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युवा दिवस पर युवाओं की वास्तविक दशा का नाटकों में चित्रण

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युवा दिवस पर नाटक ‘फिर लौट आई ज़िन्दगी” और “गिरगिट” का मंचन”

Ranchi: राष्ट्रीय युवा दिवस यानि की 12 जनवरी को झारखंड फिल्म एन्ड थिएटर एकेडेमी के मिनी सभागार में इन हॉउस थिएटर के तहत राजीव सिन्हा निर्देशित दो नाटकों ‘फिर लौट आई ज़िन्दगी” और “गिरगिट” का मंचन किया गया, जिसका विषय युवाओं पर केंद्रित था.

नाटक ‘फिर लौट आई ज़िन्दगी” में सैंडविच जनरेशन की दशा का चित्रण किया गया, जहाँ एक युवक रवि जो नौकरी, पत्नी, बच्चे और अपने बुज़ुर्ग माँ बाप के बिच खुद को पिसा महसूस करता है. जबकि इसी दौरान माँ के भावनात्मक शब्द एक कठोर दिल वाले बिज़नेस मैन प्रशांत का भी ह्रदय परिवर्तन कर देती है.

वहीं नाटक “गिरगिट” में इंसानों के रंग बदलने की फितरत का बखूबी चित्रण किया गया. दरअसल एक युवक हवलदार कैसे अपने ऊँचे ओहदे के अधिकारी के आगे दुम हिलाने लगता है, जबकि पीठ पीछे अपनी ही शेखी बघारता रहता है. नाटक के अंत जब उसे अपनी गलती का एहसास होता है तब तक काफी देर हो चूका होता है, और उसे अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ जाता है.

कलाकारों में शामिल थे विकास कुमार, मोनिका रानी, दीप्ती अग्रवाल, मोहित कश्यप, आकाश प्रामाणिक, ललित साव, सोनू पाल, निकुंज तुलस्यान, ऋषिकांत, मनवीर, सुरोत्तमा, दीपांशु चटर्जी, बादल व अदिति आर्या.

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