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मंडल डैम का शिलान्यास करने आ रहे पीएम मोदी का भारी विरोध, हजारों ग्रामीण हिरासत में

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Ranchi: भारी विरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को झारखंड के पलामू जिले के मंडल में एक बांध परियोजना का शिलान्यास करने आ रहे हैं. लेकिन शिलान्यास करने आ रहे पीएम मोदी के विरोध में इलाके के ग्रामीण सड़क पर उतर आए हैं.

पीएम मोदी को ज्ञापन देने जा रही महिलाओं सहित हजारों ग्रामीणों को शुक्रवार को पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया. इस दौरान भारी संख्या में मौजूद पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवानों ने महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की भी की.

वहीं विस्थापितों को मुआवजा देने की मांग को लेकर पदयात्रा निकाल रहे झारखंड के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता केएन त्रिपाठी को भी पुलिस ने सैकड़ों समर्थकों के साथ गिरफ्तार कर लिया.

शुक्रवार को मंडल डैम के डूब क्षेत्र में आने वाले गांव मेराल, नवरनागु, चेमो सानिया, कुटकू, मदगडी, चपिया के हजारों ग्रामीण अपना ओढऩा-बिछौना और खाने-पीने की सामग्री लेकर डाल्टनगंज में शनिवार को प्रस्तावित प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में जाने के लिए पैदल ही निकले थे.

इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी अपने बच्चों को गोद में लिए शामिल थीं. हजारों ग्रामीणों की भीड़ जब मंडल वन विभाग के नाका के पास पहुंची तो सभी को प्रशासन ने जबरदस्ती रोक दिया. पुलिस ने सड़क पर ही ग्रामीणों की घेराबंदी कर दी.

भीड़ में शामिल सैकड़ों महिलाओं ने जब आगे बढ़ने का प्रयास किया तो पुलिस ने उनके साथ जमकर धक्का-मुक्की की.

प्रशासन द्वारा पीएम मोदी की सभा में जाने से रोके जाने पर ग्रामीणों ने कहा कि पुलिस-प्रशासन अपना कर्तव्य और कानून भूल गया है. इसीलिए पुरुष पुलिसकर्मी महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की कर रहे हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि अगर उन्हें रोकना ही था तो महिला पुलिसकर्मियों को क्यों नहीं भेजा गया. वहीं प्रशासन के अधिकारियों द्वारा धक्का-मुक्की की घटना से इनकार करते हुए कहा गया कि पुलिस अपनी ड्यूटी कर रही है. एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि ऊपर से निर्देश के आलोक में ग्रामीणों को रोका जा रहा है.

वहीं विस्थापितों की मांग के समर्थन में और झारखंड को प्राथमिकता के आधार पर पानी देने की मांग को लेकर राज्य के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता केएन त्रिपाठी के नेतृत्व में शुक्रवार को सैकड़ों लोगों ने 60 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकाली, जिसे पुलिस ने बीच में ही रोक दिया.

इस दौरान पुलिस ने पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी सहित पदयात्रा में शामिल सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं और विस्थापितों को गिरफ्तार कर बरवाडीह थाना ले गई.

इससे पहले अपने तय कार्यक्रम के अनुसार राज्य के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री केएन त्रिपाठी शुक्रवार को अपने समर्थकों के साथ मंडल जाने के लिए निकले थे. उनका काफिला केचकी वन विभाग के चेक नाका के पास पहुंचा तभी पूर्व से तैनात पुलिस ने काफिले को रोक दिया.

जिसके बाद त्रिपाठी वाहन से उतरे और नाका खोलकर समर्थकों के साथ आगे निकल गए. बरवाडीह पहुंचने पर जैसे ही उनका काफिला मंडल के लिए रवाना हुआ, वैसे ही सिंचाई विभाग कॉलोनी के समीप पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने बलपूर्वक पूर्व मंत्री के काफिले को रोक दिया.

प्रशासन की कार्रवाई से नाराज पूर्व मंत्री और उनके समर्थकों ने जमकर हंगामा किया और जिला प्रशासन, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वहीं पर धरने पर बैठ गए. इस दौरान सैकड़ों की संख्या में मौजूद प्रदर्शकारियों ने बरवाडीह-मंडल मार्ग को भी जाम कर दिया.

सड़क पर ही सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री त्रिपाठी ने कहा कि केंद्र की बीजेपी सरकार आगामी चुनाव को देखते हुए मंडल डैम परियोजना की आधारशिला रखने जा रही है. इसके निर्माण से झारखंड के किसानों को कोई फायदा नहीं मिलेगा, उल्टे सैकड़ों विस्थापितों से उनकी जमीन छीन ली जाएगी.

उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ कांग्रेस पार्टी पद यात्रा निकालकर प्रधानमंत्री के समक्ष जनता की बात पहुंचाना चाहती थी और मांग करना चाहती थी कि डैम का पानी पलामू के साथ चतरा के किसानों को भी मिले. डैम के निर्माण से विस्थापित होने वाले परिवारों को मुआवजे के साथ-साथ नौकरी भी दी जाए.

प्रशासन द्वारा पदयात्रा से रोके जाने के बाद त्रिपाठी अपने समर्थकों के साथ वापस बरवाडीह की ओर पैदल निकल गए, लेकिन थाना गेट के समीप एसडीपीओ और एसडीएम ने दल बल के साथ पूर्व मंत्री और उनके समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया.

बता दें कि पलामू जिले के मंडल इलाके के लोग पीएम मोदी का दो मुद्दों पर विरोध कर रहे हैं. पहला मुद्दा, विस्थापितों को भूमि अधिग्रहण कानून के मुताबिक उचित मुआवजा देने की मांग है और दूसरा, चूंकि प्रस्तावित डैम का पूरा का पूरा पानी बिहार में जाना है, इसलिए प्रभावित ग्रामीणों की मांग है कि जहां पर डैम बन रहा है वहां के 4 जिलों को भी पानी दिया जाए. बता दें कि इस डैम से करीब 1600 परिवार विस्थापित हुए हैं.

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