सामूहिक दुष्कर्म की घटना के 16 दिनों बाद पुलिस पहुंची कोचांग

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#Ranchi : रोजगार के लिए पलायन, शौचालय का उपयोग सहित अन्य मनवीय कार्यों के प्रति जगरूकता फैलाने वाली नाटक मंडली की पांच युवतियों के साथ दुष्कर्म और पुरुष सदस्यों के साथ हुए अमानवीय व्यवहार की घटना के 16 दिनों के बाद बुधवार को पुलिस दो पीड़ित पुरुष सदस्यों को लेकर अड़की प्रखंड के कुरूंगा गांव पहुंची. गौरतलब है कि कोचांग में नाटक मंडली के 11 सदस्यों का 18 जून को अपहरण कर लिया गया था. इनमें पांच यवतियां और छह पुरुष थे. उन्हें छोटा उली जंगल ले जाया गया, जहां मंडली के पुरुष सदस्यों की बेहरमी से पिटाई की गयी थी और युवतियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था.

पीडित सदस्यों ने बताया कि उनके साथ काफी अमानवीय व्यवहार किया गया था. एएसपी अभियान अनुराग राज के नेतृत्व में गयी पुलिस टीम ने पीडितों से जानने का प्रयास किया कि उन्हें किस रास्ते से जंगल ले जाया गया था. उस रास्तें पर आने-जाने वालों ने उन्हें देखा होगा और शायद वे उन्हें पहचानते हों. जांच के दौरान पुलिस कोचांग चैक के पास रहने वाले मार्टिन नाग नामक व्यक्ति कें घर तक पीड़ितों को लेकर गयी, लेकिन वह घर पर नहीं मिला. पुलिस जब खूंटी लौटने लगी, तो रास्ते में मार्टिन मिल गया.

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पुलिस वालों ने उसका फोटो लेकर उसे गुरुवार को एसपी कार्यालय आने की चेतावनी देकर छोड़ दिया गया. बताया गया कि बहुत जल्द कोचांग में पुलिस पिकेट की स्थापना की जायेगी. डीजीपी डीके पांडेय ने इसकी घोषणा की है. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कोचांग में स्कूल भवन के अलावा कोई सरकारी भवन है ही नहीं. इसलिए स्कूल में ही पिकेट की स्थापना करने कें अलावा कोई विकल्प नहीं है.

दुष्कर्म की घटना से कोचांग की काफी बदनामी हुई है:

ग्राम प्रधान पुलिस ने कोचांग के ग्राम प्रधान काली मुंडा के घर जाकर उससे भी पूछताछ की. ग्राम प्रधान ने कहा कि सामूहिक दुष्कर्म की घटना से कोचांग की काफी बदनामी हुई है. काली मुंडा ने पुलिस को बताया कि ग्राम सभा ने खुद अपराधियों को ढूंढ निकालने का ऐलान किया है.

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उसने कहा कि दुष्कर्मियों को गिरफ्तार करने में ग्राम सभा पुलिस की मदद करेगी. बदली-बदली सी थी गांव की फिजां सामूहिक दुष्कर्म की घटना के 16 दिनो के बाद कोचांग गाव की फिजां बदली-बदली सी नजर आ रही थी, जहां 15 दिन पहले कोई गैर आदिवासी गांव में घुस जाता था, या सरकारी कर्मचारी पहुंचता था, तो तीर-धनुष और अन्य पारंपरिक हथियारों से लैस भीड़ ऐसे घेर लेती थी और सवालों के बौछार कर देती थी.

सरकारी अधिकारी और कर्मचारी उस गांव में जाने से कतराते थे, पर सामूकि दुष्कर्म और घाघरा की घटना के बाद पूरा माहौल बदला सा नजर आया. कल तक जो ग्राम सभा पुलिस को गालियां देती थी, वही ग्राम सभा का ग्राम प्रधान आज पुलिस को हर संभव सहयोग देने की बात कह रहा है.

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हां, उसकी शिकायत थी कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी जबरन उन पर योजनाओं को थापते हैं. ग्राम सभा की बात प्रशासन नहीं सुनता. यही कारण है कि गांव में शौचालय नहीं बना रहे हैं. उसने कहा कि पुलिस उसके भाई सुखराम को पकड़ ले गयी है, जबकि वह पूरी तरह निर्दोष है.

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