीं. लेकिन ओम प्रकाश चौटाला का दावा कुछ और है. आईएनएलडी अध्यक्ष ओमप्रकाश चौटाला का कहना है कि संघर्ष से ही सत्ता का पतन होता है, ये सरकार जाएगी, मध्यवधि चुनाव होंगे.

Read Also  झारखंड में 22 से 29 अप्रैल तक संपूर्ण लॉकडाउन, जानिए क्‍या है गाइडलाइन

अभी तक आंदोलन राजनीतिक नहीं दिख रहा था, लेकिन बंगाल को लेकर टिकैत से चढ़ूनी तक ने जो एलान किया है, उससे आंदोलन में राजनीति की परत चढ़ने का संकेत मिलता है. और अगर ऐसा हुआ तो आंदोलन का मुद्दा, मकसद, माएने तीनों पटरी से उतर जाएंगे.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.