झारखंड में बिजली संकट और गहरायेगा, नियमित विद्युत आपूर्ति के लिए सरकार को देना होगा 9000 करोड़ बकाया

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Ranchi: झारखंड में 7 जिलों में बिजली संकट का दायरा और बढ़ेगा. सरकार पर बकाया सिर्फ डीवीसी का ही नहीं है. बल्कि टीवीएनएल भी राज्‍य सरकार का बड़ा लेनदार है. बकाया नहीं मिलने से यह कंगाल हो चला है. कंपनी के पास कोयले खरीदने के भी पैसे नहीं हैं.

डीवीसी और टीवीएनएल को 9000 करोड़ रुपये देने होंगे. तभी ये कंपनियां निर्बाध बिजली आपूर्ति कर सकेंगी. सरकार ने बिजली कंपनियों को बकाये का भुगतान नहीं किया झारखंड में बिजली के लिए हाहाकार मचेगा.

बिजली कंपनी के अल्‍टीमेंटम को हल्‍के में लेती है सरकार

बीएएन भारत की रिपोर्ट के अनुसार डीवीसी ने झारखंड सरकार को अल्टीमेटम दिया था कि 25 फरवरी से बिजली की सप्लाई बंद कर सकता है. अल्टीमेटम में कहा गया था कि बकाये का भुगतान नहीं कर बिजली वितरण निगम ने पावर परचेज एग्रिमेंट (पीपीए) का उल्लंघन किया है और निगम इसके भुगतान में फेल हुआ है.

डीवीसी के चीफ इंजीनियर (कामर्शियल) की ओर से बिजली वितरण निगम के चीफ इंजीनियर (कामर्शियल एंड रेवेन्यू) को दी गई नोटिस में उल्लेख किया गया है कि बकाये का भुगतान नहीं होने से काफी परेशानी हो रही है, लिहाजा डीवीसी आपूर्ति चालू रखने में असमर्थ है.

पत्र में कहा गया है कि डीवीसी रोजाना 600 मेगावाट की आपूर्ति झारखंड को करता है. नोटिस जारी करने की तिथि 10 फरवरी है और 15 दिन के भीतर बकाये का भुगतान करने की मियाद तय की गई है. अगर इस दौरान भुगतान हुआ तो आपूर्ति नियमित रहेगी, वरना 25 फरवरी की रात 12 बजे से डीवीसी झारखंड को बिजली की सप्लाई बंद कर देगा. इसके बाद भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया.

टीवीएनएल में वित्तीय संकट

झारखंड का एकमात्र थर्मल पावर प्लांट टीवीएनएल (तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड) में वित्तीय संकट गहरा गया है. यह सब बिजली वितरण निगम के बकाये को लेकर हुआ है. वितरण निगम के पास टीवीएनएल का बकाया बढ़कर लगभग 4000 करोड़ रुपये हो गया है.

अब टीवीएनएल प्रबंधन के पास कोयला खरीदने के लिये पूरा पैसा जुगाड़ नहीं हो पा रहा है. एक दिन में दोनों यूनिटों को चलाने के लिये 7000 टन कोयले की जरूरत होती है. हर महीने 32 करोड़ का कोयला खरीदा जाता है. वहीं टीवीएनएल के अफसरों- कर्मियों को भी वेतन देने में लगभग छह करोड़ रुपये खर्च होते हैं.

झारखंड में 2500 मेगावाट बिजली की कमी

झारखंड में 2500 मेगावाट बिजली की कमी है. खुद ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 2019 में 5696 मेगावाट बिजली की जरूरत है. जबकि राज्य के पांचों लाइसेंसी लगभग 3255 मेगावाट ही बिजली की आपूर्ति करते है.

डीवीसी 946, जुस्को 43, टाटा स्टील 435, सेल बोकारो 21 और बिजली वितरण निगम 1200 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करते हैं. इसके अलावा अन्य स्त्रोतों से भी बिजली ली जाती है.

बिजली खरीद में 40 करोड़ की वृद्धि

झारखंड की बिजली व्यवस्था निजी और सेंट्रल सेक्टर पर टिकी हुई है. निजी और सेंट्रल सेक्टर से हर दिन औसतन 660 मेगावाट बिजली ली जाती है. पिछले दो साल में बिजली खरीद में 40 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है.

दो साल पहले हर महीना करीब 360 करोड़ रुपये की बिजली खरीदी जाती थी. अब हर माह लगभग 400 करोड़ रुपये की बिजली खरीदी जा रही है. बरसात को छोड़कर दूसरे मौसम में सिकिदिरी हाइडल केवल पीक ऑवर में चलता है. फिलहाल इसकी दोनों यूनिट से 130 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है. प्रति यूनिट बिजली उत्पादन में 58 पैसा खर्च आ रहा है.

क्या है टीवीएनएल की फैक्ट फाइल

  • टीवीएनएल की दोनों यूनिटों को चलाने के लिये हर माह 1.5 लाख टन कोयले की है जरूरत
  • एक दिन में 7000 टन होती है कोयले की जरूरत
  • टीवीएनएल हर महीने खरीदता है 32 करोड़ का कोयला
  • एक यूनिट बिजली उत्पादन में 700 से 800 ग्राम कोयले की जरूरत
  • बिजली उत्पादन के लिए जेड-8 और जेड-9 श्रेणी के कोयले का होता है उपयोग
  • एक यूनिट बिजली उत्पादन में 3.50 रुपये प्रति यूनिट आता है खर्च
  • एक माह में 20 करोड़ की बिजली का होता है उत्पादन
  • प्रति माह डीजल में 3.5 करोड़ खर्च
  • मेंटेनेंस में दो से ढ़ाई करोड़ खर्च
  • कर्मचारियों-अधिकारियों के वेतन में हर माह लगभग छह करोड़ खर्च
  • बिजली वितरण निगम हर दिन टीवीएनएल से लगभग ढ़ाई करोड़ की खरीदता है बिजली

किस कंपनी से कितने करोड़ की बिजली प्रतिमाह

  • एनटीपीसी- 70 करोड़
  • एनएचपीसी- 70 करोड़
  • टीवीएनएल- 70 करोड़
  • आधुनिक- 20 करोड़
  • इंलैंड पावर- 13 करोड़

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