JPSC-JSSC परीक्षाओं में मैथिली को शामिल करने के लिए हाईकोर्ट में PIL

by

Ranchi: झारखंड में मैथिली भाषा को मान-सम्‍मान दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई शुरू कर दी गई है. झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड राज्‍य कर्मचारी चयन आयोग में द्वितीय भाषा के तौर पर मैथिली भाषा को सम्मिलित करने के झारखंड सरकार के फैसले को वापस लेने के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है.

विद्यापति स्‍मारक समिति रांची का कहना है कि रांची, जमशेदपुर, बोकारो, धनकार, देवघर, गोड्डा, पलामू जैसे जिलों के शहरी क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों में मैथिली भाषा-भाषियों की संख्‍या पत्‍येक जिलों में 50 हजार से अधिक है. इसका प्रमाण यह है कि इन जिलों में वर्ष में दो-तनी-चार बार तक बड़े स्‍तर पर मैथिली कार्यक्रम विद्यापति पर्व समारोहों या मिथिला महोत्‍सव या मां जानकी जन्‍म समारोह के नाम से पिछले 60 सालों से आयोजित की जा रही है. इन कार्यक्रमों में मुख्‍यमंत्री, राज्‍यपाल और मंत्रीगण उद्घाटन और मख्‍य अतिथि रहे हैं.

विद्यापति स्‍मारक समिति के अध्‍यक्ष लेखानंद झा का कहना है कि मैथिली भाषा को राज्‍य सरकार के विधानसभा में ध्‍यानाकर्षण विधायक द्वारा उठाये जाने के बावजूद भी नकारात्‍मक रूख अपनाया तब विद्यापति स्‍मारक समिति ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर किया. इसमें हाईकोर्ट से आग्रह किया गया है कि मैथिली भाष को संवैधानिक अधिकार मिले.

हाईकोर्ट में मामले के पैरवीकार वकील एके साहनी ने बताया कि झारखंड सरकार की विधि विभाग की अधिसूचना संख्‍या 1751/लेज दिनांक 19.10.2018 के द्वारा यह स्‍वीकृति 12 भाषाओं के अतिरिक्‍त मैथिली, मगही, भोजपुरी, अंगिका और भुमिज को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया. लेकिन 2018 में मान्‍यता प्राप्‍त होने के तीन वर्षों बाद भी राज्‍य की प्रतियोगी परीक्षा में इन्‍हें सम्मिलित नहीं किया जा सका है.  जबकि 92वां संविधान संशोधन अधिनियम 2003 के द्वारा भारतीय संविधान के आठवीं अनुसूचि में शामिल किया गया और 2004 में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल परीक्षा के मुख्‍य परीक्षा में एच्छिक विषय के रूप में इसे सम्मिलित किया गया है.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.