स्‍वदेसी कोरोना वैक्‍सीन ‘कोवैक्सीन’ के तीसरे चरण का परीक्षण शुरू

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Hayatabad: वैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक ने सोमवार को घोषणा की है कि उसने कोविड-19 के लिए भारत की पहले स्वदेशी वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ के तीसरे चरण के परीक्षणों को शुरू कर दिया है. फेज-3 के ट्रायल में पूरे भारत से 26,000 स्वयंसेवक शामिल किए गए हैं. इसका संचालन भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के साथ मिलकर किया जा रहा है.

हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी ने कहा कि कोवैक्सीन के लिए यह भारत का पहला चरण-3 प्रभावकारिता अध्ययन है, और अब तक का सबसे बड़ा चरण-3 प्रभावकारिता परीक्षण है.

भारत बायोटेक के कोवैक्सीन परीक्षण में शामिल स्वयंसेवकों को लगभग 28 दिनों के भीतर दो इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन दिए जाएंगे.

परीक्षण डबल ब्लाइंडिड कर दिया गया है. यानी जांचकर्ताओं, प्रतिभागियों और कंपनी को यह पता नहीं होगा कि किस समूह का किस प्रकार से टीकाकरण हुआ है.

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इस कोवैक्सीन का परीक्षण 22 संस्थानों में किया जा रहा है, जिसमें नई दिल्ली के एम्स और गुरु तेग बहादुर अस्पताल शामिल हैं.

इसके अलावा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, ग्रांट गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और सर जे.जे. ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, लोकमान्य तिलक म्युनिसिपल जनरल हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज भी इसमें शामिल हैं.

कोवैक्सीन को आईसीएमआर-राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान के साथ भागीदारी में विकसित किया है. भारत बायोटेक दुनिया की एकमात्र टीका कंपनी है, जिसके पास जैव सुरक्षा स्तर-3 (बीएसएल 3) उत्पादन सुविधा है.

उधर अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना का दावा है कि यह वैक्सीन दो से आठ डिग्री सेल्सियस में महीने तक सुरक्षित रह सकती है. यह 94 प्रतिशत असरदार है.

एक सप्ताह पहले ही अमेरिका की ही कंपनी फाइजर और उसकी सहयोगी जर्मनी की बॉयोएनटेक ने 90 प्रतिशत से ज्यादा कारगर वैक्सीन का दावा किया था. वहीं, रूस के रिसर्च सेंटर की स्पुतनिक वी वैक्सीन का असर 92 प्रतिशत रहने का दावा किया है.

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