पीएम मोदी ने की अजीत डोभाल, CDS जनरल रावत व तीनों सेना प्रमुखों से मुलाकात

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New Delhi: लद्दाख में चीन के साथ चल रहे सीमा गतिरोध के के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों से इस मामले पर चर्चा की. पीएम मोदी से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ बैठक करते हुए लद्दाख की जमीनी स्थिति की समीक्षा की, जहां पिछले कुछ दिनों से भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव बना हुआ है और वे एक-दूसरे के आमने-सामने हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए पीएम मोदी ने विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला से अलग से मुलाकात की. बैठकों का ये दौर ऐसे समय चल रहा है जब सिक्किम और लद्दाख में चीनी और भारतीय सैनिकों की झड़पें हुई हैं.

प्रधानमंत्री को लद्दाख की स्थिति से अवगत कराया

समझा जाता है कि शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने मोदी को पूर्वी लद्दाख में उभरती स्थिति की जानकारी दी. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि पूर्व निर्धारित बैठक का एजेंडा महत्वाकांक्षी सैन्य सुधार और भारत की सैन्य ताकत को मजबूत बनाने के बारे में चर्चा करना था.

सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री को लद्दाख की स्थिति से अवगत कराया गया. हालांकि, इस बैठक के बारे में कोई आधिकारिक टिप्पणी या ब्योरा नहीं आया है. आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल लद्दाख और उत्तरी सिक्किम एवं उत्तराखंड में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उभरती स्थिति पर नजर रखे हुए हैं.

एक अधिकारी ने नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर बताया, ”भारत पर सैन्य दबाव बनाने की चीन की रणनीति काम नहीं करेगी. हम वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति कायम रखना चाहते हैं.” बहरहाल, बैठक में शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने मोदी को वास्तविक नियंत्रण रेखा पर महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजनाओं के लागू होने की स्थिति के बारे में जानकारी दी.

यह बैठक ऐसे समय में हुई जब कुछ ही घंटे पहले चारों जनरलों ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पैंगोंग सो झील, गलवान घाटी, डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी की स्थिति के बारे में जानकारी दी, जहां पिछले करीब 20 दिनों से भारत और चीन के सैनिक आक्रामक रूख अपनाये हुए हैं.

भारतीय सेना मजबूती के साथ डटी रहेगी

सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्री के साथ बैठक के बाद तय हुआ कि चीन के साथ लगने वाली करीब 3,500 किमी लंबी सीमा के रणनीतिक महत्व के क्षेत्रों में भारत अपनी ढांचागत विकास की परियोजनाएं बंद नहीं करेगा. बैठक के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि भारतीय सेना मजबूती के साथ डटी रहेगी और साथ ही स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए बातचीत जारी रहेगी. हालांकि चीन इन्हें रोकने के लिए सोचे-समझे प्रयास कर रहा है और इस के लिए पूर्वी लद्दाख जैसे इलाकों में हालात को बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है.

समझा जाता है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के शीर्ष अधिकारियों को यह कहा है कि कई संवेदनशील इलाकों में चीन के सैनिकों के आक्रामक व्यवहार के बावजूद लद्दाख, सिक्किम, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर महत्वूर्ण परियोजनाओं के क्रियान्वयन की पुन: समीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है.

सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच करीब 20 दिन तक चले गतिरोध के मद्देनजर भारतीय सेना ने उत्तर सिक्किम, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में अपनी मौजूदगी उल्लेखनीय ढंग से बढ़ाई है और यह संदेश दिया है कि भारत चीन के किसी भी आक्रामक सैन्य रुख के आगे रुकने वाला नहीं है.

चीन के अतिक्रमण का कड़ा जवाब दिया जाएगा

उन्होंने बताया कि सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे लगभग हर दिन पूर्वी लद्दाख में तेजी से बदल रहे हालात के बारे में रक्षा मंत्री को जानकारी दे रहे हैं और यह तय किया गया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारतीय इलाकों में चीन के अतिक्रमण का कड़ा जवाब दिया जाएगा.

भारत द्वारा पैंगोंग सो झील इलाके में सड़क बनाने, इसके अलावा गल्वान घाटी में भी दार्बुक-शायोक-दौलत बेग ओल्डी को जोड़ने वाली एक सड़क का निर्माण करने से चीन झुंझलाया हुआ है. सिंह ने मंगलवार को तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ सैन्य बलों में व्यापक सुधार के क्रियान्वयन को लेकर एक बैठक की. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि उक्त बैठक में पूर्वी लद्दाख में स्थिति का मामला उठा या नहीं.

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