मोदी ने ‘मन की बात’ 2.0 में जल संकट पर जोर दिया

मन की बात में पीएम मोदी ने साझा किया चुनावी सफर के अनुभव

New Delhi: पीएम मोदी ने पिछले मन की बात कार्यक्रमों को याद करते हुए कहा कि मैं इस कार्यक्रम को बहुत मिस कर रहा था क्योंकि ये बहुत ही जीवंत कार्यक्रम था. लोगों के भी कई सारे संदेश आए कि वे मन की बात को मिस कर रहे हैं. जब मैं यह पढ़ता हूं तो बहुत प्रसन्नता का अनुभव करता हूं. पीएम ने कहा कि यह मौन संवाद मेरे लिए मेरी स्प्रिचुअल यात्रा की अनुभूति का अंश था.

पीएम मोदी ने कहा कि चुनाव की आपाधापी में व्यस्तता तो ज्यादा थी लेकिन मन की बात का मजा ही गायब था, एक कमी महसूस कर रहा था. हम 130 करोड़ देशवासियों के स्वजन के रूप में बातें करते थे. मैने आखिरी बार मन की बात में ही कह दिया था कि मैं फिर आपके बीच आउंगा. पर मैं खुद आया नहीं हूं. आपने मुझे बुलाया है. मुझे खुद यहां बिठाया है. मुझे कई सारे संदेश मिलते हैं. पर उसमें शिकायत का तत्व  बहुत कम होता है. कल्पना कीजिए कि देश के प्रधानमंत्री को कोई पत्र लिखे और कुछ मांगे नहीं. ये देश के करोड़ो लोगों की भवना कितनी ऊंची होगी.

पीएम मोदी ने कहा कि देश और समाज के लिए आईने की तरह है. ये हमें बताता हाँ कि देशवासियों के भीतर मज़बूती, ताक़त और टैलेंट की कोई कमी नहीं है. जब देश में आपातकाल लगाया गया तो उसका विरोध राजनितिक दायरे तक सीमित नहीं रहा था. जेल की सलाखों तक आंदोलन सिमट कर नहीं रह गया था. जन जन के मन में आक्रोश था. खोए हुए लोकतंत्र की तड़प थी. सामान्य  जीवन मे लोकतंत्र का क्या मजा होता है हमे तब तक पता नहीं चलता जब तक कि ये हमसे छीन न लिया जाए. भारत गर्व के साथ कह सकता है कि हमारे लिए लोकतंत्र नियम कानून से परे संस्का्रों में है. ये हमारी विरासत है. इस बार के चुनाव में 61 करोड़ से ज्यालदा लोगों ने वोट दिया. दुनिया में चीन को छोड़कर किसी भी देश की आबादी से ज्यादा लोगों ने वोट किया.

पीएम मोदी ने कहा कि कुछ समय पहले, किसी ने मुझे महान प्रेमचंद की लघु कथाओं का एक संग्रह प्रस्तुत किया. मुझे एक बार फिर उन कहानियों को फिर से देखने का मौका मिला. मानवीय तत्व और करुणा उनके शब्दों में प्रकट होती है. आप सभी से मेरा अनुरोध है- कृपया कुछ समय पढ़ने के लिए समर्पित करें. मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि आप ‘नरेंद्र मोदी मोबाइल ऐप’ पर पढ़ी जाने वाली पुस्तकों के बारे में बातचीत करें. आइए हम उन अच्छी पुस्तकों पर चर्चा करें जिन्हें हम पढ़ते हैं और चर्चा करें कि हमें किताबें क्यों पसंद हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में, कई लोगों ने पानी से संबंधित मुद्दों के बारे में लिखा है. मैं जल संरक्षण पर अधिक जागरूकता देखकर खुश हूं. मैंने ग्राम प्रधानों को जल संरक्षण के महत्व और ग्रामीण भारत में इस विषय पर जागरूकता पैदा करने के लिए कदम उठाने के लिए पत्र लिखा. पानी के संरक्षण का कोई निश्चित तरीका नहीं है. अलग-अलग हिस्सों में, अलग-अलग तरीके अपनाए जा सकते हैं लेकिन उद्देश्य एक ही है- पानी की हर बूंद का संरक्षण करना.

पीएम मोदी ने कहा कि जल की महत्ता को सर्वोपरि रखते हुए देश में नया जल शक्ति मंत्रालय बनाया गया है. इससे पानी से संबंधित सभी विषयों पर तेज़ी से फैसले लिए जा सकेंगे. मेरा पहला अनुरोध है– जैसे देशवासियों ने स्वच्छता को एक जन आंदोलन का रूप दे दिया. आइए, वैसे ही जल संरक्षण के लिए एक जन आंदोलन की शुरुआत करें. देशवासियों से मेरा दूसरा अनुरोध है. हमारे देश में पानी के संरक्षण के लिए कई पारंपरिक तौर-तरीके सदियों से उपयोग में लाए जा रहे हैं. मैं आप सभी से, जल संरक्षण के उन पारंपरिक तरीकों को शेयर करने का आग्रह करता हूं. मेरा तीसरा अनुरोध है कि यदि आप पानी पर काम करने वाले किसी व्यक्ति या एनजीओ के बारे में जानते हैं, तो उनके बारे जानकारी में साझा करें.

पीएम मोदी ने कहा कि मुझे और एक बात के लिए भी आपका और दुनिया के लोगों का आभार व्यक्त करना है. 21 जून को फिर से एक बार योग दिवस में उमंग के साथ, एक-एक परिवार के तीन-तीन चार-चार पीढ़ियां, एक साथ आ करके योग दिवस को मनाया. शायद ही कोई जगह ऐसी होगी, जहाँ इंसान हो और योग के साथ जुड़ा हुआ न हो, इतना बड़ा, योग ने रूप ले लिया है. योग के क्षेत्र में योगदान के लिए प्रधानमंत्री अवार्ड की घोषणा, अपने आप में मेरे लिए एक बड़े संतोष की बात थी. यह पुरस्कार दुनिया भर के कई संगठनों को दिया गया है.

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